बांग्लादेश अवामी लीग को यूनुस प्रशासन के दौरान काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा और अब भी पार्टी की परेशानियां खत्म होती नहीं दिख रही हैं, जबकि तारिक रहमान के नेतृत्व में नई चुनी हुई सरकार सत्ता में आ चुकी है.
12 मार्च को 13वीं संसद के पहले सत्र में बोलते हुए बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री ने कहा कि हटाई गई अवामी लीग सरकार ने संसद को राष्ट्रीय गतिविधियों का केंद्र बनाने में असफल रहकर संसद को कमजोर किया.
उसी दिन सरकार ने घोषणा की कि पहले मनाए जाने वाले कुछ राष्ट्रीय दिवस, जिनमें बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान और उनके परिवार की जयंती और पुण्यतिथि शामिल हैं—अब राज्य स्तर पर नहीं मनाए जाएंगे.
यह घटनाएं उस पार्टी के लिए उत्साहजनक नहीं हैं, जिसकी राजनीतिक गतिविधियां 10 मई 2025 से बांग्लादेश में प्रतिबंधित हैं और जिसकी सर्वोच्च नेता और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना हैं. वे अगस्त 2024 से अपने शीर्ष नेताओं के साथ भारत में निर्वासन में रह रही हैं.
इस बात पर काफी चर्चा और मीडिया में अटकलें लगती रही हैं कि हसीना का राजनीतिक उत्तराधिकारी कौन होगा.
पार्टी को ऐसा नेता चुनना चाहिए जो अवामी लीग के उन लोगों में से हो जो अभी भी बांग्लादेश के अंदर हैं और इस कठिन समय में कार्यकर्ताओं में जोश भरकर ज़मीन पर पार्टी को फिर से खड़ा कर सके.
घिरी हुई पार्टी
5 अगस्त 2024 को शेख हसीना के भारत भाग जाने के बाद और उनके कई शीर्ष मंत्रियों व नेताओं के भी देश छोड़ने के बाद, एक बिना चुनी हुई अंतरिम सरकार ने देश की कमान संभाल ली.
बांग्लादेश में जो नेता, कार्यकर्ता और समर्थक रह गए, उन्हें भीड़ के गुस्से और कानून की सख्ती दोनों का सामना करना पड़ा.
पूरे साल गिरफ्तारियां जारी रहीं. मई 2025 में बांग्लादेश की प्रेस रिपोर्टों में कहा गया कि ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस और उसकी डिटेक्टिव ब्रांच ने पिछले एक महीने में अवामी लीग के 175 से ज्यादा नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया, जिनमें पार्टी के आठ पूर्व सांसद भी शामिल थे.
17 नवंबर 2025 को जस्टिस गोलाम मोर्तुजा मोजुमदार की अगुवाई वाले तीन सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने 2024 के जुलाई विद्रोह के दौरान मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में शेख हसीना को मौत की सज़ा सुनाई. पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को भी मौत की सज़ा दी गई.
4 दिसंबर 2025 को एक विशेष न्यायाधिकरण ने जुलाई विद्रोह के दौरान मानवता के खिलाफ अपराध करने के आरोप में हसीना के प्रवासी बेटे सजीब वाजेद जॉय के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया.
हसीना और उनकी पार्टी की मुश्किलें यहीं नहीं रुकीं. 17 दिसंबर 2025 को, राष्ट्रीय चुनाव से लगभग दो महीने पहले, प्रेस में खबर आई कि अंतरिम सरकार के गृह मामलों के सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) जहांगीर आलम चौधरी ने पुलिस को निर्देश दिया कि अवामी लीग के “अपराधियों” को कानून के दायरे में लाया जाए, भले ही उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज न हुआ हो.
अवामी लीग के समर्थकों को उम्मीद थी कि नई चुनी हुई सरकार आने के बाद हालात बेहतर होंगे. हालांकि, संसदीय चुनाव के बाद दो हफ्तों में देश भर में अवामी लीग के एक दर्जन से ज्यादा दफ्तरों के ताले खोल दिए गए, लेकिन नई सरकार ने अभी तक पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों पर लगे प्रतिबंध को हटाने के बारे में कुछ नहीं कहा है.
न ही तारिक रहमान की सरकार या उनकी पार्टी, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के किसी सदस्य ने अवामी लीग नेताओं के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण के फैसलों को पलटने के बारे में कुछ कहा है.
चुनाव से पहले बीएनपी ने सिर्फ इतना वादा किया था कि वह एक ‘ट्रुथ एंड हीलिंग कमीशन’ बनाएगी, ताकि “बदले और प्रतिशोध की राजनीति के खिलाफ आगे देखने वाली नई राजनीतिक संस्कृति” स्थापित की जा सके.
फिलहाल यह सिर्फ शब्द हैं, और व्यवहारिक तौर पर देखा जाए तो शेख हसीना को अभी भी भारत से ही अपनी पार्टी की गतिविधियां चलानी पड़ रही हैं.
उत्तराधिकारी नहीं, ज़मीन पर नेता
अवामी लीग के एक पूर्व सांसद, जो कोलकाता के उत्तर-पश्चिमी हिस्से के बड़े उपनगर न्यू टाउन में रह रहे हैं, उन्होंने दिप्रिंट से कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता पूरी तरह निराश हो चुके हैं.
उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद थी कि अंतरराष्ट्रीय दबाव इतना होगा कि फरवरी के चुनाव में अवामी लीग को भाग लेने दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और नई सरकार भी बांग्लादेश की राजनीति में अवामी लीग को उसका वैध स्थान देने के मूड में नहीं दिख रही है.”
गुमनाम रहने की शर्त पर बात करने वाले इस सांसद ने कहा कि हसीना सरकार के गिरने के बाद भारत में शरण लेने वाले कई पार्टी कार्यकर्ता अब खाड़ी देशों, मलेशिया और पश्चिमी देशों में चले गए हैं और वहां नियमित नौकरी या छोटे कारोबार के साथ बसने की कोशिश कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, “वे अब भी सोशल मीडिया पर अवामी लीग के समर्थन में पोस्ट करते हैं और बांग्लादेश में हो रही गलत चीज़ों पर गुस्सा ज़ाहिर करते हैं, लेकिन ज़मीन पर पार्टी को कैसे फिर से खड़ा किया जाए, इस पर कोई साफ दिशा नहीं होने के कारण वे धीरे-धीरे सक्रिय राजनीति से दूर हो रहे हैं.”
सांसद ने कहा कि जहां तक बांग्लादेश के अंदर मौजूद पार्टी कार्यकर्ताओं की बात है, उनके पास ऐसा कोई नेता नहीं है जिसके पास वे बांग्लादेश के अंदर जाकर मार्गदर्शन ले सकें, इसलिए वे बिना दिशा के हैं.
उन्होंने आगे कहा, “अवामी लीग के कार्यकर्ताओं में निराशा बढ़ रही है, चाहे वे बांग्लादेश में हों या निर्वासन में.”
ऐसा लगता है कि अभी तुरंत अवामी लीग की बांग्लादेश की राजनीति में वापसी की कोई उम्मीद नहीं है.
आखिरकार, देश के नए प्रधानमंत्री को अक्टूबर 2018 में ढाका स्पीडी ट्रायल ट्रिब्यूनल-1 ने शेख हसीना को निशाना बनाकर किए गए घातक ग्रेनेड हमले के मामले में दोषी ठहराया था और उन्हें उम्रकैद की सज़ा दी थी. उस समय जब फैसला आया था तब हसीना देश की प्रधानमंत्री थीं और तारिक रहमान लंदन में निर्वासन में थे. अब जब हालात पलट गए हैं और हसीना को मौत की सज़ा का सामना करना पड़ रहा है, तो रहमान क्यों हसीना को फिर से स्थापित करने या उनकी पार्टी को जगह देने की कोई कोशिश करेंगे?
लेकिन बांग्लादेश पर नज़र रखने वाले विशेषज्ञ कहते हैं कि अवामी लीग पहले भी इससे बड़े झटकों से वापस आई है और फिर ऐसा कर सकती है. वरिष्ठ पत्रकार और Mujib’s Blunders: The Power and the Plot Behind His Killing के लेखक मनाश घोष ने द प्रिंट से कहा कि अवामी लीग की असली ताकत उसकी जमीनी नेतृत्व और कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने पहले भी पार्टी को देश की मुख्यधारा की राजनीति में वापस लाने में मदद की है.
घोष ने कहा, “मुक्ति युद्ध की विरासत को अपने साथ लेकर चलने वाली अवामी लीग की बांग्लादेश की राजनीति में प्रासंगिकता खत्म नहीं हो सकती.”
अब सवाल यह है कि ज़मीनी कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन कौन करेगा? 23 फरवरी को द डिप्लोमैट ने लिखा कि हसीना के हटने के बाद पार्टी की ओर से सबसे ज्यादा बयान उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय दे रहे हैं और उन्होंने कई इंटरव्यू में संकेत दिया है कि हसीना शायद बांग्लादेश की सक्रिय राजनीति में वापस न लौटें.
लेख में कहा गया, “इससे यह धारणा और मजबूत हुई है कि वह पार्टी का नेतृत्व करेंगे. क्योंकि अवामी लीग ऐतिहासिक रूप से परिवार-केंद्रित नेतृत्व की आदी रही है, इसलिए कई लोग जॉय के संभावित नेतृत्व को स्वाभाविक विरासत के रूप में देखते हैं.”
लेकिन जॉय अमेरिका में रहते हैं और अदालत के फैसले की वजह से बांग्लादेश वापस नहीं आ सकते. इसके अलावा, अवामी लीग के सीधे समर्थकों के बाहर जो बड़ा मतदाता वर्ग है, वह शायद जुलाई 2024 की घटनाओं के बाद हसीना या उनके परिवार के किसी सदस्य को बांग्लादेश की राजनीति में स्वीकार करने के लिए तैयार न हो.
द डिप्लोमैट के बांग्लादेश संवाददाता साकलैन रिजवे, जिन्होंने 2024 के जुलाई विद्रोह को कवर किया था, ने दिप्रिंट से कहा कि जो बांग्लादेशी अभी भी अवामी लीग का समर्थन करते हैं, वे इस मुद्दे पर बंटे हुए हैं.
रिजवे ने कहा, “कुछ लोग मानते हैं कि सत्ता में हसीना के आखिरी कार्यकाल के विवादों के बाद पार्टी को नए नेतृत्व के साथ खुद को फिर से बनाना चाहिए. जबकि दूसरे लोग शेख परिवार के प्रति बहुत वफादार हैं और अब भी हसीना को पार्टी का स्वाभाविक नेता मानते हैं.”
रिजवे ने दिप्रिंट से कहा कि बांग्लादेश इस समय नई सरकार के साथ तालमेल बैठा रहा है और ध्यान इस बात पर है कि क्या तारिक रहमान स्थिरता ला पाएंगे. उन्होंने कहा, “शेख परिवार की वापसी पर कोई गंभीर चर्चा बाद में ही हो सकेगी.”
अभी अवामी लीग को इस सवाल का जवाब नहीं चाहिए कि हसीना के बाद कौन होगा या यह बहस कि हसीना को बांग्लादेश लौटना चाहिए या नहीं, बल्कि जमीन पर नया नेतृत्व चाहिए, जो हसीना के मार्गदर्शन में काम करते हुए पार्टी में नई जान डाल सके.
विडंबना यह है कि इस मामले में जिस पार्टी से वह सीख ले सकती है, वह उसकी हमेशा की प्रतिद्वंद्वी और मौजूदा सत्तारूढ़ पार्टी बीएनपी है.
लंबे समय तक जब बीएनपी सत्ता से बाहर रही, तब उसकी अध्यक्ष खालिदा ज़िया घर में नजरबंद थीं और उनके बेटे तारिक रहमान निर्वासन में थे, जबकि बांग्लादेश में शेख हसीना की लगातार सत्ता रही. उस समय बीएनपी की रोजमर्रा की गतिविधियां, आंदोलन और राजनीतिक कार्यक्रम मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर, अमीर खुसरू महमूद चौधरी, सलाउद्दीन अहमद और दूसरे नेताओं जैसे सक्षम लोगों ने संभाले.
अवामी लीग को भी ऐसे जमीनी नेतृत्व की ज़रूरत है जो पार्टी की कमान संभाल सके, इससे पहले कि वह हसीना की वापसी या उनके उत्तराधिकारी जैसे बड़े सवालों पर विचार करना शुरू करे.
दीप हलदर एक लेखक और दिप्रिंट में कॉन्ट्रिब्यूटिंग एडिटर हैं. उनका एक्स हैंडल @deepscribble है. व्यक्त किए गए विचार उनके निजी हैं.
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