नयी दिल्ली, 29 मार्च (भाषा) आवक कम रहने, डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने के साथ-साथ शादी-विवाह के मौसम की मांग बढ़ने से देश के तेल-तिलहन बाजारों में बीते सप्ताह अधिकांश खाद्य तेल-तिलहनों की कीमतों में मजबूती दर्ज हुई और सरसों और सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल की कीमतें मजबूती दर्शाती बंद हुईं। ऊंचे दाम के कारण सुस्त कामकाज के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के दाम स्थिर रहे।
बाजार सूत्रों ने कहा कि बीते सप्ताह संभवत: पहली बार हरियाणा में सोयाबीन तेल के मुकाबले सरसों का दाम नीचे है। सोयाबीन तेल का दाम 165 रुपये किलो है जबकि सरसों तेल का दाम 148.25 रुपये किलो है। इसके अलावा सरसों तेल बगैर प्रसंस्करण के सीधे खाया जाता है। सस्ता होने से सरसों की मांग भी अधिक है। समीक्षाधीन सप्ताह से पहले के हफ्ते में जो आवक 10 लाख बोरी सरसों की हो रही थी वह बीते सप्ताह घटकर लगभग छह लाख 75 हजार बोरी की रह गई। इस परिस्थितियों के बीच बीते सप्ताह सरसों तेल-तिलहन के दाम मजबूत रहे।
उन्होंने कहा कि 31 मार्च के नजदीक आने के कारण कारोबारी लेखाबंदी के काम में जुटे हैं जिससे गतिविधियों में अपेक्षाकृम कमी आई है। लेकिन शादी-विवाह के मौसम की मांग है। उन्होंने कहा कि विदेशों में खाद्य तेलों के दाम मजबूत हुए हैं और इस तेजी के बीच देशी तेल-तिलहन ही फिलहाल परिस्थितियों को संभाल रहे हैं। मौजूदा स्थिति हमारे लिए सबक है कि देशी तेल-तिलहनों का उत्पादन बढ़ाना बेहद जरूरी है ताकि आयात पर निर्भरता को कम से कम किया जा सके।
मौजूदा स्थिति में सरसों, सोयाबीन, कपास नरमा (नरमा से मिलने वाला बिनौला) जैसी फसल ही स्थिति को काबू में रखे हैं। लेकिन लगभग 60 प्रतिशत की आयात पर निर्भरता को देखते हुए देश में खाद्य तेल-तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए जरूरी है कि इनके बाजार को विकसित करने की ओर काफी गंभीरता से ध्यान दिया जाये।
इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हुआ है। पश्चिम एशिया युद्ध जारी रहने के बीच आयातित खाद्य तेलों की आवक भी कम है। इन सभी परिस्थितियों ने खाद्य तेलों के दाम की तेजी पर अपना असर डाला है। उन्होंने कहा कि मूंगफली तेल के दाम ऊंचे हैं और उच्च आय वर्ग के उपभोक्ताओं के बीच इसकी खपत ज्यादा होती है। मूंगफली के मुकाबले बिनौला तेल लगभग 27 रुपये किलो सस्ता है और इस वजह से ज्यादातर गुजरात में उपभोक्ता मूंगफली की जगह बिनौला तेल का उपयोग कर रहे हैं। इन स्थितियों के बीच बीते सप्ताह मूंगफली तेल-तिलहन के दाम स्थिर बने रहे और दूसरी ओर बिनौला तेल के दाम में सुधार देखने को मिला। कपास नरमा की आवक भी अपने पिछले सप्ताह के 60 हजार गांठ के मुकाबले घटकर बीते सप्ताह 42 हजार गांठ रह गई जो इसमें तेजी का एक मुख्य कारण है।
समीक्षाधीन सप्ताह के पूर्व सप्ताह में सोयाबीन डीगम तेल का दाम 1,330-35 डॉलर प्रति टन हुआ करता था जो बीते सप्ताह बढ़कर 1,360-65 डॉलर प्रति टन हो गया। इसके अलावा विदेशों में भी इसके दाम मजबूत हुए हैं। इस तेल का आयात भी कम हुआ है जिन वजहों से सोयाबीन तेल-तिलहन के दाम में सुधार आया।
उन्होंने कहा कि विदेशों में बाजार मजबूत होने और रुपया कमजोर होने की वजह से आयात महंगा बैठने के कारण बीते सप्ताह पाम-पामोलीन तेल के दाम भी मजबूत बंद हुए।
सूत्रों ने बताया कि बीते सप्ताह सरसों दाना 75 रुपये के सुधार के साथ 7,025-7,050 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। दादरी मंडी में बिकने वाला सरसों तेल 225 रुपये के सुधार के साथ 14,825 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों पक्की और कच्ची घानी तेल का भाव क्रमश: 30-30 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 2,460-2,560 रुपये और 2,460-2,605 रुपये टिन (15 किलो) पर बंद हुआ।
समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दाने और सोयाबीन लूज के थोक भाव क्रमश: 25-25 रुपये की तेजी के साथ क्रमश: 5,725-5,775 रुपये और 5,325-5,475 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए।
इसी प्रकार, दिल्ली में सोयाबीन तेल 150 रुपये के सुधार के साथ 16,450 रुपये प्रति क्विंटल, इंदौर में सोयाबीन तेल 150 रुपये के सुधार के साथ 15,850 रुपये और सोयाबीन डीगम तेल का दाम 100 रुपये के सुधार के साथ 13,300 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
मूंगफली तिलहन का दाम 7,250-7,725 रुपये क्विंटल, मूंगफली तेल गुजरात 17,550 रुपये क्विंटल और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 2,770-3,070 रुपये प्रति टिन पर स्थिर रुख के साथ बंद हुए।
समीक्षाधीन सप्ताह में कारोबारी धारणा में आम मजबूती के रुख के अनुरूप, सीपीओ तेल का दाम 25 रुपये के मामूली सुधार के साथ 13,625 रुपये प्रति क्विंटल, पामोलीन दिल्ली का भाव 25 रुपये सुधरकर 15,425 रुपये प्रति क्विंटल तथा पामोलीन एक्स कांडला तेल का भाव भी 25 रुपये की बढ़ोतरी के साथ 14,375 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
तेजी के आम रुख के अनुरूप, बिनौला तेल का दाम 150 रुपये के सुधार के साथ 14,850 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
भाषा राजेश
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