प्रयागराज, 26 मार्च (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्राथमिकी दर्ज करने में कथित खामियों को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक, प्रमुख सचिव (गृह) और बरेली के एसएसपी को विसंगतियों की व्याख्या करने वाली रिपोर्ट दाखिल करने और सुधारात्मक उपाय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी ने डीजीपी और प्रमुख सचिव (गृह) को पुलिस अधिकारियों को संवेदनशील बनाने का एक तंत्र विकसित करने का भी निर्देश दिया। इसके अलावा, अदालत ने बरेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
अदालत ने 17 मार्च के अपने आदेश में इस मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल से शुरू हो रहे सप्ताह में करने की व्यवस्था दी।
मौजूदा याचिका में याचिकाकर्ता शिवम सिंह ने 17 अप्रैल 2024 का आरोप पत्र और 15 जनवरी 2025 को न्यायिक मजिस्ट्रेट, बरेली द्वारा जारी संज्ञान आदेश को रद्द करने की मांग की है। शिवम सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 498-ए (पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा विवाहित महिला के साथ क्रूरता) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज है।
सुनवाई के दौरान शिवम सिंह के वकील ने दलील दी कि प्राथमिकी में आईपीसी की धारा 498-ए या 506 के तहत किसी अपराध का खुलासा नहीं किया गया और दोनों पक्षों के बीच कोई विवाह नहीं हुआ है जिससे ये आरोप अस्पष्ट हैं।
वहीं, राज्य सरकार के वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता ने शादी का झूठा वादा कर और सरकारी नौकरी दिलाने का वादा कर शिकायतकर्ता के साथ शारीरिक संबंध बनाए थे।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि प्राथमिकी और पीड़िता के बयान प्रथम दृष्टया दुष्कर्म के आरोपों का संकेत देते हैं, फिर भी ऐसा कोई आरोप नहीं लगाया गया। यह प्राथमिकी दर्ज करने में गंभीर खामी है।
अदालत ने लिखित शिकायत और प्राथमिकी के बीच विसंगतियां पाईं। जहां लिखित शिकायत में दुष्कर्म की बात कही गई है, प्राथमिकी में इसका उल्लेख नहीं है। इससे जांच की निष्पक्षता पर संदेह पैदा होता है।
रमेश कुमारी बनाम राज्य (एनसीटी दिल्ली) के मामले में निर्णय को आधार बनाते हुए उच्च न्यायालय ने दोहराया कि संज्ञेय अपराधों में प्राथमिकी दर्ज करना अनिवार्य है।
इस प्रकार से भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 528 के तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उच्च न्यायालय ने डीजीपी और प्रमुख सचिव (गृह) को पुलिस अधिकारियों को संवेदनशील बनाने के लिए एक तंत्र विकसित करने का निर्देश दिया।
भाषा सं राजेंद्र
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