हैदराबाद, 13 मार्च (भाषा) अविभाजित आंध्र प्रदेश के पूर्व डीजीपी एच जे डोरा का शुक्रवार को गुर्दे की बीमारी से संबंधित जटिलताओं के कारण निधन हो गया। वे 82 वर्ष के थे।
डोरा 2020 से ही गुर्दे की गंभीर बीमारी से ग्रसित थे और 2024 में यह बीमारी अंतिम चरण में पहुंच गई थी।
उन्हें हाल ही में सरकारी निजाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एनआईएमएस) में भर्ती कराया गया था और बाद में छुट्टी दे दी गई।
शुक्रवार को वह अपने घर पर अचेत मिले, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। एनआईएमएस ने बताया कि तमाम कोशिशों और उपायों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी, केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी, बीआरएस अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव और कई अन्य नेताओं तथा तेलंगाना के डीजीपी बी शिवधर रेड्डी ने डोरा के निधन पर शोक व्यक्त किया।
रेवंत रेड्डी ने अविभाजित आंध्र प्रदेश के दौरान खुफिया प्रमुख और डीजीपी के रूप में डोरा की अमूल्य सेवाओं को याद करते हुए कहा कि दिवंगत अधिकारी ने पुलिस में कई सुधार किए, जिनमें ‘दोस्ताना पुलिसिंग’ भी शामिल है।
किशन रेड्डी ने कहा कि डोरा की ईमानदारी और प्रशासनिक क्षमता को हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि डोरा ने सीआईएसएफ निदेशक के रूप में भी अपनी सेवाएं दी थीं।
शिवधर रेड्डी ने बताया कि तटीय आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में जन्मे डोरा भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 1965 बैच के अधिकारी थे।
भाषा तान्या पवनेश
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