अहमदाबाद, 13 मार्च (भाषा) गोल्डन कतर डिविजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) मेजर जनरल गौरव बग्गा ने शुक्रवार को कहा कि एक उभरती शक्ति के रूप में भारत के लिए कहीं से मदद मिलना कठिन होगा, इसलिए यह आवश्यक है कि देश स्वदेशी रक्षा समाधान विकसित करे।
मेजर जनरल बग्गा अहमदाबाद विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा, ‘‘हम एक उभरती शक्ति हैं, और कोई भी उभरती शक्ति कभी मित्र नहीं बनाती। हमें कहीं से भी मदद नहीं मिलेगी। इसलिए, स्वदेशी समाधान ढूंढने ही होंगे।’’
उन्होंने कहा कि पिछले साल पाकिस्तान में आतंकवादी ढांचे के खिलाफ भारत की सैन्य कार्रवाई ‘‘ऑपरेशन सिंदूर’’ के दौरान देश के किसी भी सहयोगी ने भारत के लिए कोई बयान नहीं दिया।
मेजर जनरल बग्गा ने जोर देकर कहा, ‘‘भारत के 190 मित्र थे, लेकिन कोई भी इसके पक्ष में नहीं बोला, जबकि पाकिस्तान के तीन सहयोगियों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पड़ोसी देश को भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद पहुंचाया। एक उभरती शक्ति को कोई हाथ पकड़कर मदद नहीं देता। हर शक्ति जो उभरी है, वह अपनी आंतरिक ताकत के कारण ही उभरी है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें बैठकर यह तय करना होगा कि इस राष्ट्र की सुरक्षा कैसे की जाए। मैं बहुत आशावादी हूं कि समाधान स्वदेशी ढूंढा जाएगा। आत्मनिर्भरता सफल होगी और 2047 में भारत विकसित भारत होगा।’’
मेजर जनरल बग्गा ने बताया कि आधुनिक युद्ध अब बहु-क्षेत्रीय हो गया है, जिससे युद्धक्षेत्र की प्रकृति में महत्वपूर्ण बदलाव आया है।
उन्होंने रेगिस्तान से वनों तक, और हिमालय में शून्य से नीचे के तापमान तक भारत के बदलते भौगोलिक क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि इसलिए सेना की जरूरतें सभी मोर्चों पर बदलती रहती हैं।
बग्गा ने कहा कि रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के शोधकर्ता और (रक्षा) उद्योग ऐसी सामग्री का उत्पादन करते हैं, जिस पर सेना निर्भर रहकर जीवित रह सकती है।
भाषा
सुरेश दिलीप
दिलीप
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