नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए विपक्ष द्वारा संसद के दोनों सदनों में एक नोटिस दिये जाने की संभावना है।
यह पहली बार होगा, जब किसी मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने के लिए नोटिस दिया जाएगा।
विपक्ष ने सीईसी पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का अकसर पक्ष लेने, वास्तविक मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने और भाजपा को ‘‘वोट चोरी’’ में मदद करने का आरोप लगाया है।
कानून के अनुसार, सीईसी को ‘‘उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए मौजूद प्रक्रिया, और समान आधार पर ही पद से हटाया जा सकता है।’’
मुख्य निर्वाचन आयुक्त की अनुशंसा के बिना अन्य निर्वाचन आयुक्तों को पद से नहीं हटाया जा सकता।
सीईसी को पद से हटाने की प्रक्रिया:
मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें एवं कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 11 (2) के अनुसार, ‘‘मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को पद से हटाने की प्रक्रिया, और उसी तरह के आधार पर ही (पद से) हटाया जा सकता है।’’
उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को संसद द्वारा हटाया जा सकता है और इसकी प्रक्रिया न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 द्वारा संचालित होती है।
इस संबंध में, संसद के किसी भी सदन में नोटिस स्वीकृत हो जाने के बाद, उस सदन में प्रस्ताव लाया जा सकता है।
राज्यसभा में कम से कम 50 सदस्यों के हस्ताक्षर आवश्यक हैं। लोकसभा में 100 सदस्यों का समर्थन आवश्यक है।
न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के अनुसार, किसी भी सदन में, न्यायाधीश को पद से हटाने का प्रस्ताव स्वीकृत हो जाने के बाद, (लोकसभा) अध्यक्ष या (राज्यसभा) सभापति, जैसा भी मामला हो, तीन सदस्यीय समिति का गठन करेंगे जो उन आधारों की जांच करेगी, जिन पर पद से उन्हें हटाने की मांग की गई है।
समिति में प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) या शीर्ष न्यायालय के न्यायाधीश, 25 उच्च न्यायालयों में से किसी एक के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित न्यायविद होते हैं।
समिति की कार्यवाही किसी भी अदालती कार्यवाही की तरह होती है, जिसमें गवाहों और आरोपियों से जिरह की जाती है।
सीईसी को भी समिति के समक्ष बोलने का अवसर मिलता है।
नियम के अनुसार, समिति द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद, इसे सदन में पेश किया जाएगा और पद से हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हो जाएगी। हालांकि, सीईसी को अपना बचाव करने का अधिकार होता है।
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सुभाष नरेश
नरेश
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