कोलकाता, 22 मार्च (भाषा) पश्चिम बंगाल के आर जी कर अस्पताल की लिफ्ट में फंसकर एक व्यक्ति की मौत होने के मामले की पड़ताल कर रहे जांचकर्ता संभावित सुरक्षा चूक और मानवीय त्रुटि की जांच कर रहे हैं, जबकि रिकॉर्ड से पता चलता है कि लिफ्ट हाल ही में नियमित निरीक्षण में ठीक पायी गई थी। एक पुलिस अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी।
जांचकर्ता कई पहलुओं की जांच कर रहे हैं, जिनमें यह भी शामिल है कि क्या सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन में कोई चूक हुई, लिफ्ट रखरखाव एजेंसी को सूचित करने में कोई देरी हुई और क्या शुक्रवार की घटना के समय किसी ने लिफ्ट के ‘मशीन रूम’ में प्रवेश किया था?
अधिकारी ने कहा, ‘‘शुरुआती जांच से पता चलता है कि लिफ्ट इस महीने की शुरुआत में हुए निरीक्षण में ठीक पाई गई थी। हम इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या रखरखाव, निगरानी या प्रतिक्रिया में कोई चूक हुई थी जिसके कारण यह दुर्घटना हुई?’’
उन्होंने कहा कि इस स्तर पर किसी भी आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता है।
अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, हाल में लिफ्ट की 25 . 30 दिनों के निरीक्षण चक्र के हिस्से के रूप में एक मानक जांच की गई थी और कोई बड़ी खराबी नहीं पाई गई थी।
यह घटना शुक्रवार तड़के घटी, जब अरूप बनर्जी अपने नाबालिग बेटे के इलाज के लिए आर जी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल आए थे और अपनी पत्नी और बच्चे के साथ लिफ्ट में दाखिल हुए थे। बताया जाता है कि लिफ्ट ऊपर की ओर चलने लगी और फिर अपने आप एक अंधेरे बेसमेंट की ओर गई।
पुलिस ने बताया, ‘‘दरवाजे खुलने के बाद परिवार ने बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन बाहरी ग्रिल दरवाजा बंद पाया। अरूप बनर्जी की पत्नी और बच्चा तो निकलने में कामयाब हो गए लेकिन बनर्जी लिफ्ट के दरवाजे में फंस गए।’’
पुलिस को दिए अपने बयान में महिला ने आरोप लगाया कि लिफ्ट के दोबारा चलने पर उनके पति बाहर की एक दीवार से रगड़ खाते हुए लिफ्ट के साथ ऊपर की ओर खिंचते चले गए। उन्होंने दावा किया कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद कोई मदद नहीं मिली और दरवाजा नहीं खुला।
कोलकाता स्थित सरकारी आरजी कर अस्पताल में हुई मौत के इस मामले में पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है जिसमें तीन लिफ्ट संचालक और दो सुरक्षाकर्मी शामिल हैं।
भाषा शफीक नरेश
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