इंदौर, पांच मार्च (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने इंदौर में दूषित पेयजल से कई लोगों की मौत होने के मामले की जांच कर रहे एक आयोग को अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के लिए बृहस्पतिवार को एक महीने की मोहलत दी।
अदालत ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह आयोग को उसका मांगा गया पूरा रिकॉर्ड मुहैया कराए जिसमें मृतकों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, पेयजल की जांच रिपोर्ट और पानी की पाइपलाइनों से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।
उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की अगुवाई वाला एक सदस्यीय आयोग शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से लोगों की मौत के मामले की जांच कर रहा है।
मामले में एक याचिकाकर्ता के वकील मनीष यादव ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि आयोग ने सीलबंद लिफाफे में उच्च न्यायालय के सामने अपनी अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत की।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से आयोग को भागीरथपुरा मामले में पूरा रिकॉर्ड मुहैया नहीं कराया गया है जिसमें मृतकों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, पेयजल परीक्षण की रिपोर्ट और पानी की पाइपलाइनों से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।
यादव ने बताया कि अंतरिम रिपोर्ट की रोशनी में अदालत ने प्रदेश सरकार को निर्देशित किया कि वह पूरा रिकॉर्ड आयोग को जल्द से जल्द सौंपे।
उन्होंने बताया, ‘‘उच्च न्यायालय ने एक सदस्यीय जांच आयोग को भागीरथपुरा मामले में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के लिए महीने भर का समय दिया है और अगली सुनवाई के लिए छह अप्रैल की तारीख तय की है।’
इस बीच, मामले के एक अन्य याचिकाकर्ता के वकील अजय बागड़िया ने बताया कि उच्च न्यायालय में उनके मुवक्किल की पेश नयी अर्जी में कहा गया है कि नगर निगम की पानी की एक बड़ी टंकी (ओवरहेड टैंक) की देख-रेख के लिए पदस्थ कर्मचारियों ने कथित रूप से पोटेशियम क्लोराइड की गोलियां इस टंकी में बिना वजह और बिना इजाजत के डाली थीं।
उन्होंने बताया कि अर्जी में आरोप लगाया गया है कि भागीरथपुरा के जलापूर्ति तंत्र से जुड़ी इस टंकी में अधिक मात्रा में पोटेशियम क्लोराइड मिलाए जाने से पेयजल हानिकारक हो गया जिसके सेवन से लोगों की तबीयत पर गंभीर असर पड़ा।
बागड़िया के मुताबिक इस अर्जी पर छह अप्रैल को सुनवाई हो सकती है।
अधिकारियों ने बताया कि भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से उल्टी-दस्त का प्रकोप पिछले साल दिसंबर के आखिर में शुरू हुआ था।
स्थानीय लोगों और कांग्रेस ने इस प्रकोप में कुल 36 लोगों की मौत का दावा किया है। बहरहाल, इस मामले पर चर्चा के दौरान विधानसभा में हंगामे के बीच 19 फरवरी को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा था कि भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण 22 लोगों की मौत हुई है और हर मृतक के परिजनों को दो लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है।
भाषा
हर्ष जोहेब सुभाष
सुभाष
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