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Thursday, 19 March, 2026
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मप्र: देश में पहली बार सांकेतिक भाषा में सिखाए गए मध्यस्थता के गुर

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इंदौर, 18 मार्च (भाषा) समावेशी न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में अनूठा कदम उठाते हुए मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने मूक-बधिर समुदाय के पेशेवरों को मध्यस्थता के गुर सिखाए हैं ताकि समाज के इस तबके के लोगों से जुड़े विवादों का सुलह-समझौते के जरिये निराकरण हो सके।

प्राधिकरण का कहना है कि यह देश में अपनी तरह का पहला प्रयोग है।

प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि मूक-बधिर समुदाय के पेशेवरों और सांकेतिक भाषा के जानकारों को इंदौर में 14 से 18 मार्च (बुधवार) तक विशेषज्ञों की मदद से मध्यस्थता के गुर सिखाए गए।

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति और प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये शामिल हुए। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक प्रशिक्षण का समापन नहीं, बल्कि विवादों के समाधान की उस नयी और समावेशी सोच की शुरुआत है जो अपनेपन और मानवीय संबंधों को सुदृढ़ करती है।

मुख्य न्यायाधिपति ने यह भी कहा कि मध्यस्थता केवल मौखिक संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समझ, संवेदनशीलता और विश्वास पर आधारित प्रक्रिया है।

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायाधिपति न्यायमूर्ति विवेक रुसिया ने भी प्रशिक्षण कार्यक्रम की तारीफ की। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण की यह पहल मूक-बधिर समुदाय के लोगों को मुख्यधारा की मध्यस्थता प्रक्रिया में सम्मिलित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है जिससे न्याय प्रणाली अधिक समावेशी और सहभागितापूर्ण बनेगी।

इस अवसर पर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल धरमिंदर सिंह, मध्यप्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक उमेश पांडव, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव सुमन श्रीवास्तव और अन्य न्यायिक अधिकारी मौजूद थे।

प्राधिकरण के उप सचिव अनिरुद्ध जैन ने बताया कि पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान 30 प्रतिभागियों को कुल 40 घंटे तक सांकेतिक भाषा में मध्यस्थता के गुर सिखाए गए जिनमें मूक-बधिर समुदाय के 25 पेशेवर शामिल थे।

उन्होंने कहा, ‘‘यह देश में इस तरह का पहला प्रशिक्षण कार्यक्रम था।’’

भाषा हर्ष सुरभि

सुरभि

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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