scorecardresearch
Monday, 6 April, 2026
होमदेशमहाराष्ट्र: तेजाब हमला पीड़ितों की पहचान को सुरक्षित रखने वाला विधेयक विधान परिषद में पारित

महाराष्ट्र: तेजाब हमला पीड़ितों की पहचान को सुरक्षित रखने वाला विधेयक विधान परिषद में पारित

Text Size:

मुंबई, 25 मार्च (भाषा) महाराष्ट्र विधान परिषद ने बुधवार को सर्वसम्मति से भारतीय न्याय संहिता (महाराष्ट्र संशोधन) विधेयक 2026 पारित कर दिया।

इस संशोधन के तहत शक्ति विधेयक में तेजाब हमलों की पीड़िताओं की पहचान की सुरक्षा और ऑनलाइन यौन उत्पीड़न के मामलों में कारावास सुनिश्चित करने के प्रावधान शामिल किए गए हैं।

यह विधेयक पहले राज्य विधानसभा द्वारा पारित किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधान परिषद में कहा कि शक्ति विधेयक राज्य विधानसभा द्वारा 2020 में पारित किया गया था और राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए केंद्र को भेजा गया था।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने बाद में इसे वापस भेज दिया था।

फडणवीस गृह विभाग के प्रमुख भी हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार को सूचित किया गया था कि केंद्र सरकार तत्कालीन भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) के प्रावधानों को मिलाकर एक समान कानून बना रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) जुलाई 2024 में लागू हुई।

उन्होंने कहा कि केंद्र ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या महाराष्ट्र के संबंध में बीएनएस में संशोधन अब भी आवश्यक हैं।

फडणवीस ने बताया कि एक समिति का गठन यह आकलन करने के लिए किया गया था कि प्रस्तावित शक्ति कानून के सभी प्रावधान, जिनमें महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए कठोर दंड का प्रावधान है, बीएनएस में शामिल किए गए हैं या नहीं।

उन्होंने बताया कि समिति के सुझाव के बाद भारतीय न्याय संहिता (महाराष्ट्र संशोधन) विधेयक 2026 में दो प्रावधान जोड़े गए हैं।

फडणवीस ने कहा कि इनमें से एक प्रावधान तेजाब हमले की पीड़िताओं के नामों की सुरक्षा के लिए है।

उन्होंने बताया कि इस संशोधन के तहत ईमेल और सोशल मीडिया मंच पर यौन उत्पीड़न को भी अपराध घोषित किया गया है, जिसके लिए तीन साल की कैद व जुर्माना हो सकता है।

भाषा जितेंद्र नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments