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Sunday, 29 March, 2026
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‘अगर UAE युद्ध में उतरा, तो दुबई तबाह हो सकता है’ :US के टॉप इकोनॉमिस्ट जेफरी सैक्स का दावा

खाड़ी देशों ने ईरान द्वारा उनके ऊर्जा ढांचे पर हमलों की निंदा की है, जिससे इस युद्ध में अमेरिका के समर्थन में उनकी स्थिति और मजबूत होती दिख रही है.

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नई दिल्ली: अमेरिका के प्रमुख अर्थशास्त्री जेफ़री सैक्स ने संयुक्त अरब अमीरात को युद्ध में शामिल होने से सावधान किया है. उन्होंने कहा कि इससे दुबई और अबू धाबी को तुरंत खतरा हो सकता है, क्योंकि ये जगहें पर्यटन के लिए बनी हैं, न कि सैन्य सुरक्षा के लिए.

सैक्स ने कहा कि UAE खुद को एक “अजीब मुश्किल” में डाल चुका है और अमेरिका और इज़राइल के साथ खड़े होकर अपनी गलती को और बढ़ा रहा है.

उन्होंने कहा, “असल में दुबई और अबू धाबी को उड़ा दिया जा सकता है अगर UAE युद्ध में शामिल होता है. ये रिसॉर्ट एरिया हैं. ये पर्यटन स्थल हैं. ये मिसाइल सुरक्षा वाले इलाके नहीं हैं. ये वो जगहें हैं जहां अमीर लोग घूमने और पैसा लगाने आते हैं. और युद्ध में जाना दुबई जैसी जगह के पूरे मकसद को खत्म कर देगा. अमीरात ने यह गलती खुद की है और अब इसे और बढ़ा रहा है.”

सैक्स ने कहा कि खाड़ी देशों का अमेरिका के साथ अब्राहम समझौते के जरिए जुड़ना “खतरे को बुलावा” था, क्योंकि इससे वे अमेरिका पर ज्यादा निर्भर हो गए. उन्होंने इसे पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर के शब्दों में “खतरनाक दोस्ती” बताया.

उन्होंने कहा, “अब्राहम समझौते में शामिल होना, इज़राइल और अमेरिका के साथ खड़ा होना, इस स्थिति में अमीरात के लिए खतरे को बुलावा था. इन देशों ने सब कुछ अमेरिकी सुरक्षा पर दांव पर लगा दिया. उन्होंने सोचा कि अमेरिका की सेना उनकी रक्षा करेगी, इसलिए वे जैसा चाहें वैसा कर सकते हैं. यह एक बड़ी गलती है.”

उन्होंने आगे कहा, “मैं हर दिन किसिंजर की बात दोहराता हूं कि अमेरिका का दुश्मन होना खतरनाक है, लेकिन दोस्त होना घातक है.”

सैक्स ने UAE को सलाह दी कि वह “हारती हुई स्थिति” पर और जोर न दे और अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दे.

उन्होंने कहा, “मुझे गलत न समझा जाए, लेकिन यह बहुत भोला कदम है कि हम ईरान के खिलाफ इस प्रयास में शामिल होंगे और अमेरिका में खरबों डॉलर निवेश करते रहेंगे. अब बहुत हो गया. खुद को बचाइए. स्थिति को समझिए. क्या आप सच में सोचते हैं कि हारती हुई स्थिति पर और जोर देना सही है? लेकिन यही हो रहा है.”

यह आकलन तेहरान के बढ़ते बयानों से मेल खाता है. 20 मार्च को ईरान के विदेश मंत्रालय ने पश्चिम एशिया के देशों को चेतावनी दी कि वे अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए न करने दें.

ईरान ने कहा कि ये सैन्य ठिकाने ही मौजूदा संकट की “मुख्य वजह” हैं और इनका इस्तेमाल तेहरान के खिलाफ किया जा रहा है. सरकार ने चेतावनी दी कि अगर ऐसा हुआ तो इसे आक्रमण में साझेदारी माना जाएगा.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने X पर लिखा, “क्षेत्रीय देशों को तुरंत कदम उठाने की जरूरत है ताकि अमेरिका और ज़ायोनिस्ट शासन उनके क्षेत्र और सुविधाओं का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए न कर सके.”

प्रवक्ता ने यह भी कहा कि जो देश अमेरिका को सैन्य ठिकाने देते हैं, उन्हें इसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं अगर उन ठिकानों का इस्तेमाल ईरान पर हमले में हुआ.

खाड़ी देशों ने ईरान द्वारा उनके ऊर्जा ढांचे पर हमलों की निंदा की है, जिससे इस युद्ध में अमेरिका के समर्थन में उनकी स्थिति और मजबूत होती दिख रही है.


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