नई दिल्ली: क्या भारत इतिहास रचेगा और टी20 वर्ल्ड कप खिताब को बचाने वाली पहली टीम बनेगा, या फिर न्यूजीलैंड मेजबान टीम के खिलाफ अपना मजबूत रिकॉर्ड जारी रखेगा. इसका जवाब आज मिल जाएगा.
भारत रविवार को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में आईसीसी मेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में न्यूजीलैंड से भिड़ेगा.
न्यूजीलैंड के कप्तान मिशेल सैंटनर पहले ही कह चुके हैं कि अपनी पहली टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी जीतने के लिए उन्हें “कुछ दिल तोड़ने में कोई दिक्कत नहीं होगी”.
उनका यह बयान ऑस्ट्रेलिया के कप्तान पैट कमिंस के 2023 आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप फाइनल से पहले दिए गए बयान की याद दिलाता है: “एक बड़ी भीड़ को अचानक शांत होते सुनने से ज्यादा संतोषजनक कुछ नहीं होता.” बाद में ऑस्ट्रेलिया उस फाइनल में जीत गया और 19 नवंबर 2023 भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए एक दर्दनाक याद बन गया.
इतिहास भारत के कप्तान सूर्यकुमार यादव और उनकी टीम के पक्ष में ज्यादा नहीं है. ब्लैककैप्स का मेजबान टीम के खिलाफ मजबूत रिकॉर्ड रहा है. उन्होंने टी20 वर्ल्ड कप में हमेशा भारत पर दबदबा बनाए रखा है. दोनों टीमों के बीच टी20 वर्ल्ड कप में तीन मुकाबले हुए हैं और भारत 2007, 2016 और 2021 में तीनों ही मैच हार गया.
पहली भिड़ंत
भारत और न्यूजीलैंड पहली बार 2007 में दक्षिण अफ्रीका में हुए पहले टी20 वर्ल्ड कप में आमने-सामने आए थे. यह ग्रुप स्टेज का मैच था जहां एम.एस. धोनी ने टॉस जीतकर कीवी टीम को पहले बल्लेबाजी करने के लिए कहा.
न्यूजीलैंड ने 20 ओवर में 190 रन बनाए. इसमें ब्रेंडन मैकुलम (45), क्रेग मैकमिलन (44) और जैकब ओरम (35) का योगदान रहा. भारत के लिए आर.पी. सिंह और हरभजन सिंह ने दो-दो विकेट लिए.
भारत की पारी के दौरान 14वें ओवर में एक अहम पल आया जब धोनी दिनेश कार्तिक के साथ गलतफहमी के कारण रन आउट हो गए. धोनी 24 रन बनाकर नॉन-स्ट्राइकर एंड पर रन आउट हुए. अंत में भारत 180/9 तक ही पहुंच पाया और 10 रन से मैच हार गया.
रन आउट और धोनी का रिश्ता, खासकर न्यूजीलैंड के खिलाफ, काफी दर्दनाक रहा है. 2019 वनडे वर्ल्ड कप सेमीफाइनल का रन आउट आज भी भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों को चुभता है. धोनी ने भुवनेश्वर कुमार के साथ दूसरा रन लेने की कोशिश की थी, लेकिन मार्टिन गप्टिल के सीधे थ्रो ने उन्हें पवेलियन भेज दिया. भारत वह मैच 18 रन से हार गया.
शर्मनाक बल्लेबाजी पतन
भारत और न्यूजीलैंड 2016 टी20 वर्ल्ड कप में नागपुर में फिर आमने-सामने आए. पहले बल्लेबाजी करते हुए मेहमान टीम ने 126/6 का स्कोर बनाया, जो खासकर घरेलू मैदान पर भारत के लिए आसान लक्ष्य लग रहा था.
लेकिन भारत की बल्लेबाजी बुरी तरह बिखर गई. 127 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए पूरी टीम सिर्फ 79 रन पर आउट हो गई. धोनी (30) और विराट कोहली (23) सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी रहे.
दोनों टीमें 2021 टी20 वर्ल्ड कप में फिर भिड़ीं, जहां न्यूजीलैंड की गेंदबाजी के सामने भारत एक बार फिर संघर्ष करता नजर आया. करो या मरो वाले इस मैच में भारत सिर्फ 110/7 रन ही बना सका.
भारत की मजबूत बल्लेबाजी लाइनअप जिसमें विराट कोहली (9), रोहित शर्मा (14) और के.एल. राहुल (18) शामिल थे, पूरी तरह फेल हो गई. इसके बाद कीवी टीम ने 111 रन का लक्ष्य सिर्फ 14.3 ओवर में हासिल कर लिया.
‘स्काई फैक्टर’
हालांकि न्यूजीलैंड की गेंदबाजी के सामने भारत की बल्लेबाजी पहले कई बार बिखरी है, लेकिन उम्मीद की एक वजह भी है. कप्तान सूर्यकुमार भारत की ओर से टी20 इंटरनेशनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं. भारतीय कप्तान ने 13 मैचों में 526 रन बनाए हैं, जिसमें उनका सर्वोच्च स्कोर 111 नाबाद है.
न्यूजीलैंड की ओर से भारत के खिलाफ सबसे ज्यादा रन कॉलिन मुनरो ने बनाए हैं, जिन्होंने 426 रन बनाए. हालांकि मुनरो ने 2024 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया. उनके बाद टिम सिफर्ट हैं, जिन्होंने भारत के खिलाफ 425 रन बनाए हैं. सिफर्ट इस बार भी शानदार फॉर्म में हैं. उन्होंने 7 मैचों में 274 रन बनाए हैं और उनका स्ट्राइक रेट 161.17 रहा है. वह जबरदस्त फॉर्म में हैं और इसमें सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 33 गेंदों पर खेली गई उनकी अहम 58 रन की पारी भी शामिल है.
गेंदबाजों में न्यूजीलैंड के लिए टी20 इंटरनेशनल में भारत के खिलाफ सबसे ज्यादा विकेट ईश सोढ़ी ने लिए हैं. उन्होंने 25 मैचों में 30 विकेट लिए हैं. न्यूजीलैंड के कप्तान मिशेल सैंटनर 23 विकेट के साथ दूसरे स्थान पर हैं.
भारत की ओर से टी20 इंटरनेशनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ सबसे ज्यादा विकेट अर्शदीप सिंह ने लिए हैं. उन्होंने 9 मैचों में 17 विकेट लिए हैं. उनके बाद जसप्रीत बुमराह हैं, जिन्होंने 14 मैचों में 16 विकेट लिए हैं.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: केजरीवाल और सिसोदिया के खिलाफ कैसे ढह गया CBI का केस— ‘नीति में हेरफेर तक साबित करने में नाकाम’
