scorecardresearch
Sunday, 22 March, 2026
होमदेशजम्मू विश्वविद्यालय की समिति ने पाठ्यक्रम से जिन्ना, सर सैयद और इकबाल को हटाने की सिफारिश की

जम्मू विश्वविद्यालय की समिति ने पाठ्यक्रम से जिन्ना, सर सैयद और इकबाल को हटाने की सिफारिश की

Text Size:

जम्मू, 22 मार्च (भाषा) जम्मू विश्वविद्यालय द्वारा राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम की समीक्षा के लिए गठित समिति ने पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद अली जिन्ना, सर सैयद अहमद खान और मोहम्मद इकबाल से संबंधित विषयवस्तु को पाठ्यक्रम से हटाने की सिफारिश की है।

यह निर्णय अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के विरोध प्रदर्शनों के बाद लिया गया है, जिसने शुक्रवार को पाकिस्तान के संस्थापक जिन्ना पर आधारित अध्याय को पाठ्यक्रम से हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। यह अध्याय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत संशोधित स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में शामिल किया गया था।

विभागाध्यक्ष (एचओडी) प्रोफेसर बलजीत सिंह मान ने बताया कि संकाय और विभागीय मामलों की समिति की बैठक 22 मार्च (आज) को हुई जिसमें सर्वसम्मति से एक वर्षीय स्नातकोत्तर कार्यक्रम और दो वर्षीय स्नातकोत्तर कार्यक्रम के पाठ्यक्रम से जिन्ना, सर सैयद अहमद खान और मोहम्मद इकबाल से संबंधित विषयों को हटाने की सिफारिश करने का निर्णय लिया गया।

यह सिफारिश अध्ययन बोर्ड (बीओएस) को विचार के लिए भेज दी गई है। मान ने बताया कि इस मामले पर आगे के विचार-विमर्श के लिए ‘बोर्ड ऑफ स्टडीज’ की 24 मार्च को ऑनलाइन बैठक होने वाली है।

इससे पहले विश्वविद्यालय ने पाठ्यक्रम का बचाव करते हुए कहा था कि जिन्ना और अन्य विचारकों को शामिल करना विशुद्ध रूप से अकादमिक है और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशानिर्देशों के अनुरूप है।

मान ने कहा था कि ‘आधुनिक भारतीय राजनीतिक चिंतन’ मॉड्यूल में सर सैयद अहमद खान, मोहम्मद इकबाल, विनायक दामोदर सावरकर, एम एस गोलवलकर, महात्मा गांधी, बी आर आंबेडकर, जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे विविध वैचारिक दृष्टिकोणों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई विचारकों को शामिल किया गया है।

इससे पहले एबीवीपी जम्मू और कश्मीर के सचिव सन्नक श्रीवत्स ने इस अध्याय को तत्काल वापस लेने की मांग की थी और कहा था कि विभाजन और दो-राष्ट्र सिद्धांत से जुड़े व्यक्तियों के बारे में पढ़ाना छात्रों के लिए अस्वीकार्य है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पाठ्यक्रम में संशोधन नहीं किया गया तो विरोध प्रदर्शन और तीव्र हो जाएंगे और आग्रह किया कि अल्पसंख्यकों के लिए सकारात्मक रूप से काम करने वाले व्यक्तित्वों को इसमें शामिल किया जाए।

भाषा संतोष रंजन

रंजन

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments