scorecardresearch
Tuesday, 3 March, 2026
होमदेशलोको पायलट ने बवासीर के ऑपरेशन के घाव दिखाने के लिए कपड़े उतारे, नहीं मिली छुट्टी : यूनियन

लोको पायलट ने बवासीर के ऑपरेशन के घाव दिखाने के लिए कपड़े उतारे, नहीं मिली छुट्टी : यूनियन

Text Size:

(जीवन प्रकाश शर्मा)

नयी दिल्ली, तीन मार्च (भाषा) लोको स्टाफ यूनियन ने मंगलवार को दावा किया कि बवासीर के ऑपरेशन के बाद आराम के लिए छुट्टी नहीं मिलने से नाराज एक लोको पायलट ने लखनऊ रेल डिवीजन के एक वरिष्ठ अधिकारी के सामने अपने गुप्तांगों पर न भरने वाले घाव दिखाने के लिए अपने कपड़े उतार दिए।

लोको पायलट के साथियों द्वारा रिकॉर्ड किया गया इस घटना का एक वीडियो रेलवे कर्मचारियों के विभिन्न व्हाट्सऐप समूहों में व्यापक रूप से प्रसारित हुआ। कर्मचारियों ने इसे अमानवीय व्यवहार बताते हुए आक्रोश जताया।

‘ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन’ (एआईएलआरएसए) के नेताओं का दावा है कि अनुसूचित जनजाति समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोको पायलट राजेश मीणा के इस हताशा भरे कदम के बावजूद मुख्य चालक दल नियंत्रक (सीसीसी) रतन कुमार नहीं माने।

एसोसिएशन के अनुसार, रतन कुमार ने मीणा को अवकाश देने से इनकार कर दिया। नेताओं ने बताया कि इसके बाद लोको पायलट ने अपने समुदाय के एक मजदूर नेता से संपर्क किया, जिन्होंने मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों से बात की, जिसके बाद उन्हें अवकाश दिया गया।

इस मुद्दे को लेकर संपर्क किये जाने पर उत्तर रेलवे जोन अंतर्गत लखनऊ मंडल के रेलवे प्रबंधक सुनील कुमार वर्मा से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

घटना के कथित वीडियो में मीणा और उनके सहकर्मी रतन कुमार से चिकित्सा अवकाश देने से इनकार करने पर बहस करते नजर आ रहे हैं।

एआईएलआरएसए के महासचिव के सी जेम्स ने कहा, ‘‘यह बेहद शर्मनाक है कि एक लोको पायलट को अपने वरिष्ठ अधिकारी के सामने चिकित्सा अवकाश के लिए अपनी पैंट उतारनी पड़ी और बदले में उसे ‘इनकार’ ही मिला।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए दिन-रात काम करते हैं, ताकि वे अपने रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों के साथ त्योहार मना सकें। क्या रेलवे प्रशासन से हमें इसी तरह के व्यवहार की उम्मीद करनी चाहिए।’’

मीणा के सहकर्मियों ने एक वीडियो भी रिकॉर्ड किया है, जिसमें उन्होंने अपनी दुर्दशा और स्पष्ट तनाव को बयां किया है।

वीडियो में उन्होंने बताया कि वे लंबे समय से बवासीर से पीड़ित थे और इंदौर में इलाज कराने के बाद भी जब कोई फायदा नहीं हुआ, तो आखिरकार 22 फरवरी को लखनऊ में उनकी सर्जरी हुई।

उत्तरी जोन के एआईएलआरएसए के सहायक महासचिव आदर्श कुमार गुप्ता ने मीणा के मामले के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा, ‘‘काफी समझाने-बुझाने के बाद मीणा को 22 फरवरी से 28 फरवरी तक सर्जरी के लिए छुट्टी दी गई, लेकिन जब एक हफ्ते के भीतर उनका घाव ठीक नहीं हुआ, तो उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए पहले रेलवे स्वास्थ्य इकाई से छुट्टी बढ़ाने का अनुरोध किया।’’

गुप्ता ने बताया कि उन्होंने मीणा से बात की और उनकी हालत जानकर उन्हें गहरा सदमा लगा।

उन्होंने बताया, ‘‘यूनिट के चिकित्सकों ने उनकी पूरी जांच की और जब उन्हें यकीन हो गया कि छुट्टी मिलने का उनका कारण जायज है, तो उन्होंने उनसे वरिष्ठ अधिकारियों से ‘बीमारी का प्रमाण पत्र’ लाने को कहा।

गुप्ता ने बताया, ‘‘मीणा ने पहले क्रू कंट्रोलर से और फिर सीसीसी से उस प्रमाण पत्र के लिए संपर्क किया।’’

एआईएलआरएसए के नेताओं ने बताया कि मीणा ने सीसीसी को अपनी हालत साबित करने के लिए कई मेडिकल दस्तावेज़ दिखाए, जिनमें लैब रिपोर्ट (सीबीसी, ग्लूकोज और हेपेटाइटिस स्क्रीनिंग) और पर्चे, साथ ही घर पर इस्तेमाल की गई पट्टियां और ड्रेसिंग भी शामिल थीं, लेकिन अधिकारी संतुष्ट नहीं हुए।

मीणा ने इस घटनाक्रम को एक रिकॉर्ड किए गए वीडियो में भी बताया है।

गुप्ता ने कहा, ‘‘उनके पास अपनी पैंट उतारकर अपना घाव दिखाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।’’

उन्होंने आगे बताया कि यूनियन ने सीसीसी रतन कुमार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

भाषा रंजन सुरेश

सुरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments