नयी दिल्ली, 12 मार्च (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) परिसर में जुलूसों और विरोध प्रदर्शनों पर लगे पूर्ण प्रतिबंध पर रोक लगाने से बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया।
साथ ही अदालत ने कहा कि उसकी स्पष्ट राय है कि ऐसा पूर्ण प्रतिबंध उचित नहीं है और इसे जारी नहीं रखा जा सकता।
अदालत ने विश्वविद्यालय और दिल्ली पुलिस को प्रतिबंध के खिलाफ कानून के छात्र की याचिका पर जवाब देने को कहा।
मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा, ‘‘यह आदेश कब से लागू है? इसे 10 दिन और लागू रहने दीजिए।’’
पीठ ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि इस मामले में संतुलन बनाये रखना आवश्यक है।
पीठ ने कहा, ‘‘एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करें।’’
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि 25 मार्च तय की।
अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले दो कॉलेजों को भी नोटिस जारी किया।
दिल्ली विश्वविद्यालय के वकील ने कहा कि प्रॉक्टर का निर्णय दिल्ली पुलिस द्वारा उत्तरी परिसर क्षेत्र में पांच या अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने के खिलाफ जारी निषेधाज्ञा पर आधारित था।
अदालत ने सुनवाई के दौरान प्रतिबंध लगाने के फैसले पर पुलिस और विश्वविद्यालय दोनों से सवाल किया और कहा कि अदालत की ‘‘स्पष्ट राय’’ है कि पूर्ण प्रतिबंध उचित नहीं है।
अदालत ने कहा, ‘‘इस स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता। हम केवल अनुच्छेद 19 (भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार) के कारण ही हस्तक्षेप कर रहे हैं। आपको निष्पक्ष व्यवहार करना चाहिए। यह स्थिति क्यों उत्पन्न हुई? प्रॉक्टर भी एक शिक्षाविद हैं। कोई भी शिक्षाविद ऐसा आदेश पारित नहीं करना चाहता… कारण, आप समझते हैं।’’
इसने कहा, ‘‘हम विद्यार्थियों के आचरण पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। देखिए चुनाव में क्या हुआ। आपके द्वारा पैदा की गई स्थिति के अलावा कोई भी शैक्षणिक संस्थान का प्रमुख ऐसा आदेश क्यों जारी करेगा?’’
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि दो छात्र समूहों के बीच संभावित झड़प की ‘‘सूचना’’ के बाद निषेधाज्ञा शुरू में एक महीने के लिए जारी की गई थी और इसे फरवरी में 25 अप्रैल तक बढ़ा दिया गया था।
वकील ने कहा, ‘‘यह (झड़प) कुछ समय पहले भी हुई थी। उन्होंने पुलिस थाने का घेराव किया था।’’
अदालत ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का काम है।
अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पूछा कि जब पुलिस पहले ही निषेधाज्ञा जारी कर चुकी थी तो विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाने के लिए अलग से आदेश क्यों जारी किया गया।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने दावा किया कि विद्यार्थियों के शांतिपूर्ण जमावड़े पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है और अदालत से अनुरोध किया कि कम से कम उत्तरी परिसर के बाहर स्थित कॉलेजों के लिए इस प्रतिबंध पर रोक लगाई जाए।
दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा यह प्रतिबंध फरवरी में दिल्ली पुलिस द्वारा दो प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद लगाया गया है। ये प्राथमिकी विरोध प्रदर्शन के दौरान दो छात्र समूहों के बीच हुई झड़प के बाद दर्ज की गई थीं।
इतिहासकार इरफान हबीब पर 12 फरवरी को उस समय बाल्टी से पानी फेंका गया था जब वह एक सामाजिक न्याय कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
भाषा
देवेंद्र नरेश
नरेश
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