scorecardresearch
Saturday, 7 March, 2026
होमएजुकेशनमुंबई में BMC के स्कूलों में कैम्ब्रिज और IB बोर्ड की मुफ्त पढ़ाई, दाखिले के लिए लग रही है कतार

मुंबई में BMC के स्कूलों में कैम्ब्रिज और IB बोर्ड की मुफ्त पढ़ाई, दाखिले के लिए लग रही है कतार

मिड-डे मील से लेकर स्टूडेंट्स के लिए प्रोटीन बार तक, माटुंगा और विले पार्ले में BMC के IGCSE और IB स्कूल चुपचाप एक म्युनिसिपल स्कूल की उम्मीदों को बदल रहे हैं.

Text Size:

मुंबई: मुंबई के माटुंगा में एलके वाघजी स्कूल की एंट्रेंस पर लंदन ब्रिज और ब्रिटिश रॉयल गार्ड्स की पेंटिंग बनी हुई है. यह कोई निजी स्कूल नहीं है. इसे शहर की नगर निगम चलाती है—और यहां कैम्ब्रिज IGCSE से जुड़ी शिक्षा पूरी तरह मुफ्त दी जाती है.

यह महाराष्ट्र में किसी भी नगर निगम द्वारा चलाया जाने वाला एकमात्र IGCSE स्कूल है. और इसका दूसरा स्कूल — विले पार्ले इंटरनेशनल स्कूल — जो इंटरनेशनल बैकलॉरिएट (आईबी) प्रोग्राम से जुड़ा है — मुंबई के पश्चिमी उपनगरों में नगर निगम द्वारा चलाया जाने वाला एकमात्र आईबी स्कूल है. अभी दोनों स्कूलों में केवल प्राथमिक कक्षाओं तक शिक्षा दी जाती है.

ये दोनों मिलकर बृहन्मुंबई नगर निगम के उस प्रयोग की पहली पंक्ति बनते हैं, जिसका उद्देश्य शहर के बच्चों तक विश्वस्तरीय शिक्षा पहुंचाना है, चाहे उनके माता-पिता की आय या पृष्ठभूमि कुछ भी हो.

2021 की परियोजना

मुंबई में IGCSE और आईबी बोर्ड शुरू करने की पहल 2021 में तब की महा विकास आघाड़ी सरकार ने की थी. इस परियोजना का मॉडल दिल्ली में आम आदमी पार्टी द्वारा चलाए जा रहे सरकारी स्कूलों से लिया गया था. उसी साल राजधानी में आप सरकार ने अपना आईबी से जुड़ा पब्लिक स्कूल भी शुरू किया था.

इसी के अनुसार, इन दोनों स्कूलों को बीएमसी ने “मुंबई पब्लिक स्कूल” के नाम से फिर से ब्रांड किया, ताकि नए लक्ष्य और महत्वाकांक्षा को दिखाया जा सके.

बीएमसी इससे पहले भी अपने स्कूलों में अलग-अलग बोर्ड शामिल करने का दायरा बढ़ा रही थी. 2017 तक उसके स्कूल केवल महाराष्ट्र राज्य बोर्ड से जुड़े थे. उसी साल उसने CBSE से जुड़े स्कूल और एक IGCSE स्कूल शुरू किए.

अब नगर निगम 18 सीबीएसई स्कूल, एक आईसीएसई, एक आईबी और एक IGCSE स्कूल चला रही है. इनमें नर्सरी से लेकर कक्षा 10 तक के 13,316 छात्रों को मुफ्त शिक्षा दी जा रही है.

चालू वित्त वर्ष के बजट में शहर में एक और सीबीएसई स्कूल जोड़ने का भी प्रावधान किया गया है.

The LK Waghji School in Mumbai’s Matunga | Purva Chitni | ThePrint
मुंबई के माटुंगा में एलके वाघजी स्कूल | पूर्वा चितनी | दिप्रिंट

आखिर दाखिला कौन ले रहा है?

यह आम धारणा है कि नगर निगम के स्कूलों में केवल कम आय वाले परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं, IGCSE स्कूल में सही नहीं बैठती.

एलके वाघजी स्कूल के स्टाफ ने दिप्रिंट को बताया कि यहां के छात्र अलग-अलग पृष्ठभूमि से आते हैं. केंद्रीय और राज्य सरकार के अधिकारियों के बच्चे, मंत्रालय में काम करने वालों के बच्चे, और मध्यवर्ग तथा कम आय वाले परिवारों के बच्चे साथ पढ़ते हैं.

