नयी दिल्ली, तीन मार्च (भाषा) एक नए अध्ययन में पाया गया है कि स्तन कैंसर विश्व भर में महिलाओं की मृत्यु या बीमारी का एक प्रमुख कारण है। भारत में वर्ष 1990 से 2023 के बीच स्तन कैंसर के मामलों में चौंका देने वाली 477 प्रतिशत और इस बीमारी से होने वाली मौतों में 352 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
‘लैंसेट ऑन्कोलॉजी’ में प्रकाशित इस अध्ययन रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2050 तक वैश्विक स्तर पर स्तन कैंसर के मामलों की संख्या बढ़कर 35 लाख हो जाएगी (जो 2023 में 23 लाख से एक तिहाई अधिक है) और इससे होने वाली मौतों का आंकड़ा 44 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 13 लाख प्रति वर्ष हो जाएगा।
अमेरिका के वाशिंगटन विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (आईएचएमई) की कायले भांगडिया के नेतृत्व में किए गए अध्ययन के अनुसार, भारत में 2023 में लगभग 2.03 लाख कैंसर के मामले दर्ज किए गए (जो 1990 के मुकाबले लगभग 477 प्रतिशत की वृद्धि है) और एक लाख से अधिक मौतें हुईं जो 352.3 प्रतिशत की वृद्धि है।
इस बीमारी का प्रभाव विश्व भर में एक समान नहीं था, निम्न और मध्यम आय वाले देश उच्च आय वर्ग की तुलना में अधिक प्रभावित हुए।
अध्ययन में पाया गया कि निम्न आय वर्ग में आयु आधारित मानकीकृत घटना दर (एएसआईआर) में 147.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि उच्च आय वर्ग में यह परिवर्तन केवल 1.2 प्रतिशत था।
उच्च आय वर्ग में आयु आधारित मानकीकृत मृत्यु दर (एएसएमआर) में 29.9 प्रतिशत की कमी आई, जबकि निम्न आय वर्ग में इसमें 99.3 प्रतिशत इजाफा हुआ।
भांगडिया ने कहा, ‘‘स्तन कैंसर महिलाओं के जीवन और समुदायों पर गहरा प्रभाव डाल रहा है… उच्च आय वाले देशों में लोगों को आमतौर पर जांच, समय पर निदान और व्यापक उपचार रणनीतियों से लाभ मिलता है, लेकिन स्तन कैंसर का बढ़ता बोझ अब निम्न और निम्न मध्यम आय वाले देशों पर आता दिख रहा है, जहां लोगों को अक्सर देर से निदान, गुणवत्तापूर्ण देखभाल तक सीमित पहुंच और उच्च मृत्यु दर का सामना करना पड़ता है। इससे महिला स्वास्थ्य की दिशा में हुई प्रगति के धूमिल होने का खतरा उत्पन्न हो गया है।’’
भाषा संतोष माधव
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