पटना, 20 मार्च (भाषा) जनता दल (यूनाइटेड) के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने चौथी बार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए बुधवार को नामांकन दाखिल किया।
इससे यह स्पष्ट हो गया है कि निकट भविष्य में पार्टी की दिशा और रणनीति पर उनका ही नियंत्रण रहेगा। जद(यू) के सूत्रों के अनुसार, नीतीश का निर्वाचन लगभग निर्विरोध होने की संभावना है।
राजधानी दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के माध्यम से नामांकन दाखिल किया गया, जबकि स्वयं नीतीश कुमार इस प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए। इस कदम को राजनीतिक रूप से प्रतीकात्मक माना जा रहा है। यह संकेत देता है कि नीतीश कुमार संगठनात्मक नियंत्रण को प्राथमिकता दे रहे हैं और प्रशासनिक जिम्मेदारियों से कुछ दूरी बनाकर रणनीतिक भूमिका निभाना चाहते हैं।
नामांकन प्रक्रिया 22 मार्च तक जारी रहेगी और 24 मार्च को इसकी आधिकारिक घोषणा होने की संभावना है।
इस पूरे घटनाक्रम में जद(यू) के वरिष्ठ नेता एवं राज्य सरकार में मंत्री श्रवण कुमार, पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा और अनिल कुमार हेगड़े जैसे नेताओं की सक्रिय भूमिका रही, जिन्होंने संगठनात्मक मजबूती का संदेश दिया।
पार्टी के भीतर यह धारणा भी मजबूत है कि कोई अन्य उम्मीदवार मैदान में नहीं उतरेगा, जिससे नीतीश कुमार का चौथा कार्यकाल लगभग तय माना जा रहा है।
जद(यू) के अध्यक्ष के रूप में नीतीश कुमार का कार्यकाल उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वर्ष 2016 में उन्होंने शरद यादव से पदभार संभाला और 2019 में पुनः चुने गए। बाद में उन्होंने आरसीपी सिंह को यह जिम्मेदारी सौंपी, लेकिन 2023 में राजीव रंजन सिंह से जद(यू) का अध्यक्ष पद वापस लेकर फिर से कमान संभाल ली। यह लगातार वापसी उनके संगठनात्मक कौशल और राजनीतिक पकड़ को दर्शाती है।
इस बार की खास बात यह है कि राज्यसभा सदस्य बनने के बाद और मुख्यमंत्री पद के दबाव से आंशिक रूप से मुक्त होकर, नीतीश कुमार संगठन पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। इससे जद(यू) की राष्ट्रीय विस्तार रणनीति को नयी गति मिलने की उम्मीद है।
भाषा
कैलाश रवि कांत
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