नई दिल्ली: कांग्रेस नेता शशि थरूर ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर द्वारा ईरान के नेताओं से बातचीत का स्वागत किया और कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए दुनिया को मिलकर प्रयास करना चाहिए.
संसद परिसर के बाहर मीडिया से बात करते हुए थरूर ने कहा कि भारत का शांति के लिए पहल करना सराहनीय है. उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में दोनों पक्ष समझौते के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं और इसका असर कई देशों पर पड़ रहा है.
उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ सकता है. इसके साथ ही खाड़ी देशों में रहने वाले करीब 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा और भारत के संबंध भी दांव पर हैं.
थरूर ने कहा कि इस संघर्ष को खत्म करने के लिए दुनिया को सामूहिक रूप से आगे आना चाहिए और भारत को इसमें अग्रणी आवाज बनना चाहिए.
गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपतिमसूद पेज़ेशकियन से फोन पर बातचीत की थी. दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और खाड़ी क्षेत्र की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर चर्चा की.
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने क्षेत्र में बढ़ते तनाव, आम नागरिकों की मौत और नागरिक ढांचे को हुए नुकसान पर गहरी चिंता जताई.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए थरूर ने कहा कि इस संघर्ष में दोनों पक्षों से गलतियां हुई हैं. उन्होंने अमेरिका और इज़राइल की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि बातचीत चल रही थी, ऐसे समय में हमले करना उचित नहीं था.
साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान को भी पड़ोसी देशों पर हमले करने और निर्दोष लोगों को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए. उनके अनुसार यह स्थिति युद्ध और संघर्ष की निरर्थकता को दिखाती है.
थरूर ने कहा कि महात्मा गांधी और बुद्ध की भूमि होने के नाते भारत को शांति और अहिंसा के मूल्यों के साथ खड़ा रहना चाहिए.
इस बीच 15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव 2817 (2026) पारित करते हुए ईरान द्वारा क्षेत्रीय देशों पर किए गए हमलों की निंदा की. इस प्रस्ताव के पक्ष में 13 वोट पड़े, जबकि चीन और रूस ने मतदान से दूरी बनाई.
एलपीजी सिलेंडर की कथित कमी के सवाल पर थरूर ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अब बड़ी संख्या में लोग लकड़ी और कोयले की जगह गैस सिलेंडर का इस्तेमाल कर रहे हैं. ऐसे में यदि सिलेंडर की उपलब्धता में दिक्कत होती है तो यह लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है.
हालांकि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एलपीजी की कमी के दावों को खारिज किया है.
