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Monday, 16 March, 2026
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वामपंथी दलों के लिए राजनीतिक परीक्षा: केरल में गढ़ बचाना और पश्चिम बंगाल में पुनरुत्थान की चुनौती

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नयी दिल्ली, 15 मार्च (भाषा) पांच राज्यों की विधानसभा चुनाव तिथियों की घोषणा ने वामपंथी दलों के लिए राजनीतिक रणभूमि तैयार कर दी है। केरल में अपने एकमात्र मजबूत गढ़ को बचाए रखने और पश्चिम बंगाल में खोई राजनीतिक पकड़ को वापस हासिल करने की चुनौती उनके सामने है, जिससे ये चुनाव उनके लिए न केवल सत्ता की रक्षा बल्कि राजनीतिक पुनरुत्थान की कसौटी भी साबित होंगे।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एम ए बेबी ने कहा कि वामपंथी दल संगठनात्मक और राजनीतिक रूप से चुनावों के लिए पूरी तरह तैयार हैं, खासकर केरल में जहां वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की तैयारी कर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम संगठनात्मक और राजनीतिक रूप से पूरी तरह तैयार हैं। केरल में हमारे पास माकपा नीत वाम लोकतांत्रिक मोर्चा है। 99 प्रतिशत सीट पर सहमति पहले ही बन चुकी है। हमें उम्मीद है कि माकपा लगातार तीसरी बार सत्ता में आकर केरल के राजनीतिक इतिहास को फिर से लिख सकेगी।’’

तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) नीत गठबंधन में वामपंथी दलों की भागीदारी को लेकर बेबी ने कहा कि जनता उन्हें मजबूत जनादेश से सत्ता में लौटाएगी। पुडुचेरी में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को हराना भी उनका लक्ष्य है।

उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे को कुछ गिरावट का सामना करना पड़ा। विधानसभा में हमारा कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। इस बार हमें उम्मीद है कि हम वाम दल के प्रदर्शन में महत्वपूर्ण सुधार कर पाएंगे। अगर हम जनता के एक बड़े वर्ग को समझाने में सफल हो जाते हैं, तो हम वापसी कर सकते हैं। लेकिन इसे देखने के लिए हमें इंतजार करना होगा।’’

असम का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नीतियों ने अल्पसंख्यकों को अलग-थलग कर दिया है और विपक्षी गठबंधन को इससे फायदा मिल सकता है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के महासचिव डी राजा ने इसी तरह के विचार दोहराते हुए कहा कि पांचों विधानसभा चुनाव “राजनीतिक रूप से निर्णायक” हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं को हटाने से चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

उन्होंने दावा किया कि तमिलनाडु में 74 लाख, पश्चिम बंगाल में 58 लाख, केरल में नौ लाख, असम में 2.43 लाख और पुडुचेरी में एक लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।

इन चिंताओं के बावजूद, दोनों नेताओं ने विश्वास जताया कि मतदाता इस बार निर्णायक निर्णय देंगे। उन्होंने कहा कि केरल में एलडीएफ, तमिलनाडु में धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन और पुडुचेरी में भ्रष्ट राजग शासन पर जनता का फैसला आएगा।

भाषा खारी नेत्रपाल

नेत्रपाल

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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