जम्मू, सात मार्च (भाषा) जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने नेपाल में हुए चुनाव का स्वागत करते हुए शनिवार को कहा कि सरकारों का गठन देश की जनता की पसंद से होना चाहिए, ना कि बाहरी हस्तक्षेप या हवाई हमले के परिणामस्वरूप।
अब्दुल्ला ने कहा कि उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने के विरोध में कश्मीर घाटी में हुए प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों की रिहायी और प्राथमिकी की समीक्षा का सुझाव दिया था।
उन्होंने कहा, ‘‘जैसा कि मैंने पहले कहा था, अपने शासन का चुनाव करने का अधिकार केवल उस देश में रहने वाले लोगों को है। इसलिए, ईरान के लोगों को अपने शासन के बारे में निर्णय लेना चाहिए, ना कि वाशिंगटन डीसी, तेल अवीव, नयी दिल्ली, बीजिंग या कहीं और बैठे किसी व्यक्ति को।’’
मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने यहां एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से कहा, “ईरान की जनता को यह तय करना है कि वे किस तरह की सरकार चाहते हैं और वे उस बदलाव को कैसे लाना चाहते हैं। मुझे लगता है कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बिल्कुल सही थे। हवाई बमबारी से सत्ता परिवर्तन नहीं किया जा सकता।”
उन्होंने कहा कि सरकार परिवर्तन के प्रयास में एक धार्मिक नेता की जान ले ली गई। उन्होंने कहा कि ईरान की सरकार राष्ट्रपति के नेतृत्व में है, जो अभी जीवित हैं, इसलिए सरकार में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
अब्दुल्ला ने कहा, “एक धार्मिक नेता की हत्या कर दी गई, जिनके नेतृत्व को न केवल शिया समुदाय बल्कि दुनिया भर के मुसलमान स्वीकार करते थे। यह सरकार परिवर्तन नहीं बल्कि बल का घोर दुरुपयोग और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।”
अब्दुल्ला ने अन्य देशों से तुलना करते हुए नेपाल और बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सरकारें जनता द्वारा चुनी जाती हैं। उन्होंने कहा, “यह अच्छी बात है। जैसा कि मैंने नेपाल के बारे में कहा – नेपाल की सरकार किसने चुनी? नेपाल की जनता ने। ठीक वैसे ही, बांग्लादेश की सरकार किसने चुनी? बांग्लादेश की जनता ने।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अब, नेपाल की जनता ने एक युवा प्रधानमंत्री को चुना है। पहले वे शायद काठमांडू के मेयर थे। अब पूरे देश की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। यह अच्छी बात है।”
अब्दुल्ला ने कहा, ‘हम केवल यही आशा कर सकते हैं कि उनका देश पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखेगा – यही सही होगा।’
अपने पिता एवं नेशनल कान्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के उस बयान के बारे में पूछे जाने पर, जिसमें उन्होंने भारतीय रिफाइनरी को रूसी तेल खरीदने की अमेरिकी छूट को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था, मुख्यमंत्री ने कहा कि जब फारूक अब्दुल्ला ने इस बारे में बात की थी, तो उन्हें और कुछ कहने की जरूरत नहीं।
उन्होंने कहा, ‘‘फारूक साहब ने पार्टी की ओर से और हम सभी की ओर से बात की। इससे आगे कुछ कहने की जरूरत नहीं है।”
फारूक अब्दुल्ला ने कहा था कि देश को अपने फैसले खुद लेने चाहिए, किसी और को उसके लिए फैसले नहीं लेना चाहिए।
घाटी में गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की तत्काल रिहाई की पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की मांग पर मुख्यमंत्री ने श्रीनगर में नागरिक समाज के साथ अपनी हालिया बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि चर्चा के दौरान दो बातें स्पष्ट रूप से सामने आईं।
उन्होंने कहा, “पहला, जिन मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई है, उनमें सरकार – यानी कानून व्यवस्था तंत्र – को नरम रुख अपनाना चाहिए। दूसरा, गिरफ्तार किए गए लोगों को रिहा किया जाना चाहिए। नागरिक समाज ने ये सुझाव दिए हैं और हमने उन्हें आगे पहुंचा दिया है। अब उनसे अनुरोध किया जाएगा कि बेहतर स्थिति को देखते हुए इस मामले में कुछ कदम उठायें।”
भाषा अमित माधव
माधव
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
