शिमला, 24 मार्च (भाषा) रसोई गैस की कमी के कारण ‘चूल्हे’ फिर से अस्तित्व में आ चुके हैं और यहां तक कि विधानसभा के आधिकारिक खानपान सेवा प्रदाता ‘होटल होलिडे होम’ (एचएचएच) भी ‘चूल्हे’ का सहारा लेने लगे हैं।
यह होटल हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) के अधीन आता है।
यह बदलाव रसोई गैस की आपूर्ति में आ रही दिक्कतों की वजह से हुआ है, क्योंकि रसोई स्टाफ खाने का स्वाद बनाए रखने के लिए खाना पकाने में अभी ज्यादा समय ले रहे हैं।
होटल के एक कर्मचारी के अनुसार, रसोइए सुबह सात बजे आते हैं और तैयारियों की शुरुआत करते हैं, सात मीटर लंबे चूल्हे में लकड़ी डालते हैं, जो एक समय में चार व्यंजन पकाता है।
एचएचएच में रसोई की देखरेख करने वाले अरुण दुल्ता ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि पारंपरिक तरीके अधिक समय लेते हैं, और 600-700 लोगों के लिए खाना तैयार करने में तीन घंटे अधिक लग जाते हैं। इन लोगों में विधानसभा में लंच करने वाले भी शामिल हैं।’’
एक अन्य होटल कर्मचारी ने बताया कि रसोई गैस संकट का सबसे प्रमुख असर चीनी व्यंजनों पर पड़ा है, जिन्हें व्यंजन सूची (मेन्यू) से हटा दिया गया है, क्योंकि इन्हें तेज आंच पर पकाना होता है। उन्होंने कहा कि फिलहाल ध्यान भारतीय व्यंजनों, जैसे राजमा, दाल, मशरूम, पनीर और सब्जियों तथा रोटी और चावल पर है।
दुल्ता के अनुसार, होटल ने विधानसभा के बजट सत्र के लिए लगभग एक दर्जन अतिरिक्त रसोइयों और सहायकों को काम पर रखा है।
इस बीच, रसोइए धनी राम शर्मा ने कहा कि चूल्हे पर पकाया गया खाना, जिसे स्थानीय बोली में ‘चार’ भी कहा जाता है, धीमी प्रक्रिया के कारण बेहतर स्वाद और खुशबू वाला होता है।
उन्होंने कहा, ‘‘तेज़ गैस चूल्हों की तुलना में, चूल्हे पर पकाया गया खाना कभी पेट की समस्याएं नहीं पैदा करता।’’
होटल खाना बनाने के लिए लकड़ी डिपो से प्राप्त कर रहा है।
खाना बनाने वाले एक अन्य व्यक्ति बेली राम ने कहा कि वे पूरी मेहनत कर रहे हैं, ताकि विधानसभा की कार्यवाही पर कोई असर न पड़े।
भाषा सुरेश दिलीप
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