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Friday, 27 March, 2026
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लखनऊ में ग्राम सभा की जमीन पर बनी मस्जिद से बेदखली पर रोक लगाने से अदालत ने किया इनकार

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लखनऊ, 26 मार्च (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को लखनऊ के बख्शी का तालाब (बीकेटी) इलाके में ग्राम सभा की जमीन पर बनी एक मस्जिद के संबंध में जिला प्रशासन द्वारा जारी बेदखली के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।

बहरहाल, अदालत ने याचिकाकर्ताओं पर लगाए गए जुर्माने को रद्द कर दिया।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के न्यायाधीश न्यायमूर्ति आलोक माथुर ने शाबान और अन्य लोगों द्वारा दायर एक याचिका पर यह आदेश दिया।

याचिकाकर्ताओं ने तहसीलदार के 28 फरवरी 2025 के आदेश और अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) के 31 अक्टूबर, 2025 के आदेश को चुनौती दी थी। इन आदेशों में क्रमशः बेदखली का निर्देश दिया गया था और उनकी अपील खारिज कर दी गई थी।

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि यह मस्जिद लगभग 60 साल पहले स्थानीय मुस्लिम समुदाय के सदस्यों द्वारा बनायी गयी थी और यह हालिया अतिक्रमण नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वे केवल नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद जाते थे और इसके निर्माण या प्रबंधन में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि राजस्व अधिकारियों के समक्ष कार्यवाही के दौरान उन्हें गवाहों से जिरह करने का अवसर नहीं दिया गया, जिससे ये आदेश कानूनी रूप से मान्य नहीं रह जाते।

शासकीय अधिवक्ता ने याचिका का विरोध करते हुए दलील दी कि बख्शी का तालाब तहसील के तहत अस्ती गांव में खाता संख्या 648 वाली जमीन राजस्व रिकॉर्ड में ग्राम सभा की पशुशाला की जमीन के रूप में दर्ज है और मस्जिद का निर्माण इस जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करके किया गया था।

अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला दिया कि विवादित जमीन ग्राम सभा की है और याचिकाकर्ता इस पर अपना कोई कानूनी अधिकार, स्वामित्व या हित साबित करने में विफल रहे हैं।

हालांकि यह देखते हुए कि इस ढांचे के निर्माण में याचिकाकर्ताओं की कोई भूमिका नहीं थी, अदालत ने उन पर लगाए गए 36 हजार रुपये के जुर्माने को रद्द कर दिया।

भाषा सं सलीम गोला

गोला

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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