चंडीगढ़, 26 मार्च (भाषा) सेना ने पंजाब सरकार की डेयरी सहकारी समिति ‘मिल्कफेड’ के दूध पाउडर की पूरी खेप को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया है कि इसके नमूने कथित तौर पर निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए।
‘मिल्कफेड’ अपने उत्पादों को ‘वेरका’ ब्रांड के तहत बेचती है।
हालांकि, ‘मिल्कफेड’ के प्रबंध निदेशक राहुल गुप्ता ने कहा कि दूध पाउडर की खेप को अस्वीकार किए जाने के कारणों का पता लगाने के लिए एक तथ्यान्वेषण समिति का गठन किया जाएगा।
‘मिल्कफेड’ सेना को दूध पाउडर, पनीर, फ्लेवर्ड दूध, टेट्रा पैक दूध और अन्य सामग्री की आपूर्ति करती है।
जम्मू स्थित सेना सेवा कोर के कमान अधिकारी ने लुधियाना जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ (वेरका) को भेजे गए एक पत्र में लगभग 125 मीट्रिक टन दूध पाउडर की खेप को अस्वीकार कर दिया।
इस पत्र की एक प्रति रक्षा मंत्रालय के मुख्य खरीद निदेशक को भी भेजी गई।
मिल्कफेड के प्रबंध निदेशक गुप्ता ने कहा कि राज्य की दुग्ध सहकारी समिति अपने संयंत्रों में दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।
उन्होंने बताया कि दुग्ध उत्पादों का पहले एनएबीएल से मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में परीक्षण किया जाता है, उसके बाद ही उन्हें सेना को दिया जाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उत्पादों में कोई कमी नहीं है।
इस बीच, विपक्षी दलों के नेताओं ने सेना द्वारा खेप को अस्वीकार किए जाने पर आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की कड़ी आलोचना की।
शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने इस मुद्दे पर भगवंत मान सरकार पर हमला करते हुए कहा कि सशस्त्र बलों द्वारा इतनी बड़ी मात्रा में माल को अस्वीकार करना एक सरकारी संस्था में गुणवत्ता नियंत्रण पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी सेना द्वारा दूध पाउडर की खेप को अस्वीकार किए जाने को मान सरकार के लिए ‘‘बड़ी शर्मिंदगी’’ बताया।
भाषा शफीक नरेश
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