अगरतला, 23 मार्च (भाषा) त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने सोमवार को विधानसभा को बताया कि राज्य में पिछले तीन वर्षों के दौरान स्वापक औषधि एवं मन: प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत दोषसिद्धि दर 3.06 प्रतिशत रही है।
कांग्रेस विधायक सुदीप रॉय बर्मन के लिखित प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि 2023-25 के दौरान कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत कुल 2,979 आरोपपत्र दाखिल किए, जिनमें से 99 आरोपियों को निचली अदालतों ने दोषी ठहराया।
साहा ने बताया कि राज्य सरकार ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों को प्रभावी ढंग से संभालने के लिए मादक पदार्थ रोधी कार्य बल (एएनटीएफ) का गठन किया है और इसके अधिकारियों को उचित जांच सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
कम दोषसिद्धि दर पर चिंता जताते हुए बर्मन ने जांच प्रक्रिया में कथित खामियों की ओर इशारा किया, जो उनके अनुसार आरोपियों के बरी होने का कारण बन रही हैं।
उन्होंने कहा, “पुलिस मादक पदार्थ तस्करी गिरोहों के सरगनाओं को पकड़ने में विफल रही है और केवल वाहकों को ही गिरफ्तार किया जा रहा है। मैं मुख्यमंत्री से अनुरोध करता हूं कि जहां पार्सल और पैकेट बुक किए जाते हैं, उन सभी जगहों पर स्कैनिंग की व्यवस्था की जाए।”
इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने मादक पदार्थों के खिलाफ कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति अपनाई है और कम दोषसिद्धि दर का मुख्य कारण गवाहों का अभाव है।
उन्होंने कहा, “हत्या के मामलों में भी गवाह अक्सर मुकर जाते हैं, जिससे आरोपपत्र कमजोर हो जाते हैं। यही स्थिति मादक पदार्थ मामलों में भी है, जिससे पुख्ता गवाहों के अभाव में आरोपियों के छूटने की संभावना बढ़ जाती है।”
उन्होंने यह भी कहा कि कई मामले अभी निचली अदालतों में लंबित हैं और उनके निपटारे के बाद दोषसिद्धि दर में सुधार की उम्मीद है।
भाषा
राखी दिलीप
दिलीप
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