नई दिल्ली: टूथपेस्ट और पनीर से लेकर सॉफ्ट ड्रिंक्स और यहां तक कि अदरक-लहसुन पेस्ट तक, रोज़ इस्तेमाल होने वाली घरेलू चीज़ें वैसी नहीं हो सकतीं जैसी दिखती हैं. 2026 के पहले कुछ महीनों में भारत भर में पुलिस के कई छापों ने यह उजागर किया है कि ज़रूरी सामान भी नकली बनाकर बाज़ार में बेचे जा रहे हैं.
नकली सामान बनाने वाले गिरोह अब महंगे लग्जरी प्रोडक्ट्स से हटकर ज्यादा बिकने वाले रोजमर्रा के खाने-पीने और इस्तेमाल की चीज़ों पर आ गए हैं. लोग सिर्फ पैसा ही नहीं खो रहे, बल्कि अनजाने में ऐसे केमिकल मिले प्रोडक्ट्स इस्तेमाल कर रहे हैं जो उनकी सेहत को हमेशा के लिए नुकसान पहुंचा सकते हैं.
पिछले हफ्ते भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने दिल्ली पुलिस में कई सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई, जिन्होंने “नकली पनीर” और दूध की “व्यापक बिक्री” को लेकर सवाल उठाए थे और निगरानी संस्था के रूप में FSSAI की भूमिका पर भी सवाल किया था.
FSSAI के अनुसार, इन सोशल मीडिया अकाउंट्स ने संगठन के आधिकारिक दस्तावेजों को अवैध तरीके से हासिल किया और अपने प्लेटफॉर्म पर साझा किया.
दिल्ली पुलिस द्वारा इन एक्स अकाउंट्स को चलाने वाले लोगों की जानकारी—जैसे फोन नंबर, ईमेल आईडी और आईपी लॉग डिटेल—मांगने के कदम पर लोगों ने विरोध जताया है. कई लोग इसे “संदेश देने वाले को ही निशाना बनाना” बता रहे हैं.
इन कार्रवाइयों के लिए कानूनी ढांचा अब खत्म हो चुके इंडियन पीनल कोड (आईपीसी) से बदलकर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट के तहत किया जा रहा है. आमतौर पर मिलावट के मामलों में निर्माताओं पर BNS की धारा 274 (खाद्य और पेय में मिलावट) और धारा 349 (भरोसेमंद ब्रांड की नकल के लिए नकली ट्रेडमार्क का इस्तेमाल) के तहत केस दर्ज होता है.
भारत में हाल ही में हुई जब्तियों और देश के अलग-अलग हिस्सों में अवैध फैक्ट्रियों पर कार्रवाई से चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मिलावट का स्तर अब औद्योगिक स्तर तक पहुंच गया है.
दिप्रिंट ने उन छापों पर नज़र डाली, जिनमें संगठित यूनिट्स का खुलासा हुआ जहां भरोसेमंद ब्रांड के लेबल लगाकर ग्राहकों को नकली सामान बेचा जा रहा था.
दिल्ली में नकली टूथपेस्ट रैकेट
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने गुरुवार को एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया जो भारतीय घरों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली चीज़ों—टूथपेस्ट और सॉफ्ट ड्रिंक्स, को निशाना बना रहा था. कंझावला में पुलिस ने पाया कि एक फैक्ट्री में Sensodyne लेबल लगाकर नकली टूथपेस्ट बनाया जा रहा था.

डीसीपी (क्राइम ब्रांच) पंकज कुमार ने कहा, “अधिकृत प्रतिनिधियों ने सामग्री की जांच की और पुष्टि की कि यूनिट में बनाया और पैक किया जा रहा Sensodyne टूथपेस्ट नकली था और बहुत ही गंदे हालात में तैयार किया जा रहा था, जिससे इसका इस्तेमाल करना सुरक्षित नहीं है. आरोपियों के पास कोई वैध दस्तावेज, बिल, लाइसेंस या अनुमति नहीं थी.”
उन्होंने कहा कि इस मामले के कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया गया है.
पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि गोदाम किराए पर लिया गया था, ट्यूब में स्थानीय रूप से तैयार पेस्ट भरा जाता था और बाज़ार में बेचने के लिए पैक किया जाता था, जबकि इसके लिए संबंधित अधिकारियों या ब्रांड मालिक से कोई वैध लाइसेंस या अनुमति नहीं ली गई थी.
एक्सपायर्ड और एक्सपायरी के करीब खाने-पीने की चीजों का रैकेट
इसी तरह 31 मार्च को दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने एक्सपायर्ड खाने-पीने की चीजों और पेय पदार्थों को “दोबारा तैयार” (रीकंडीशन) करने वाले एक और रैकेट का भंडाफोड़ किया. DCP (क्राइम ब्रांच) हर्ष इंदौरा ने बताया कि आरोपियों ने केमिकल थिनर का इस्तेमाल करके लोकप्रिय सॉफ्ट ड्रिंक ब्रांड्स के हजारों कैन पर लिखी असली मैन्युफैक्चरिंग डेट मिटा दी और उनकी जगह 2026 की नई एक्सपायरी डेट छाप दी.

उन्होंने नकली मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट छापने के लिए डोमिनो प्रिंटिंग मशीन का इस्तेमाल किया. छापे के दौरान पुलिस ने ThumsUp के 600 कैन, Sprite के 840 कैन, Limca के 480 कैन, CocaCola के 1,176 कैन और ब्रांडेड बिस्किट भी बरामद किए.
सूरत का मिलावटी पनीर
सूरत फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने सूरत स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप के साथ मिलकर मार्च के पहले हफ्ते में 1,401 किलो संदिग्ध मिलावटी पनीर जब्त किया. यह पांडेसरा स्थित एक यूनिट में बनाया जा रहा था. FSSAI अधिकारियों ने बताया कि यह यूनिट बिना FSSAI लाइसेंस के चल रही थी.
डीसीपी राजदीप सिंह नकुम ने कहा, जब्त किए गए उत्पाद की लैब रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि इसकी गुणवत्ता मानक से कम थी.
#Gujarat Strict action against food adulteration in #Surat!
Surat Food Safety Dept seized 1401 kg of suspected adulterated Paneer. The unit was operating without an FSSAI license. Samples have been sent for testing to ensure consumer safety. #FSSAIAction #FSSAIinStates pic.twitter.com/5bRBHIkQta— FSSAI (@fssaiindia) March 5, 2026
छापे के दौरान पुलिस ने मशीनरी, इंडस्ट्रियल ग्रेड एसिटिक एसिड और पाम ऑयल भी जब्त किया, जिनकी कुल कीमत 28 लाख रुपये बताई गई. यूनिट के संदिग्ध संचालक को भी गिरफ्तार किया गया है.
हैदराबाद का नकली अदरक-लहसुन पेस्ट
मार्च के आखिरी हफ्ते में हैदराबाद पुलिस की टास्क फोर्स ने एसकेआर फूड प्रोडक्ट्स के मालिक हसन अली रुपानी को अधिकारियों द्वारा की गई अचानक जांच के बाद गिरफ्तार किया.
जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि यूनिट बेहद गंदे हालात में चल रही थी और इसमें खराब गुणवत्ता का कच्चा माल इस्तेमाल किया जा रहा था, जिसमें लहसुन के छिलके भी शामिल थे. साथ ही इसमें एसिटिक एसिड और जैंथन गम पाउडर जैसे पदार्थ मिलाए जा रहे थे.
#WATCH | Hyderabad: Telangana police have arrested one accused involved in manufacturing and selling adulterated ginger and garlic paste.
(Source: IPS Vaibhav Gaikwad Raghunath) pic.twitter.com/pkdNdfr7ho
— ANI (@ANI) March 31, 2026
पेस्ट को खुले प्लास्टिक के टब में तैयार और रखा जा रहा था, जो धूल, मक्खियों और अन्य गंदगी के संपर्क में था, जिससे लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा था. आरोपी फूड-ग्रेड सर्टिफिकेशन नहीं दिखा सका.
