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Friday, 20 March, 2026
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भारत की जैव अर्थव्यवस्था का मूल्य 2025 तक 18 प्रतिशत बढ़कर 195 अरब डॉलर : रिपोर्ट

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नयी दिल्ली, 20 मार्च (भाषा) भारत की जैव अर्थव्यवस्था का मूल्यांकन 2025 में 195 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। यह जैव प्रौद्योगिकी से संचालित कई उद्योगों में मजबूत वृद्धि को दर्शाता है।

भारत की जैव अर्थव्यवस्था का मूल्यांकन 2024 में 166 अरब डॉलर था।

जैव-आर्थिक क्षेत्र अब केवल जैव-औषधि या जैव-उद्योग तक सीमित नहीं रहा। यह अब एक व्यापक औद्योगिक व्यवस्था में फैला है, जिसमें जैव-ईंधन, एंजाइम समाधान, डिजिटल जीवविज्ञान मंच, अनुबंध अनुसंधान, जैविक उत्पादन और कृषि जैविक सामग्री मिलकर राष्ट्रीय आर्थिक उत्पादन में योगदान करते हैं।

‘इंडिया बायोइकोनॉमी रिपोर्ट 2026’ नामक यह रिपोर्ट जैव-प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बाइरैक) द्वारा प्रकाशित की गई, जो एक सार्वजनिक क्षेत्र की संस्था है और उभरते जैव-प्रौद्योगिकी उद्यमों को मजबूत बनाने और सशक्त बनाने का कार्य करती है।

जैव-आर्थिक मूल्य में वृद्धि के पीछे चार मुख्य कारण माने जा रहे हैं। पहला, पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाने से पेट्रोल आयात में कमी आई। दूसरा, जीएलपी-1 (ग्लूकागॉन-लाइक पेप्टाइड-1) श्रेणी की दवाओं का अधिक उपयोग हुआ। तीसरा, नए वैश्विक क्षमता केंद्र खुले, जिनमें तीन लाख से अधिक भारतीय पेशेवर काम कर रहे हैं। चौथा, विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में एंजाइम और सूक्ष्मजीवों के उपयोग से जैविक समाधान का इस्तेमाल बढ़ा। इन चार प्रमुख कारणों ने भारत की जैव-आर्थिक स्थिति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, इन चार नए रुझानों और उत्पाद क्षेत्रों के साथ पारंपरिक जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों के योगदान ने 2025 में भारत की जैव-आर्थिक स्थिति में 29.6 अरब डॉलर की वृद्धि की। यह 18 प्रतिशत की वृद्धि पिछले कई वर्षों में सबसे अधिक रही।

बाइरैक ने जैव-औषधि, चिकित्सा प्रौद्योगिकी, कृषि जैव-प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य-प्रौद्योगिकी, औद्योगिक जैव-प्रौद्योगिकी और स्वच्छ-प्रौद्योगिकी में नवाचार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अंतर्गत अनुदान, निवेश सहायता, मार्गदर्शन और साझेदारी कार्यक्रम शामिल हैं।

जैव-प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव राजेश एस. गोखले ने कहा कि केवल 14 वर्षों में, बाइरैक ने भारतीय जैव-प्रौद्योगिकी को एक छोटे और बिखरे हुए क्षेत्र से एक जीवंत नवाचार-संचालित परिवेश में बदलने में मदद की है।

बाइरैक के प्रबंध निदेशक जितेंद्र कुमार ने कहा, ‘हमारा लक्ष्य बड़ा है। हम भारत की जैव-आर्थिक स्थिति को 2030 तक 300 अरब अमेरिकी डॉलर और 2047 तक एक हजार अरब डॉलर तक बढ़ाना चाहते हैं।’

भाषा योगेश रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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