गाजियाबाद (उप्र), 26 मार्च (भाषा) गाजियाबाद के हरीश राणा का परिवार अपने बेटे को अंतिम विदाई देने के लिए हरिद्वार में एकत्र हुआ और बेहद भावुक माहौल में उसकी अस्थियों को गंगा में विसर्जित किया।
हरीश राणा पिछले 13 साल से कोमा में थे और उनकी हालत में बिल्कुल भी सुधार न आने की वजह से उच्चतम न्यायालय में उनके परिजन की अर्जी पर उन्हें इच्छा मृत्यु की अनुमति दी थी।
पंजाब विश्वविद्यालय में बीटेक के छात्र रहे 31 वर्षीय राणा का मंगलवार को निधन हो गया था। वह 2013 में एक बहुमंजिली इमारत की चौथी मंजिल की बालकनी से गिरने के बाद से कोमा में थे।
राणा भारत के ऐसे पहले शख्स थे जिन्हें अदालत ने इच्छा-मृत्यु की अनुमति दी थी। उनका अंतिम संस्कार बुधवार को दक्षिण दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट पर किया गया।
राणा के परिवार के करीबी और ‘राज एम्पायर सोसाइटी’ के निवासी तेजस चतुर्वेदी ने बताया कि राणा के पिता अशोक राणा, उनके छोटे भाई आशीष राणा और परिवार के अन्य सदस्यों ने उनकी अस्थियां इकट्ठा कीं और फिर उन्हें विसर्जित करने के लिए हरिद्वार रवाना हो गए।
अशोक राणा ने एक भावुक संदेश में ईश्वर का धन्यवाद दिया और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग परदीवाला और न्यायमूर्ति विश्वनाथन के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने इस मामले में दिए गए उनके ‘मानवीय निर्देशों’ के लिए न्यायाधीशों की सराहना की।
चतुर्वेदी के अनुसार हरीश के पिता ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के अधिकारियों ने परिवार को हरसंभव सहायता प्रदान की।
उन्होंने बताया कि हरीश के पिता ने राज्य सरकार द्वारा 10 लाख रुपये की सहायता दिए जाने की घोषणा का भी स्वागत किया।
राणा ने एम्स के निदेशक एम. श्रीनिवास, विभाग प्रमुख डॉ. सीमा मिश्रा, प्रोफेसर डॉ. सुशांत और अन्य चिकित्सा कर्मचारियों द्वारा लगातार दिए गए चिकित्सीय सहयोग के लिए भी आभार व्यक्त किया।
चतुर्वेदी ने बताया कि उन्होंने उन वकीलों, चिकित्सा विशेषज्ञों और समाज के सदस्यों का भी धन्यवाद किया जो इस कठिन समय में परिवार के साथ खड़े रहे।
उन्होंने अपने पड़ोसियों के प्रति भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने भोजन और अन्य व्यवस्थाओं में मदद करके दिन-रात परिवार का साथ दिया।
इस बीच, गाजियाबाद में स्थित दो ‘ब्रह्म कुमारी’ केंद्रों मोहन नगर और राज नगर एक्सटेंशन में हरीश की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना सभाएं आयोजित की गईं, जिनमें ‘भोग’ की रस्में पूरी की गईं।
ब्रह्म कुमारी की सिस्टर लवली ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि रस्मों के दौरान परिवार डिजिटल माध्यम से जुड़ा रहा।
उन्होंने कहा, ‘हमने दिवंगत आत्मा की शांति और परिवार को हिम्मत देने के लिए प्रार्थना की।’
लवली ने यह भी बताया कि हरीश राणा का परिवार बाद में हिंदू परंपराओं के अनुसार आगे की रस्में पूरी करने के लिए अपने पैतृक स्थान हिमाचल प्रदेश जाएगा।
भाषा मनीष सलीम गोला
गोला
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
