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Thursday, 5 March, 2026
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पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर अंतर-मंत्रालयी समूह की पैनी नजर: गोयल

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नयी दिल्ली, तीन मार्च (भाषा) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि सरकार ने पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों की दैनिक आधार पर निगरानी करने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन किया है। यह समूह पोत परिवहन, लॉजिस्टिक, निर्यात और महत्वपूर्ण आयात में संभावित जोखिमों का आकलन करेगा।

ईरान पर अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले के बाद पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर निर्यातकों ने चिंता जताई है। उन्हें डर है कि इससे समुद्री मार्ग बाधित हो सकते हैं, जिससे परिवहन लागत और बीमा प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी होगी।

बजट के बाद एक ऑनलाइन वेबिनार को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा, ‘‘हमने एक अंतर-मंत्रालयी समूह बनाया है जो हर दिन बैठक करता है और पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों की बारीकी से निगरानी कर रहा है। यह हमारे पोत परिवहन, लॉजिस्टिक, निर्यात और महत्वपूर्ण आयात में किसी भी कमजोरी का आकलन करेगा और हम विभिन्न मंत्रालयों के साथ मिलकर कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।’’

मंगलवार को हुई समूह की पहली बैठक के दौरान विभिन्न मंत्रालयों ने कुछ सुझाव दिए हैं।

गोयल ने कहा, ‘‘हम उन सुझावों पर काम करेंगे और वाणिज्य मंत्रालय में आपके बहुमूल्य सुझावों का स्वागत करेंगे ताकि पश्चिम एशिया संकट का भारत पर कम से कम प्रभाव पड़े।’’

मंत्री ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि यह बैठक सभी संबंधित मंत्रालयों, प्रमुख लॉजिस्टिक और व्यापार सुविधा भागीदारों के साथ उभरती भू-राजनीतिक स्थिति की समीक्षा के लिए की गई थी।

उन्होंने कहा, ‘‘निर्यात संबंधी प्रमाणपत्रों में प्रक्रियात्मक लचीलापन, सुचारू निकासी सुनिश्चित करने के लिए सीमा शुल्क और बंदरगाह अधिकारियों के साथ समन्वय, और निर्यातकों के हितों की रक्षा के लिए वित्तीय और बीमा संस्थानों के साथ तालमेल जैसे उपायों के माध्यम से नरेन्द्र मोदी सरकार की तत्परता दोहराई गई है।’’

गोयल ने बताया कि इस संदर्भ में ‘आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए अंतर-मंत्रालयी समूह (आईएमजी) बनाया गया है। इसमें वित्तीय सेवा विभाग, विदेश मंत्रालय, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के सदस्य शामिल हैं।

सरकार ने विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) में निर्यातकों और आयातकों के लिए 24/7 हेल्प डेस्क भी स्थापित किया है।

भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा कि फिलहाल स्थिति अनिश्चित है। पोत परिवहन कंपनियों ने 1,000 से 4,000 डॉलर के बीच ‘अधिभार’ या ‘आकस्मिक शुल्क’ लगा दिया है।

सहाय ने कहा, ‘इससे परिवहन व्यय में वृद्धि होगी। अत्यंत खेदजनक है कि ये अधिभार उन खेपों पर भी लगाया है, जो पहले ही बंदरगाहों से प्रस्थान कर चुकी हैं।’ उन्होंने यह भी बताया कि पोत परिवहन कंपनियां यदि लाल सागर के मार्ग से गुजरती हैं, तो उन्हें बीमा सुरक्षा भी प्राप्त नहीं हो रही है।

निर्यातकों को आशंका है कि यदि संघर्ष अरब जगत के अन्य हिस्सों में फैला, तो बाब-अल-मंडेब, लाल सागर और स्वेज नहर के माध्यम से माल की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।

बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य लाल सागर और भूमध्य सागर को हिंद महासागर से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण मार्ग है।

यदि इस मार्ग पर व्यवधान होता है, तो जहाजों को अफ्रीका का चक्कर लगाकर ‘केप ऑफ गुड होप’ के रास्ते मोड़ना पड़ सकता है। इससे यूरोप और अमेरिका जाने वाली खेप के समय में अनुमानित 15-20 दिन की देरी हो सकती है।

लॉजिस्टिक में किसी भी प्रकार के व्यवधान से जलपोत परिवहन, कंटेनर, विलंब शुल्क और बीमा से संबंधित लागत में भारी वृद्धि होगी। इसके परिणामस्वरूप, वैश्विक बाजार में भारतीय वस्तुएं प्रतिस्पर्धी नहीं रह जाएंगी। साथ ही, माल के मार्ग-परिवर्तन के कारण खेपों के पहुंचने में भी अत्यधिक विलंब होगा।

भाषा सुमित अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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