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Friday, 1 May, 2026
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गुवाहाटी: अवैध भूजल दोहन को लेकर एनजीटी ने असम सरकार को नोटिस जारी किया

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गुवाहाटी, 27 मार्च (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने गुवाहाटी के कुछ हिस्सों में कथित अवैध भूजल दोहन के मामले में असम सरकार और विभिन्न राज्य एजेंसियों को नोटिस जारी किया है।

एनजीटी की पूर्वी क्षेत्र पीठ ने मिलन कांति दास और अन्य के एक आवेदन को स्वीकार कर यह नोटिस जारी किया है। आवेदकों ने यहां बरशापारा क्षेत्र में कथित अवैध भूजल दोहन पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य ईश्वर सिंह की पीठ ने सोमवार को सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर उन्हें चार सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया।

अधिकरण ने सुनवाई की अगली तारीख आठ मई तय की है।

इस मामले में असम सरकार को प्रतिवादी बनाया गया है, जिसका प्रतिनिधित्व विशेष मुख्य सचिव (पीएचईडी) कर रहे हैं। उनके साथ कार्यकारी अभियंता (पीएचईडी), कामरूप महानगरपालिका के जिला आयुक्त, केंद्रीय भूजल बोर्ड और बरशापारा नंबर एक की जल आपूर्ति प्रबंधन समिति भी प्रतिवादी हैं।

सुनवाई के दौरान, आवेदकों ने बताया कि सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बरशापारा क्षेत्र में भूजल दोहन के लिए कोई एनओसी जारी नहीं की गई है।

यह आरोप लगाया गया है कि बरशापारा नंबर एक जल आपूर्ति योजना प्रबंधन समिति बिना अनुमति के कई बोरवेल संचालित कर रही है और प्रतिदिन कई घंटों तक भूजल का दोहन कर रही है।

याचिका में दावा किया गया है कि इस क्षेत्र को अर्ध-गंभीर भूजल क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत किया गया है, और इस तरह के अत्यधिक दोहन के कारण भूजल स्तर में तेजी से गिरावट आई है, जिससे स्थानीय निवासियों को पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

आवेदकों ने यह भी आरोप लगाया कि पीने का पानी उपलब्ध कराने के इच्छित उद्देश्य से हटकर, भूजल की व्यावसायिक आपूर्ति की जा रही है और अभी तक कोई प्रभावी नियामक कार्रवाई नहीं की गई है।

अधिकरण ने कहा कि यह मामला पर्यावरण से संबंधित एक महत्वपूर्ण प्रश्न है । और उसने आवेदन स्वीकार कर लिया।

भाषा तान्या राजकुमार

राजकुमार

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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