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Monday, 23 March, 2026
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गुरुग्राम में निर्माण स्थल पर टीला ढहने से सात श्रमिकों की मौत पर रिपोर्ट तलब

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चंडीगढ़, 23 मार्च (भाषा) हरियाणा मानवाधिकार आयोग (एचएचआरसी) ने गुरुग्राम में निर्माण स्थल पर मिट्टी का टीला ढहने से सात मजदूरों की मौत के मामले में संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर रिपोर्ट तलब की है।

आयोग ने गुरुग्राम जिले में दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेसवे के पास सिधरावली गाँव में ‘सिग्नेचर ग्लोबल’ के एक निर्माणाधीन अवजल शोधन संयंत्र स्थल पर हुई घटना के संबंध में मीडिया में प्रकाशित हालिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया।’

यह घटना नौ मार्च को हुई थी।

इस घटना में मारे गए सात मजदूरों में से छह झारखंड और एक राजस्थान का रहने वाला था, जबकि चार अन्य मजदूर घायल हो गए थे।

आयोग ने नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग, श्रम विभाग, पुलिस, गुरुग्राम नगर निगम और अन्य संबंधित अधिकारियों को 13 मई को होने वाली अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

आयोग ने हताहतों की स्थिति और बचाव कार्यों, सुरक्षा मानदंडों के अनुपालन, दोषियों के खिलाफ की गई कार्रवाई, पीड़ितों के लिए मुआवजे और पुनर्वास उपायों तथा श्रम सुरक्षा कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन को मजबूत करने के लिये उठाए गए कदमों के संबंध में जानकारी मांगी है।

आयोग ने भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवा शर्त विनियमन) अधिनियम, 1996 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा (ओएसएच) संहिता, 2020 जैसे कानूनों के कड़ाई से कार्यान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया है।

आयोग ने कहा कि वह इस मुद्दे की व्यापक संदर्भ में पड़ताल करेगा, क्योंकि निर्माण स्थलों पर बार-बार होने वाली दुर्घटनाएं और हरियाणा में मजदूरों के मानवाधिकारों की सुरक्षा जरूरी है। आयोग में अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा और सदस्य कुलदीप जैन और दीप भाटिया शामिल हैं।

आयोग ने 12 मार्च के अपने आदेश में कहा कि निर्माण कार्य सबसे खतरनाक पेशों में से एक है, खासकर प्रवासी और आर्थिक रूप से कमजोर मजदूरों के लिए।

आयोग ने कहा कि इस क्षेत्र में काम करने वाले बड़ी संख्या में मजदूर प्रवासी होते हैं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से आते हैं, जो अक्सर असुरक्षित परिस्थितियों में काम करते हैं तथा अपने कानूनी अधिकारों और सुरक्षा उपायों के बारे में सीमित जानकारी रखते हैं।

आयोग ने यह भी कहा कि निर्माण स्थलों पर दुर्घटनाएं कथित लापरवाही, अपर्याप्त निगरानी, उचित ढांचागत सुरक्षा का अभाव और सुरक्षा मानकों के सख्ती से पालन न होने के कारण लगातार होती रहती हैं।

आयोग ने जोर दिया कि ऐसी घटनाएं श्रम सुरक्षा कानूनों के सख्ती से अनुपालन और सुरक्षित कार्य परिस्थितियों को सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार बिल्डरों, ठेकेदारों और परियोजना प्राधिकरणों की जवाबदेही तय करने की आवश्यकता को उजागर करती हैं।

इसने कहा कि सुरक्षित और मानवीय कार्य परिस्थितियों का अधिकार, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।

आयोग ने कहा, “जब मजदूरों को पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना असुरक्षित वातावरण में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है, तो उनके मौलिक मानवाधिकार गंभीर खतरे में पड़ जाते हैं। ऐसी घटनाओं में श्रमिकों की मौत और उनके घायल होने को केवल कार्यस्थल पर दुर्घटना के रूप में नहीं देखा जा सकता। बल्कि, ये लापरवाही और श्रमिकों की सुरक्षा एवं गरिमा की रक्षा में विफलता से उत्पन्न मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन को दर्शाती हैं।”

भाषा

राखी दिलीप

दिलीप

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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