मुंबई, पांच मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच हिंद महासागर में एक ईरानी नौसैन्य जहाज को डुबोने वाली अमेरिकी पनडुब्बी ने कोई पूर्व चेतावनी जारी नहीं की थी और अचानक हमला किया। एक ईरानी राजनयिक ने बृहस्पतिवार को यह दावा किया।
मुंबई में ईरान के महावाणिज्यदूत सईद रजा मोसयेब मोतलाघ ने ‘पीटीआई वीडियो’ से बात करते हुए कहा कि ‘आईरिस देना’ नामक जहाज नौसैन्य अभ्यास के लिए भारत आया था और उसमें भागीदारी करने के बाद स्वदेश लौट रहा था, तभी उस पर हमला हुआ।
उन्होंने बताया कि जब कोई जहाज ऐसे अभ्यास के लिए आता है, तो वह अधिक मात्रा में गोला-बारूद नहीं ले जाता। उसके पास जो कुछ भी सीमित मात्रा में गोला-बारूद होता है, वह आमतौर पर अभ्यास के दौरान ही इस्तेमाल हो जाता है। इसलिए, यह कहा जा सकता है कि इस जहाज के पास व्यावहारिक रूप से कोई सैन्य गोला-बारूद नहीं था।
मंगलवार को श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी नौसैन्य जहाज को टॉरपीडो के जरिये निशाना बनाया और डुबो दिया। यह जहाज अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा में भाग लेने के बाद विशाखापत्तनम से लौट रहा था।
मोतलाघ ने कहा, ‘‘अमेरिकी पनडुब्बी ने इस जहाज को कोई पूर्व सूचना नहीं दी और अचानक हमला कर दिया, जिससे जहाज में विस्फोट हो गया। दुर्भाग्य से, इस घटना में हमारे देशवासियों और बहादुर ईरानी सैनिकों सहित लगभग 100 लोग, शायद इससे भी अधिक, शहीद हो गए। अन्य घायल हैं, और उन्हें ईरान ले जाने के लिए जरूरी इंतजाम किया जा रहा है।’’
श्रीलंका की नौसेना ने बुधवार को कहा था कि उसने डूबे हुए युद्धपोत से 87 शव बरामद किए और 32 लोगों को बचाया।
राजनयिक ने कहा कि जब ईरान के हवाई अड्डों पर उड़ानें फिर से शुरू हो जाएंगी, तो उनकी सरकार भारतीय अधिकारियों के साथ समन्वय करके पश्चिम एशियाई देश से भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए विशेष विमानों की व्यवस्था करेगी।
मोतलाघ ने इस्लामी गणराज्य पर अमेरिका-इजराइल के ‘‘हमले’’ को ‘‘अन्यायपूर्ण’’ करार दिया।
भाषा सुभाष शफीक
शफीक
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