नयी दिल्ली, दो मार्च (भाषा) वाशिंगटन आधारित ‘इंस्टिट्यूट फॉर गवर्नेंस एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ के सह-संस्थापक डॉ. डरवुड ज़ेलके ने कहा कि गैर-कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) प्रदूषकों, विशेष रूप से मीथेन जैसे अल्पकालिक जलवायु प्रदूषकों में कटौती करने से बढ़ते तापमान पर रोक लगाई जा सकती है, जिससे 2050 तक 0.4 डिग्री सेल्सियस से 0.6 डिग्री सेल्सियस तक की तापमान वृद्धि को टाला जा सकता है।
तुलना के लिए, यदि दुनिया 2050 तक सीओ2 उत्सर्जन को लक्षित करके सफलतापूर्वक कार्बन उत्सर्जन कम कर लेती है, तो केवल 0.1 डिग्री सेल्सियस की वैश्विक वृद्धि को ही टाला जा सकता है।
प्रोफेसर एवं लेखक ज़ेलके ने कहा, ‘‘ऐसा इसलिए है क्योंकि जब आप जीवाश्म ईंधन संयंत्रों को बंद करते हैं, तो आप मौजूदा वैश्विक तापमान वृद्धि को खोल देते हैं, क्योंकि अल्पकालिक सल्फेट, जो ग्रह को ठंडा करते हैं, कुछ ही दिनों में बाहर निकल जाते हैं।’’
वह पिछले सप्ताह ‘द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टिट्यूट’ (टेरी) द्वारा आयोजित विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन (डब्ल्यूएसडी) में प्रमुख वक्ताओं में से एक थे।
जेलके ने पीटीआई-भाषा के साथ एक साक्षात्कार में उदाहरण के तौर पर कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन ने 2020 में समुद्री ईंधन में सल्फर की मात्रा पर सख्त सीमाएं लागू कीं। उन्होंने कहा कि हालांकि इससे ‘सल्फर डाइऑक्साइड’ (एसओ2) उत्सर्जन में कमी आई, लेकिन इस कदम से पृथ्वी का तापमान अनुमानित तौर पर 0.04 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है।
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नेत्रपाल माधव
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