(फाइल फोटो के साथ)
मुंबई, 22 मार्च (भाषा) केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रविवार को कहा कि भारत अपनी घरेलू प्राथमिकताओं को पूरा करेगा एवं वैश्विक चुनौतियों का सामना करेगा तथा आने वाले वर्षों में ‘ग्लोबल साउथ’ की उभरती अर्थव्यवस्थाओं और कम आय वाले देशों को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
वह यहां भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी,बंबई) में ‘भारत इनोवेट्स डीप-टेक प्री-समिट’ को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि भारत न केवल देश की जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक चुनौतियों का भी सामना करेगा। विशेष रूप से, ग्लोबल साउथ की उभरती अर्थव्यवस्थाओं और गरीब देशों की कम लागत वाली अर्थव्यवस्थाओं की जरूरतों को भारत आने वाले दिनों में पूरा करेगा।”
फ्रांस में आयोजित होने वाले ‘भारत इनोवेट्स 2026’ कार्यक्रम से पहले आयोजित इस शिखर सम्मेलन में देश भर से प्राप्त 3,000 से अधिक आवेदनों में से चयनित 137 ‘डीप-टेक स्टार्टअप’ एक साथ आए। चयनित स्टार्टअप फ्रांस में भारत के ‘डीप-टेक इकोसिस्टम’ का प्रतिनिधित्व करेंगे।
प्रधान ने कहा कि हालांकि भारत की प्राथमिकता निरंतरता, कृषि, स्वास्थ्य सेवा, आजीविका और उत्पादन क्षेत्र पर होनी चाहिए, लेकिन देश ‘डीप टेक्नॉलोजी’ के माध्यम से ग्लोबल साउथ की जरूरतों को पूरा करेगा।
उन्होंने कहा, “भारत इनोवेट्स पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहा है। आने वाले दिनों में, भारत इनोवेट्स एक सामाजिक आंदोलन बन जाएगा जिसमें नेतृत्व, निवेशक, उद्योग, शिक्षाविद और नीति निर्माता शामिल होंगे। इसे एक जन आंदोलन का रूप दिया जाएगा और एक विशिष्ट पहचान प्रदान की जाएगी।”
उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत को एक विकसित अर्थव्यवस्था में परिवर्तित होना चाहिए और वैश्विक स्तर पर कम से कम 1,000 प्रौद्योगिकियों में अग्रणी बनने का लक्ष्य रखना चाहिए।
प्रधान ने कहा कि ग्लोबल साउथ पश्चिमी देशों की महंगी प्रौद्योगिकियां नहीं खरीद पायेगा, ऐसे में भारत के अधिक सुलभ और लागत प्रभावी तकनीकी समाधानों को अपनाने में उनकी रुचि बढ़ रही है।
भाषा राजकुमार नरेश
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