जयपुर, 26 मार्च (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने पश्चिम एशिया संकट पर हुई सर्वदलीय बैठक के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा ‘‘दलाल’’ शब्द के इस्तेमाल की बृहस्पतिवार को आलोचना की और कहा कि विदेश मंत्री द्वारा ऐसी भाषा का इस्तेमाल ‘‘बहुत गलत’’ है।
गहलोत ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का व्यवहार ‘‘समझ से परे’’ है।
केंद्र सरकार ने बुधवार को पश्चिम एशिया संकट पर हुई सर्वदलीय बैठक में बताया कि इस मामले में पाकिस्तान के मध्यस्थता प्रयासों में कुछ भी नया नहीं है क्योंकि उस देश का 1981 से अमेरिका द्वारा ‘‘इस्तेमाल’’ किया जा रहा है।
जयशंकर ने पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा के लिए संसद परिसर में बुलाई गई बैठक में उपस्थित नेताओं से कहा था, ‘‘हम दलाल राष्ट्र नहीं हैं।’’
युद्ध में पाकिस्तान की मध्यस्थता के संदर्भ में टिप्पणी के लिए विदेश मंत्री पर निशाना साधते हुए गहलोत ने कहा कि उनका यह कहना कि ‘वे’ (पाकिस्तान) दलाली का काम कर रहा है, यह बहुत ही गलत है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं समझता हूं कि कोई विदेश मंत्री किसी मुल्क के लिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं कर सकता। दलाली क्या होती है, पता नहीं। अगर उनकी जबान फिसलने से ऐसा हुआ तो उन्हें खेद जताना चाहिए। अन्यथा मैं समझता हूं कि देश के अंदर उनकी बहुत आलोचना होनी चाहिए।’’
गहलोत ने कहा, ‘‘आप कैसे कह सकते हो कि कोई दलाली कर रहा है? दलाली होती क्या है? यदि राष्ट्रों के बीच शांति स्थापित नहीं हुई और हिंसा को बेरोकटोक जारी रहने दिया गया, तो दुनिया किस दिशा में जाएगी? क्या यह तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ रही है? कोई नहीं जानता कि इसका अंत कहां होगा।’’
जयशंकर की टिप्पणी का जिक करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘और दुर्भाग्य से हमारे विदेश मंत्री जो हैं, उनका यह कहना कि वह (पाकिस्तान) दलाली का काम कर रहा है, यह बहुत ही गलत है।’’
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री ने पश्चिम एशिया संकट के समाधान के लिए चल रही मध्यस्थता में पाकिस्तान की भूमिका पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, ‘‘अब जो स्थिति बनी है, उसमें पाकिस्तान पंचायती कर रहा है। पाकिस्तान की क्या हैसियत है? हमने 1965 के युद्ध में और करगिल के दौरान उसकी स्थिति देखी है, हर बार उसे (पाकिस्तान) मुंह की खानी पड़ी।’’
गहलोत ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी घटनाओं में तुर्किये जैसे देशों ने उसका साथ दिया था।
उन्होंने कहा, ‘‘कहां पाकिस्तान और कहां हिंदुस्तान है? उसके बावजूद भी वह मध्यस्थता की बात कर रहा है।’’
उन्होंने कहा कि सब लोग चिंतित हैं कि हमारी स्थिति क्या थी और हम कहां पहुंए गए हैं।
साल 1971 के युद्ध का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘कहां इंदिरा गांधी का जमाना था जब 90 हजार से अधिक (पाकिस्तानी) सैनिकों को जिनमें जनरल, कर्नल, मेजर शामिल थे…को यहां गिरफ्तार करके भारत ले आए थे। और आज देश की स्थिति क्या है, आपके सामने है।’’
गहलोत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्थिति बड़ी नाजुक है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पहले ही ऐसे हालात के बारे में आगाह किया था और उन्होंने सरकार पर तैयारी करने में देरी का आरोप लगाया।
गहलोत ने कहा, ‘‘तैयारी समय पर करनी चाहिए। पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण यह स्थिति बनी है लेकिन लोगों को विश्वास में लेना चाहिए और आश्वासन देना चाहिए कि परेशानियों को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।’’
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के प्रति ट्रंप का रवैया ‘‘समझ से परे’’ है।
उन्होंने कहा, ‘‘कभी-कभी वह (ट्रंप) मोदी को मित्र कहते हैं, तो कभी कहते हैं कि मोदी उन्हें खुश करने की कोशिश कर रहे हैं, और कभी-कभी तो यहां तक दावा करते हैं कि वह उनका राजनीतिक करियर समाप्त कर सकते हैं। मैंने किसी भी राष्ट्रपति को किसी अन्य देश के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति के बारे में ऐसी टिप्पणी करते कभी नहीं सुना।’’
उन्होंने कुछ समय पहले वेनेज़ुएला में हुए घटनाक्रम का भी ज़िक्र किया और कहा, ‘‘यदि कोई देश किसी दूसरे देश के राष्ट्रपति का अपहरण कर सकता है, तो यह बेहद चिंताजनक है। इससे भी अधिक दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि दुनिया के किसी भी देश ने इसकी निंदा नहीं की और न ही इस पर चिंता व्यक्त की।’’
भाषा पृथ्वी गोला
गोला
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