रायपुर, 10 मार्च (भाषा) छत्तीसगढ़ में विपक्षी दल कांग्रेस ने मंगलवार को राज्य की धान खरीद प्रक्रिया में 8,500 करोड़ रुपये का नुकसान होने का आरोप लगाया। हालांकि राज्य सरकार ने इस दावे को खारिज कर दिया, जिसके कारण विधानसभा में हंगामा हुआ और 30 विधायकों को कुछ समय के लिए निलंबित कर दिया गया।
विपक्षी विधायकों को सदन के आसन के करीब पहुंचकर इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए स्थगन प्रस्ताव नोटिस देने पर थोड़ी देर के लिए निलंबित किया गया।
नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी गई धान का उचित भंडारण और सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही।
उन्होंने दावा किया कि 2024-25 के खरीफ विपणन सीजन में 149.25 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी गई, जिसमें से 22.71 लाख क्विंटल अब तक विभाग की रिपोर्ट के अनुसार मौजूद है।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि वह धान अब उचित गुणवत्ता की नहीं रही और उसे चूहों ने खा लिया, भ्रष्ट अधिकारियों ने बेच दिया, या खराब भंडारण व रखरखाव न होने के कारण नष्ट हो गई।
उन्होंने कहा कि धान विपणन संघ द्वारा संचालित भंडारण केंद्रों से 16.03 लाख क्विंटल जबकि खरीद केंद्रों से 6.67 लाख क्विंटल धान गायब हो गई।
महंत ने यह दावा भी किया कि केंद्र ने छत्तीसगढ़ से अधिशेष चावल स्वीकार करने से मना कर दिया, जिसकी वजह से राज्य को 1.83 करोड़ क्विंटल धान को लगभग 50 प्रतिशत कम कीमत पर बेचना पड़ा।
उन्होंने आरोप लगाया कि 2024-25 में 128.61 लाख मीट्रिक टन धान ‘कस्टम मिलर्स’ को सौंप दिया गया, लेकिन बदले में केवल 79.69 लाख मीट्रिक टन चावल जमा किया गया, जिसकी वजह से लगभग 6.48 लाख मीट्रिक टन चावल की कमी हो गई।
उन्होंने कहा कि ये लगभग 9.67 लाख मीट्रिक टन धान के बराबर है, जिसकी कीमत लगभग 3,869 करोड़ रुपये है।
कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाते हुए कहा, ‘इन कारणों से राज्य को कम से कम 8,500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।”
उन्होंने इस मामले की जांच कराने और जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस के अन्य विधायकों ने इस मुद्दे पर चर्चा की मांग करते हुए स्थगन प्रस्ताव नोटिस दिया।
आरोपों का जवाब देते हुए खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि यह दावा करना गलत है कि राज्य को धान खरीद योजना में शासन की विफलता या भ्रष्टाचार के कारण भारी नुकसान हुआ है।
उन्होंने कहा कि 2024-25 के खरीफ विपणन सीजन में राज्य ने 25.49 लाख किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 149.25 लाख टन धान खरीदी, जिसके लिए केंद्र द्वारा घोषित 34,349 करोड़ रुपये एमएसपी और कृषक उन्नति योजना के तहत 11,928 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, इस तरह कुल किसानों को 46,277 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि धान को चूहों ने नहीं खाया या भ्रष्ट अधिकारियों ने नहीं बेचा। उन्होंने कहा कि इसका सही तरीके से भंडारण किया गया था, जिसमें कवर और कीट नियंत्रण उपाय शामिल थे।
दयालदास बघेल ने कहा कि 2,728 में से 2,739 खरीद केंद्रों पर स्टॉक सत्यापन पूरा हो चुका है, जबकि बाकी 11 केंद्रों पर यह प्रक्रिया जारी है।
मंत्री के जवाब के बाद, अध्यक्ष ने स्थगन प्रस्ताव नोटिस को अस्वीकार कर दिया। असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी की और सदन में आसन के करीब आ गए, जिसके बाद अध्यक्ष ने 30 सदस्यों के निलंबन की घोषणा की।
निलंबन बाद में रद्द कर दिया गया।
भाषा संजीव जोहेब
जोहेब
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