नयी दिल्ली, दो मार्च (भाषा) हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजस्व घाटे की भरपाई को विशेष केंद्रीय सहायता के तहत वित्तीय पैकेज की मांग की।
मुख्यमंत्री सुक्खू और वित्त मंत्री की यह मुलाकात हिमाचल प्रदेश विधानसभा द्वारा 18 फरवरी को केंद्र के राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को बहाल करने के प्रस्ताव को पारित किए जाने के लगभग दो सप्ताह बाद सामने आया है।
राज्य सरकार के बयान के अनुसार, बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने वित्त मंत्री सीतारमण से पहाड़ी राज्यों की अर्थव्यवस्था का समुचित आकलन करने और सुधारात्मक उपाय सुझाने के लिए एक समिति गठित करने का अनुरोध भी किया।
बयान के मुताबिक, सुक्खू ने कहा कि आरडीजी बंद किए जाने से हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर दूरगामी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और इस पहाड़ी राज्य की तुलना उन अन्य राज्यों से नहीं की जा सकती जिनका आरडीजी बंद किया गया है।
सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के लिए राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) का योगदान लगभग 12.7 प्रतिशत था, जो नगालैंड के बाद दूसरा सबसे अधिक था।
उन्होंने कहा कि बड़े राज्य इसे सहन कर सकते हैं, लेकिन हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था ऐसा नहीं कर सकती।
सुक्खू ने कहा कि सभी राज्यों को एक ही पैमाने पर आंकना न तो उचित है और न ही पारदर्शी।
उन्होंने इसे सहकारी संघवाद की भावना को कमजोर करने वाला कदम बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत उन राज्यों को अनुदान प्रदान किए जाते हैं जो अपनी राजस्व प्राप्तियों और व्यय के बीच अंतर को पूरा नहीं कर सकते।
उन्होंने यह भी कहा कि यह पहली बार है जब वित्त आयोग ने छोटे पहाड़ी राज्यों की विकासात्मक आवश्यकताओं की पूरी तरह अनदेखी की है।
भाषा योगेश अजय
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