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Friday, 20 March, 2026
होमदेशमार्च की डेडलाइन से पहले 11 माओवादिओं का सरेंडर, गढ़चिरौली में संगठन 10 से सिमटकर 1 सबडिवीजन तक रह गया

मार्च की डेडलाइन से पहले 11 माओवादिओं का सरेंडर, गढ़चिरौली में संगठन 10 से सिमटकर 1 सबडिवीजन तक रह गया

गुरुवार को सरेंडर करने वाले 11 माओवादियों में रुखमक्का पोट्टी पेंदाम सबसे वरिष्ठ थी; सिर्फ महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में ही उसके नाम 27 मामले दर्ज थे.

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नई दिल्ली: महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में गुरुवार को एक डिविजनल कमेटी सदस्य समेत 11 माओवादियों ने सुरक्षा बलों के सामने सरेंडर कर दिया. इसके साथ ही प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) का असर अब उस जिले के सिर्फ एक सबडिवीजन तक सिमट गया है, जिस पर कभी उसका पूरा नियंत्रण हुआ करता था.

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अपने चरम समय में यह संगठन गढ़चिरौली के सभी 10 सबडिवीजन में सक्रिय था. अब उसका असर सिर्फ राज्य सीमा से लगे भामरागढ़ सबडिवीजन में बचा है.

गुरुवार के सरेंडर में एक डिविजनल कमेटी मेंबर (DVCM), एक एरिया कमेटी सेक्रेटरी और एक पेरिमिली पॉपुलर कमेटी मेंबर (पीपीसीएम) शामिल था. पीपीसीएम संगठन के क्षेत्रीय कमांड ढांचे में एक वरिष्ठ कैडर रैंक मानी जाती है.

सरेंडर करने वालों में सबसे वरिष्ठ यमुनक्का उर्फ रुखमक्का पोट्टी पेंदाम थी. पुलिस ने बताया कि वह 1982 में संगठन से जुड़ी थी और सिर्फ गढ़चिरौली में ही उसके खिलाफ 27 मामले दर्ज थे. इनमें से 16 मामले मुठभेड़ या गोलीबारी से जुड़े थे.

इस ताज़ा सरेंडर के साथ जनवरी 2025 से अब तक गढ़चिरौली में सरेंडर करने वाले माओवादियों की कुल संख्या 123 हो गई है. इस संख्या में पूर्व पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी सदस्य मल्लूजोला वेणुगोपाल, उर्फ सोनू उर्फ अभय, भी शामिल हैं, जिन्होंने पिछले साल अक्टूबर में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने सरेंडर किया था.

पुलिस ने बताया कि वेणुगोपाल के सरेंडर के बाद से देशभर में 897 माओवादी कैडर सरेंडर कर चुके हैं और 545 हथियार डाल चुके हैं.

हथियार छोड़ने वाले दूसरे वरिष्ठ नेताओं में थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवुजी, मल्ला राजी रेड्डी उर्फ संग्राम और पुल्लुरी प्रसाद राव उर्फ चंद्रन्ना शामिल हैं. इन सभी ने तेलंगाना पुलिस के सामने सरेंडर किया था.

माओवादी प्रभावित राज्यों—महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश, में सरेंडर की यह बढ़ती श्रृंखला ऐसे समय में सामने आई है, जब सरकार की तय की हुई 31 मार्च तक वामपंथी उग्रवाद खत्म करने की समय-सीमा करीब आ गई है.

महाराष्ट्र सरकार की नीति के तहत इन 11 कैडरों को उनके सरेंडर के समय संगठन में उनकी वरिष्ठता के आधार पर 4.5 लाख रुपये से 8 लाख रुपये तक का पुनर्वास पैकेज मिलेगा. राज्य सरकार यह भी देती है कि अगर संगठन से जुड़ा कोई पति-पत्नी साथ में सरेंडर करता है, तो उसे 1.5 लाख रुपये अतिरिक्त मिलते हैं. वहीं, समूह में सरेंडर करने पर कुल 10 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि भी दी जाती है. गुरुवार के सरेंडर में यह प्रावधान भी लागू हुआ.

स्पेशल इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (एंटी-नक्सल ऑपरेशंस) संदीप पाटिल ने अब भी भूमिगत माओवादी कैडरों से अपील की कि वे हथियार छोड़ें और राज्य सरकार के पुनर्वास पैकेज का लाभ लें.

गुरुवार का यह सरेंडर गढ़चिरौली रेंज के डीआईजी अंकित गोयल, पुलिस अधीक्षक नीलोत्पल और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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