तिरुवनंतपुरम, 13 मार्च (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की केरल इकाई के सचिव एम वी गोविंदन ने शुक्रवार को कहा कि पार्टी ने फैसला किया है कि एलडीएफ सरकार को कानूनी और संवैधानिक पहलुओं की जांच करने के बाद शबरिमला में महिलाओं के प्रवेश के संबंध में उच्चतम न्यायालय में ‘उचित जवाब’ देना चाहिए।
गोविंदन ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में यह भी कहा कि शीर्ष अदालत ने सात प्रश्नों पर राज्य से जवाब मांगा था और उनमें से किसी में भी यह नहीं पूछा कि क्या महिलाओं को भगवान अयप्पा मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी जानी चाहिए।
माकपा के राज्य सचिव शबरिमला में महिलाओं के प्रवेश पर पार्टी और सरकार के रुख के बारे में पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे।
गोविंदन ने कहा, ‘‘माकपा राज्य सचिवालय ने निर्णय लिया कि आवश्यकतानुसार, केरल सरकार अपने कानूनी और संवैधानिक पहलुओं की जांच करने के बाद (उच्चतम न्यायालय में) उचित प्रतिक्रिया दे सकती है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘राज्य सचिवालय ने निर्णय लिया कि मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और कानूनी पहलुओं की जांच के बाद आवश्यक निर्णय लिया जाना चाहिए।’’
उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी यह नहीं कह रही है कि उसके रुख में कोई बदलाव आया है।
गोविंदन ने आगे दावा किया कि शीर्ष अदालत ने यह नहीं पूछा है कि शबरिमला में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं।
उन्होंने कहा, “हमें सात सवालों के जवाब देने हैं और उनमें से किसी में भी यह नहीं पूछा गया है कि महिलाओं को शबरिमला में प्रवेश की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं। यह सिर्फ शबरिमला के बारे में नहीं है, यह शीर्ष अदालत के समक्ष एक संवैधानिक मुद्दा है जो सभी धर्मों से संबंधित है।’’
परिपाटियों की सुरक्षा का हवाला देते हुए गोविंदन ने कहा कि पार्टी का हमेशा से रुख रहा है कि क्षेत्र के विशेषज्ञों और पंडितों के साथ चर्चा के बाद निर्णय लिया जाना चाहिए।
भाषा वैभव नरेश
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