scorecardresearch
Thursday, 5 March, 2026
होमदेशअर्थजगतपश्चिम एशिया संघर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए निकट अवधि की चुनौती: आरबीआई एमपीसी सदस्य

पश्चिम एशिया संघर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए निकट अवधि की चुनौती: आरबीआई एमपीसी सदस्य

Text Size:

मुंबई, पांच मार्च (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्य नागेश कुमार ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए निकट अवधि की चुनौती है, लेकिन इससे लंबे समय में आर्थिक वृद्धि की गति प्रभावित नहीं होगी।

कुमार ने कहा कि जीडीपी वृद्धि दर को उच्च पथ पर ले जाने के लिए राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों को समन्वित तरीके से काम करने की जरूरत है। मौजूदा हालात में तेल की कीमतों में वृद्धि, निर्यात में व्यवधान और धनप्रेषण पर प्रभाव को वृद्धि के मोर्चे पर तत्काल चुनौतियों के रूप में पहचाना गया है।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक ई-मेल साक्षात्कार में कहा, ”पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में वृद्धि, क्षेत्र को होने वाले निर्यात में बाधा और धनप्रेषण में कमी के साथ ही भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा जैसी चुनौतियां सामने आई हैं।”

उन्होंने उल्लेख किया कि निकट भविष्य में अमेरिका-इजराइल हमलों के साथ संघर्ष तेज होने और तेल की कीमतों में तेजी की आशंका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस क्षेत्र में दुनिया के उच्च दांव को देखते हुए संकट जल्द ही हल हो जाएगा। कुमार ने कहा कि तेल के स्रोतों में विविधता लाकर जोखिमों को कम किया जा सकता है।

उन्होंने कहा, ”भारत के लिए वेनेजुएला से तेल आपूर्ति का खुलना भी मददगार हो सकता है, क्योंकि यह विकल्पों में विविधता लाता है।”

कुमार ने कहा कि यदि पश्चिम एशिया संकट जल्दी समाप्त होता है और ईरान पर से प्रतिबंध हटा लिए जाते हैं, तो भारत को सस्ती तेल आपूर्ति से लाभ हो सकता है।

उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद मुद्रास्फीति के काबू में रहने की उम्मीद है।

भाषा पाण्डेय

पाण्डेय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments