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Saturday, 28 March, 2026
होमविदेश‘गलत पीढ़ी से पंगा ले लिया’: GenZ विरोध प्रदर्शनों को लेकर नेपाल के पूर्व पीएम के.पी. ओली गिरफ्तार

‘गलत पीढ़ी से पंगा ले लिया’: GenZ विरोध प्रदर्शनों को लेकर नेपाल के पूर्व पीएम के.पी. ओली गिरफ्तार

ओली और पूर्व गृह मंत्री को नेपाल की एक समिति की सिफारिश के बाद हिरासत में लिया गया, जिसमें विरोध प्रदर्शन की हिंसा में लापरवाही के लिए उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की बात कही गई. बालेंद्र शाह के पीएम पद की शपथ लेने के एक दिन बाद यह गिरफ्तारियां हुई हैं.

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नई दिल्ली: नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को सितंबर 2025 के हिंसक विरोध प्रदर्शनों के मामले में कथित गैर-इरादतन हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. इन प्रदर्शनों की वजह से सरकार गिर गई थी और कम से कम 77 लोगों की मौत हुई थी. यह गिरफ्तारी नई सरकार के शपथ लेने के एक दिन बाद हुई है.

अधिकारियों ने पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भी गिरफ्तार किया है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने सुरक्षा बलों को प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश दिया था.

पहली बैठक में, प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की अध्यक्षता में बनी नई कैबिनेट ने उन घटनाओं की जांच करने वाली उच्च-स्तरीय आयोग की रिपोर्ट को तुरंत लागू करने का फैसला किया.

काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय समय सुबह करीब 5 बजे काठमांडू के बाहरी इलाके भक्तपुर स्थित उनके घर से ओली को हिरासत में लिया गया.

गिरफ्तारियां गृह मंत्रालय की औपचारिक शिकायत के बाद हुईं, जिसके बाद गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए.

गिरफ्तारी की घोषणा करते हुए, नए नियुक्त गृह मंत्री सुदन गुरूंग, जो खुद भी विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा थे, उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “कानून से ऊपर कोई नहीं है. यह किसी से बदला नहीं है; यह सिर्फ न्याय की शुरुआत है.”

एक अलग पोस्ट में उन्होंने और सीधा संदेश दिया: “आपने गलत पीढ़ी से पंगा ले लिया.”

ओली और लेखक की गिरफ्तारी सितंबर के विरोध प्रदर्शनों की सरकार समर्थित जांच के बाद हुई है. पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यह कार्रवाई पूर्व विशेष अदालत के जज गौरी बहादुर कार्की की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए की जा रही है.

21 सितंबर 2025 को अंतरिम प्रशासन ने आयोग जांच अधिनियम के तहत एक न्यायिक आयोग बनाया था. पूर्व जज गौरी बहादुर कार्की को इसका प्रमुख नियुक्त किया गया, उनके साथ नेपाल पुलिस के पूर्व असिस्टेंट इंस्पेक्टर जनरल (AIG) विज्ञान राज शर्मा और कानूनी विशेषज्ञ बिश्वेश्वर प्रसाद भंडारी को भी शामिल किया गया. आयोग को घटनाओं में हुई ज्यादतियों का अध्ययन करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया था और उम्मीद थी कि चुनाव से पहले रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी जाएगी. ऐसा नहीं हुआ, जिससे आलोचना हुई.

रिपोर्ट को सार्वजनिक करने के बढ़ते दबाव के बीच, बुधवार सुबह मीडिया में रिपोर्ट के कुछ हिस्से सामने आने लगे. बाद में उसी शाम सरकार ने औपचारिक रूप से इसकी एक प्रति संघीय संसद सचिवालय की लाइब्रेरी में रखी. हालांकि, प्रवक्ता एकराम गिरी ने कहा कि गुरुवार शाम तक सचिवालय को रिपोर्ट को लेकर कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली थी.

907 पन्नों की कार्की रिपोर्ट की आलोचना भी हुई है कि यह बिखरी हुई है और इसमें स्पष्टता की कमी है. विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि इसकी सिफारिशों को लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

आयोग को अधिकारियों की “आपराधिक लापरवाही और लापरवाह रवैये” के सबूत मिले, जिसमें खुफिया चेतावनियों पर कार्रवाई न करना और बल के इस्तेमाल को नियंत्रित न कर पाना शामिल है. रिपोर्ट में कहा गया कि यह साफ तौर पर साबित नहीं हो पाया कि गोली चलाने का सीधा आदेश दिया गया था, लेकिन यह निष्कर्ष निकाला गया कि ओली और प्रशासन ने गोलीबारी रोकने के लिए कोई ठोस कोशिश नहीं की, जिससे नाबालिगों सहित आम नागरिकों की मौत हुई.

समिति ने सिफारिश की कि ओली, लेखक और उस समय के पुलिस प्रमुख चंद्र कुबेर खापुंग के खिलाफ नेपाल की दंड संहिता के तहत मुकदमा चलाया जाए, जिसमें 10 साल तक की सजा हो सकती है.

रिपोर्ट में कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों, जिनमें सुरक्षा प्रमुख और नौकरशाह शामिल हैं, के खिलाफ भी कार्रवाई की बात कही गई है. कुछ अन्य के लिए औपचारिक फटकार की सिफारिश की गई है—ऐसे कदम नेपाल के सुरक्षा तंत्र में भविष्य में प्रमोशन को प्रभावित कर सकते हैं.

नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट–लेनिनिस्ट) ने ओली की गिरफ्तारी की निंदा करते हुए इसे “राजनीतिक मकसद से प्रेरित” बताया. पार्टी नेता रघुजी पंत ने कहा कि जांच रिपोर्ट में पर्याप्त आधार नहीं है, जबकि पूर्व विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञावली ने ओली की गिरफ्तारी को पार्टी अध्यक्ष के खिलाफ “राजनीतिक बदला” बताया.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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