मुंबई की एक निजी कंपनी में काम करने वाले अश्विन साबले अपने बेटे को — जो अभी कक्षा 3 में पढ़ता है — इस स्कूल में लाने के लिए हर दिन लगभग आधा घंटा गाड़ी चलाकर आते हैं. वे कहते हैं कि इसकी वजह केवल बोर्ड है.

उन्होंने कहा, “यह बोर्ड बहुत अच्छी शिक्षा देता है. शिक्षक अच्छी तरह प्रशिक्षित हैं और हमारे बच्चों को यहां कोई समस्या नहीं होती. शिक्षा की गुणवत्ता भी बहुत ऊंची है. दरअसल हम यहां से लगभग आधा घंटा दूर रहते हैं, लेकिन मैं अपने बच्चे को सिर्फ इस बोर्ड की वजह से इसी स्कूल में भेजना चाहता था.”

उनके लिए यह स्कूल “विदेशी शिक्षा का एक रास्ता” है — एक ऐसी व्यवस्था जो रटकर पढ़ने की जगह ऐसा पाठ्यक्रम देती है, जो उनके बच्चे को आगे रखता है.

एक अन्य अभिभावक प्रशांत साल्वी, जिनका बच्चा कक्षा 4 में पढ़ता है, ने भी इसी तरह की बात कही.

उन्होंने कहा, “पाठ्यक्रम भी बहुत कठिन है. जो चीजें दूसरे बच्चे चौथी या पांचवीं में सीखते हैं, वह मेरे बच्चे ने पहली या दूसरी कक्षा में ही पढ़ ली थीं. चूंकि यहां छात्रों की संख्या सीमित है, इसलिए शिक्षक अच्छी तरह ध्यान दे पाते हैं, जिससे हमारे बच्चों को फायदा होता है.”

उपलब्ध सीटों से ज्यादा मांग

दोनों स्कूलों का कहना है कि प्रतिक्रिया बहुत जोरदार रही है.

हर साल आईबी स्कूल में कक्षा 1 से 4 में दाखिले के लिए 400 से 500 आवेदन आते हैं. IGCSE स्कूल में कक्षा 1 से 5 के लिए 200 से ज्यादा आवेदन आते हैं, और यहां प्री-प्राइमरी की सिर्फ 30 सीटों के लिए लगभग 100 आवेदन आते हैं.

कैम्ब्रिज के नियमों के अनुसार हर कक्षा में अधिकतम 20 छात्र होने चाहिए. हालांकि बीएमसी को 30 छात्रों तक दाखिला देने की छूट मिली है, जिसमें छात्र-शिक्षक अनुपात 40:1 रखा गया है.

हर कक्षा में केवल एक सेक्शन और एलके वाघजी में विशेष रूप से प्रशिक्षित सिर्फ सात शिक्षक होने की वजह से मांग हमेशा क्षमता से ज्यादा रहती है. स्कूल अपने शिक्षकों की संख्या बढ़ाने पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है.

एलके वाघजी स्कूल के एक अधिकारी ने कहा, “हम शिक्षकों की संख्या बढ़ाना चाहते हैं और पीटी जैसे विषयों के विशेषज्ञ शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया में हैं.”

उन्होंने आगे कहा, “हमारी चुनौती छात्रों को दाखिला देना है क्योंकि हर साल हमें 200 से ज्यादा आवेदन मिलते हैं, लेकिन नियमों की वजह से हम हर कक्षा में ज्यादा छात्रों को दाखिला नहीं दे सकते. फिर भी हम छात्रों का इंटरव्यू लेते हैं और उन्हें वेटिंग लिस्ट में रखते हैं, ताकि अगर कोई छात्र स्कूल बदल दे और सीट खाली हो जाए तो उन्हें मौका दिया जा सके.”

अधिकारियों ने बताया कि सीट खाली होने का एक कारण सरकारी कर्मचारियों का तबादला भी होता है. जब किसी अभिभावक का तबादला मुंबई से बाहर हो जाता है, तो उनके बच्चे की सीट खाली हो जाती है.

स्कूल क्या सुविधाएं देते हैं

पढ़ाई के अलावा यहां मिलने वाली सुविधाओं का दायरा भी काफी बड़ा है. एलके वाघजी में हर छात्र को 27 चीजें दी जाती हैं. इनमें स्कूल बैग, पानी की बोतल, टिफिन बॉक्स, मिड-डे मील, स्टेशनरी, किताबें, जूते और यूनिफॉर्म शामिल हैं.

पिछले एक महीने में स्कूल ने दो प्रोटीन बार भी देना शुरू किया है. हर प्रोटीन बार में 25 ग्राम प्रोटीन होता है और इन्हें छात्रों को एक दिन छोड़कर दिया जाता है.

स्कूल में एक लाइब्रेरी और कंप्यूटर लैब भी है. यहां 16 कंप्यूटर हैं, जिन्हें स्टाफ के अनुसार बच्चे बहुत पसंद करते हैं.

एसटीईएम पढ़ाई के लिए बुनियादी ढांचा, और फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी की लैब भी पहले से तैयार हैं — ताकि ऊंची कक्षाओं के छात्र उनका उपयोग कर सकें.

इन स्कूलों को अभी प्री-प्राइमरी और प्राइमरी कक्षाओं के लिए प्रमाणन मिला हुआ है. और हाई स्कूल के लिए प्रमाणन पाने के लिए आवेदन भी पहले ही कर दिया गया है, ताकि आगे चलकर कक्षा 10 तक पढ़ाई कराई जा सके.

At the entrance of LK Waghji School | Purva Chitnis | ThePrint
एलके वाघजी स्कूल के एंट्रेंस पर | पूर्वा चिटनिस | दिप्रिंट

चुनौती: खर्च ज्यादा, और डॉलर में भुगतान

अपनी संभावनाओं के बावजूद यह मॉडल बीएमसी की वित्तीय स्थिति पर दबाव डालता है. शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार IGCSE और आईबी स्कूल चलाने का खर्च राज्य बोर्ड से जुड़े स्कूल चलाने की तुलना में लगभग दो गुना है.

अधिकारियों ने बताया कि प्रमाणन शुल्क और किताबों का भुगतान विदेशी मुद्रा में करना पड़ता है, हालांकि उन्होंने इसकी रकम बताने से इनकार कर दिया.

बीएमसी के शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने, नाम न बताने की शर्त पर, एक और चिंता जताई.

उन्होंने कहा, “ये बोर्ड मुख्य रूप से उन छात्रों के लिए होते हैं जो आगे विदेश में पढ़ना चाहते हैं. अभी हम आईबी और IGCSE बोर्ड में पढ़ने वाले छात्रों को मुफ्त शिक्षा दे रहे हैं, लेकिन अगर आगे पढ़ाई के लिए अभिभावक अपने बच्चों को विदेश नहीं भेज पाए और उन्हें वापस कम स्तर के बोर्ड में आना पड़े, तो यह पूरी कोशिश बेकार हो जाएगी.”

इसी चिंता की वजह से नगर निगम विस्तार के मामले में सावधानी बरत रहा है. तेजी से विस्तार करने के बजाय बीएमसी मांग को देख रही है, और यह भी ध्यान दे रही है कि सीबीएसई और आईसीएसई अभी भी ज्यादा परिवारों को आकर्षित करते हैं.

बीएमसी की शिक्षा समिति की अध्यक्ष राजेश्री शिरवडकर ने बताया कि नगर निगम किस संतुलन को बनाने की कोशिश कर रहा है.

उन्होंने कहा, “इन स्कूलों को अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है और भविष्य में हम इनका विस्तार करेंगे. लेकिन ज्यादातर लोग आईसीएसई स्कूलों को पसंद करते हैं. आईबी और IGCSE स्कूलों के लिए हमें ज्यादा प्रशिक्षित शिक्षकों की जरूरत है, लेकिन दुनिया प्रतिस्पर्धी है, इसलिए हम चाहते हैं कि बीएमसी के छात्र पीछे न रहें.”

उन्होंने आगे कहा, “और चूंकि यह थोड़ा ज्यादा महंगा भी है, इसलिए हमें भविष्य में जो प्रतिक्रिया मिलेगी उसी के आधार पर इन स्कूलों की संख्या बढ़ाई जाएगी.” बीएमसी के अनुसार यह प्रयोग अच्छी शुरुआत कर चुका है.

निजी स्कूल के शिक्षक और गैर-लाभकारी संगठन आदर्श शिक्षक समिति के अध्यक्ष राजेश सिंह ने दिप्रिंट से कहा कि कम आय वाले परिवारों के छात्रों को अंतरराष्ट्रीय बोर्ड का अनुभव देने के लिए बीएमसी की यह पहल अच्छी है, लेकिन जोर गुणवत्ता पर होना चाहिए.

उन्होंने कहा, “निजी और बीएमसी द्वारा चलाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय बोर्ड वाले स्कूलों के छात्रों के बीच वास्तव में बराबरी का मैदान नहीं होगा, क्योंकि शिक्षकों की गुणवत्ता और पढ़ाने का तरीका बहुत मायने रखता है. इसके अलावा घर का माहौल भी अलग होगा, खासकर उन छात्रों के लिए जो कम आय वाले परिवारों से आते हैं.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: हरियाणा से राज्यसभा के लिए राहुल गांधी ने दिग्गजों की जगह पूर्व सरकारी कर्मचारी को क्यों चुना


 

share & View comments