नयी दिल्ली, 12 मार्च (भाषा) द्वितीयक इस्पात उद्योग (स्क्रैप से बनने वाला) ने औद्योगिक गैस की आपूर्ति में दिक्कतों को दूर करने के लिए सरकार से दखल देने की मांग की है, और चेतावनी दी है कि रुकावटों से सैकड़ों इकाइयां बंद हो सकती हैं।
इस्पात उद्योग, इस्पात उत्पादन में गर्म करने, रीहीटिंग फर्नेस, कटिंग और दूसरे उच्च ताप आवश्यकता वाली प्रक्रियाओं के लिए साफ ईंधन के विकल्प के तौर पर तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का इस्तेमाल करता है।
उद्योग निकाय एआईआईएफए सस्टेनेबल स्टील मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एआईआईएफए) ने इस्पात मंत्रालय को लिखे पत्र में कहा, ‘‘हम औद्योगिक गैस की सीमित और अनियमित आपूर्ति से पैदा हो रहे गंभीर संकट की ओर तुरंत ध्यान दिलाना चाहते हैं, जो द्वितीयक इस्पात इकाइयों के रोज़ाना के कामकाज पर काफी असर डाल रहा है।’’
हाल के सप्ताहों में, कई सदस्य इकाइयों ने औद्योगिक गैस की आपूर्ति में रुकावटों और अनिश्चितताओं के कारण गंभीर मुश्किलों की जानकारी दी है। संस्था ने कहा कि ये गैस कई परिचालन प्रक्रिया के लिए ज़रूरी आदान हैं, जिसमें कटिंग, हीटिंग और प्लांट के ठीक से काम करने के लिए ज़रूरी दूसरी गतिविधियां शामिल हैं।
संस्था ने कहा कि इस कमी और अनियमित उपलब्धता के कारण परिचालन संबंधी रुकावटें आई हैं, उत्पादन क्षमता कम हुई है, परिचालन लागत बढ़ी है और आपूर्ति प्रतिबद्धता को पूरा करने में देरी हुई है। इस ज़रूरी मुद्दे को जल्द से जल्द हल करने के लिए मंत्रालय को दखल देना चाहिए।
ज़्यादातर द्वितीयक इस्पात इकाइयां एमएसएमई ढांचे के तहत काम करती हैं, गैस आपूर्ति में लंबे समय तक रुकावट उनकी वित्तीय स्थिति पर बुरा असर डाल सकती है और उत्पादन धीमा होने या कुछ समय के लिए बंद होने की आशंका हो सकती है।
एआईआईएफए ने कहा कि सही नीतिगत समर्थन और संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय से क्षेत्र को औद्योगिक गैस की स्थिर, पर्याप्त और बिना रुकावट आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिये।
भाषा राजेश राजेश अजय
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