नयी दिल्ली, 12 मार्च (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने गुजरात के एक पूर्व प्रोफेसर और एक सेवानिवृत्त स्त्री रोग विशेषज्ञ को निशाना बनाकर किए गए ‘डिजिटल अरेस्ट’ धोखाधड़ी के दो मामलों के संबंध में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को बताया कि दोनों मामलों में कुल 30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई है।
पहले मामले में अहमदाबाद के सेंट जेवियर्स कॉलेज की एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर को 10 जून 2025 से एक महिला के फोन आने शुरू हो गए, जो खुद को भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की प्रतिनिधि बता रही थी और कह रही थी कि उनका फोन नंबर ब्लॉक कर दिया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर प्रोफेसर को बताया कि मुंबई के कोलाबा थाने में उनके खिलाफ एक मामला दर्ज किया गया है और कहा कि अब निरीक्षक विजय खन्ना इस मामले को देखेंगे, जिसके बाद 82 दिनों तक चलने वाला एक दुःस्वप्न शुरू हुआ।
प्राथमिकी में कहा गया है कि इस दौरान विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारियों के रूप में खुद को पेश करने वाले जालसाजों ने पीड़िता और उसके पति को लगातार धमकाया और उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ करके सत्यापन के बहाने अलग-अलग किस्तों में उनकी जीवन भर की बचत के 11 करोड़ रुपये से अधिक की उगाही की।
इसी तरह के एक मामले में, गांधीनगर की एक सेवानिवृत्त स्त्री रोग विशेषज्ञ को 15 मार्च से 16 जुलाई 2025 तक 123 दिनों के लिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ करके रखा गया था, जिसके दौरान साइबर अपराधियों ने कथित तौर पर विभिन्न किस्तों में 19.24 करोड़ रुपये से अधिक की रकम हड़प ली थी।
दोनों ही मामलों में, अपराधियों ने पीड़ितों को इस बात के लिए मना लिया कि वे ‘जांच’ से संबंधित कोई भी जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
इन मामलों को इनकी पहले जांच कर रही सीआईडी की साइबर अपराध इकाई से लेकर सीबीआई को सौंप दिया गया है।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय एजेंसी ने दोनों मामलों के संबंध में लगभग 44 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
भाषा
शुभम प्रशांत
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