छापे के दौरान अलग-अलग पैकिंग साइज में 4,032 किलो कथित अदरक-लहसुन पेस्ट जब्त किया गया, साथ ही 6,210 किलो ढीला और खराब गुणवत्ता का अदरक और लहसुन (छिलके सहित) भी बरामद किया गया.
तेलंगाना में घटिया काजू
29 मार्च को फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट तेलंगाना की फ्लाइंग स्क्वॉड ने हैदराबाद के मल्लापुर में काजू रीपैकिंग एजेंसी पर अचानक जांच की, जहां कई उल्लंघन पाए गए.

FSSAI को 36 किलो काजू में कीड़े मिले, जिसे मौके पर ही फेंक दिया गया और 210 किलो काजू (लगभग 1.5 लाख रुपये कीमत) को गुणवत्ता पर शक होने के कारण जब्त कर लिया गया.
FSSAI द्वारा की गई कार्रवाई
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने 17 मार्च को राज्यसभा में बताया कि FSSAI वैज्ञानिक आधार पर मानक तय करने और समन्वय सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है.
फील्ड स्तर पर कार्रवाई की मुख्य जिम्मेदारी राज्य फूड सेफ्टी अथॉरिटीज की होती है.
राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में फूड सेफ्टी कमिश्नर के तहत नामित अधिकारी (DOs) और फूड सेफ्टी ऑफिसर (FSOs) को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के प्रावधान लागू कराने की जिम्मेदारी दी गई है.
राज्य फूड सेफ्टी विभाग और FSSAI के क्षेत्रीय कार्यालय साल भर निगरानी अभियान, मॉनिटरिंग, नियामक जांच और दूध, घी, मसाले, शहद और पनीर जैसे खाद्य उत्पादों के रैंडम सैंपल लेते हैं.
इनका उद्देश्य फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 और संबंधित नियमों के तहत तय गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना है.
उन्होंने कहा कि पिछले तीन साल (2022–23 से 2024–25) में कुल 5,18,559 खाद्य नमूनों की अलग-अलग लैब में जांच की गई. इस दौरान 88,192 मामलों में जुर्माना लगाया गया, 3,614 मामलों में दोष सिद्ध हुआ और 1,161 लाइसेंस रद्द किए गए.
FSSAI ने रिस्क-बेस्ड इंस्पेक्शन सिस्टम (RBIS) भी विकसित किया है, जिसमें फूड बिजनेस से जुड़े जोखिम के आधार पर जांच की आवृत्ति तय की जाती है और इसके लिए गाइडलाइंस जारी की गई हैं. जिन फूड कैटेगरी को ज्यादा जोखिम वाला माना गया है, उनकी सालाना जांच ज़रूरी है.
उन्होंने कहा, पिछले तीन साल (2022-23 से 2024-25) में कुल 56,259 रिस्क-बेस्ड जांच की गई हैं. उन्होंने यह भी बताया कि देश में फूड रेगुलेटरी सिस्टम को मजबूत करने के लिए FSSAI ने 252 फूड टेस्टिंग लैब को खाद्य नमूनों की जांच के लिए और 24 रेफरल फूड लैब को अपील वाले नमूनों की जांच के लिए अधिसूचित किया है.
FSSAI ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब (MFTL) के लिए फंड भी दिया है, जिसे “फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स” (FSW) कहा जाता है.
मंत्री ने कहा कि मिलावट से निपटने के लिए यह एक अहम साधन है, क्योंकि FSW में मौके पर ही अलग-अलग खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच करने की बुनियादी सुविधा होती है. फिलहाल 35 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 305 FSW तैनात हैं.
10 फरवरी 2026 को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-2026 में फूड सेफ्टी (जिसमें खाद्य मिलावट भी शामिल है) पर की गई कार्रवाई का विवरण दिया. इसके अनुसार 1,55,306 नमूनों की जांच की गई, जिनमें से 27,567 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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