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Saturday, 7 March, 2026
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विज्ञान और कूटनीति को मिलकर काम करना होगा: स्विट्जरलैंड स्थित फाउंडेशन की महानिदेशक

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(फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, सात मार्च (भाषा) स्विट्जरलैंड स्थित संस्था ‘जिनेवा साइंस एंड डिप्लोमेसी एंटिसिपेटर’ (जीईएसडीए) ने कहा कि ‘सीईआरएन’ के साथ मिलकर ‘ओपन क्वांटम इंस्टीट्यूट’ की स्थापना का विचार यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में जब क्वांटम कंप्यूटिंग उपलब्ध हो तो यह ‘‘सभी के लिए सुलभ’’ हो।

फिलहाल ‘रायसीना डायलॉग’ में शामिल होने के लिए भारत दौरे पर आईं जीईएसडीए की महानिदेशक मैरीलीन एंडरसन ने भी कहा कि विज्ञान और कूटनीति को इस अर्थ में एक साथ काम करना होगा कि वे एक दूसरे को ‘‘सकारात्मक रूप से प्रभावित’’ करते हों या एक दूसरे के लिए आवश्यक हों।

नयी दिल्ली में स्विस दूतावास में शुक्रवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में उन्होंने 2019 में स्थापित फाउंडेशन के दृष्टिकोण और उभरती वैज्ञानिक खोजों का पूर्वानुमान लगाने तथा उन्हें समाज के लाभ के लिए ठोस कार्यों में बदलने के संस्था के मिशन के बारे में बात की।

भौतिक विज्ञानी के रूप में प्रशिक्षित एंडरसन, विज्ञान और इंजीनियरिंग, डिजाइन, समाज और संस्कृति के बीच के अंतर्संबंधों पर महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं।

विज्ञान और कूटनीति किस प्रकार एक सार्थक सहयोग में एक साथ आ सकते हैं, इस विषय पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कण भौतिकी पर अनुसंधान के लिए एक प्रमुख वैश्विक संस्थान के रूप में 1950 के दशक में सीईआरएन की स्थापना का उदाहरण दिया।

एंडरसन ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘‘इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है, जिसे संभवत: सभी लोग पहले से जानते हैं। यह सीधे तौर पर जीईएसडीए से संबंधित तो नहीं है, लेकिन जीईएसडीए के सहयोगी संस्थान सीईआरएन से संबंधित है। सीईआरएन की स्थापना अंतरराष्ट्रीय सहयोग से हुई थी, जिसमें सभी वैज्ञानिकों और विज्ञान को एक साथ लाकर ब्रह्मांड की उत्पत्ति का अध्ययन किया गया और व्यापक अर्थों में मानवता के उद्गम को समझा गया। इसलिए, यह विज्ञान और कूटनीति के सफल मेल का एक सशक्त उदाहरण है।’’

उन्होंने कहा कि जीईएसडीए में वे (वैज्ञानिक) वास्तव में वर्तमान में क्वांटम के क्षेत्र में सीईआरएन के साथ काम कर रहे हैं।

एंडरसन ने कहा, ‘‘तो, यह सूचना ‘इनकोडिंग’ का अगला चरण है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के साथ मिलकर काम करेगा, जिसके बारे में आजकल बहुत चर्चा हो रही है और जो बहुत तेजी से लोकप्रिय हो रही है। क्वांटम की अपनी एक खास प्रकृति है… क्वांटम कंप्यूटर अभी औपचारिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन प्रयोगशाला में प्रयोग किए जा रहे हैं। कई उद्योग और व्यवसाय पहले से ही क्वांटम कंप्यूटिंग पर काम कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यही वह चीज है, जिसे हमने सीईआरएन के साथ मिलकर जीईएसडीए में ओपन क्वांटम इंस्टीट्यूट के नाम से विकसित किया है। इसे स्विस बैंक यूबीएस के माध्यम से निजी क्षेत्र का समर्थन प्राप्त है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जब क्वांटम कंप्यूटिंग उपलब्ध हो जाए, तो यह सभी के लिए सुलभ हो। इसे अपनाने के लिए आवश्यक क्षमता निर्माण हासलि करने के वास्ते पर्याप्त प्रयास किए जाएंगे। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इसमें शामिल सभी हितधारकों को एक साथ लाया जाए।’’

दूतावास ने शुक्रवार शाम को जीईएसडीए और भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय के सहयोग से एक ‘एंटिसिपेटरी लीडरशिप लैब’ का आयोजन किया।

अधिकारियों ने बताया कि इस आयोजन में विज्ञान, शासन, कूटनीति, व्यापार और नागरिक संगठन के क्षेत्रों से लगभग 60 नेताओं को एक व्यवस्थित, बहु-हितधारक संवाद में साथ लाया गया ताकि उभरती वैज्ञानिक और तकनीकी सफलताओं का अनुमान लगाने और उन्हें नियंत्रित करने की उनकी सामूहिक क्षमता को मजबूत किया जा सके।

भाषा सुरभि सुरेश

सुरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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