नयी दिल्ली, दो मार्च (भाषा) कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने सोमवार को भविष्य निधि जमा पर 2025-26 के लिए ब्याज दर 8.25 प्रतिशत पर बरकरार रखी। यह लगातार तीसरा वर्ष है जब ब्याज दर को इस स्तर पर रखा गया है। एक सूत्र ने यह जानकारी दी।
पिछले वर्ष फरवरी में, ईपीएफओ ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 8.25 प्रतिशत ब्याज दर को बरकरार रखा था।
ईपीएफओ ने 2024 में ब्याज दर को बढ़ाकर 2023-24 के लिए 8.25 प्रतिशत कर दिया था, जो 2022-23 में 8.15 प्रतिशत थी।
श्रम मंत्रालय ने कहा कि केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में सोमवार को केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) ने अपनी बैठक में 2025-26 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) पर 8.25 प्रतिशत का ब्याज देने की सिफारिश की है।
ईपीएफओ के निर्णय लेने वाले शीर्ष निकाय सीबीटी की सिफारिश पर वित्त मंत्रालय मंजूरी देगा। सरकार द्वारा ब्याज दर आधिकारिक रूप से अधिसूचित करने के बाद ईपीएफओ अंशधारकों के खातों में ब्याज जमा करेगा।
मंत्रालय ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, ईपीएफओ ने मजबूत वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है। इससे ब्याज खाते पर दबाव डाले बिना स्थिर और प्रतिस्पर्धी रिटर्न सुनिश्चित किया जा रहा है।
सीबीटी ने आयकर विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त उन ट्रस्ट के मामले में संबंधित अनुपालन मुद्दों को हल करने के लिए एकमुश्त माफी योजना को भी मंजूरी दी है, जो अभी तक कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 के अंतर्गत नहीं आते हैं या जिन्हें छूट नहीं दी गई है। इसमें वित्त अधिनियम, 2026 के प्रावधानों को भी ध्यान में रखा गया है।
प्रस्तावित योजना का उद्देश्य प्रतिष्ठानों और न्यासों को एक निर्धारित छह महीने की अवधि के भीतर अनुपालन के दायरे में लाना है। इसका मुख्य उद्देश्य श्रमिकों के हितों की रक्षा करना है, जबकि उन प्रतिष्ठानों और न्यासों के लिए जुर्माना, ब्याज आदि को माफ करना है जिन्होंने पहले ही वैधानिक योजना के बराबर या उससे बेहतर लाभ प्रदान किए हैं।
इसके तहत पिछली तिथि से छूट की अनुमति है लेकिन यह कुछ शर्तों पर निर्भर है। साथ ही यह सुनिश्चित करता है कि सभी पात्र कर्मचारियों को वैधानिक लाभ प्राप्त हों।
इस कदम से 100 से अधिक जारी मुकदमे और कई अन्य मामलों के निपटान की उम्मीद है, जिससे विभिन्न ट्रस्ट के हजारों सदस्यों को लाभ होगा।
यह योजना उन छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों पर लागू होगी जिन्होंने कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 के प्रावधानों का अनुपालन किया है।
बोर्ड ने ईपीएफ छूट पर नई सरलीकृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को मंजूरी दी है, जिसमें मौजूदा चार एसओपी और छूट नियमावली को एक व्यापक रूपरेखा में समेकित किया गया है। इसका उद्देश्य अनुपालन बोझ को कम करना है।
एसओपी में पूर्व संचित राशि को ‘सरेंडर’ करने और स्थानांतरित करने के लिए एक संपूर्ण डिजिटल प्रक्रिया भी दी गई है।
इसके साथ ही सीबीटी ने सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत नई सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की अधिसूचना को मंजूरी दे दी है ताकि मौजूदा रूपरेखा से नए ढांचे में सुचारू रूप से बदलाव सुनिश्चित किया जा सके।
नई स्वीकृत ईपीएफ योजना, 2026, ईपीएस, 2026 और ईडीएलआई योजना, 2026 मौजूदा योजनाओं का स्थान लेंगी और भविष्य निधि, पेंशन और बीमा लाभ से जुड़ी व्यवस्था के लिए एक मजबूत कानूनी आधार प्रदान करेंगी।
निष्क्रिय खातों के निपटान के लिए, बोर्ड ने 1,000 रुपये या उससे कम की राशि वाले निष्क्रिय ईपीएफओ खातों में दावा निपटान की स्वतः शुरुआत के लिए एक पायलट परियोजना को मंजूरी दी।
पायलट परियोजना की सफलता के आधार पर, इस सुविधा को बाद के चरणों में 1,000 रुपये से अधिक की राशि वाले खातों तक बढ़ाया जाएगा, जिससे ईपीएफओ में सदस्य-केंद्रित सुधारों को और मजबूती मिलेगी।
बोर्ड ने एक पारदर्शी और समयबद्ध ढांचे को संस्थागत रूप देने के लिए एक व्यापक मानक परिचालन प्रक्रिया (एसओपी) को मंजूरी दी। इसमें बेहतर तरीके से निर्णय लेने, निवेश निगरानी प्रकोष्ठ (आईएमसी) द्वारा मजबूत निगरानी, पुनर्निवेश और ब्याज दर जोखिमों से सुरक्षा और एक स्पष्ट लेखापरीक्षा प्रणाली का प्रावधान है।
मार्च, 2025 तक 28.34 लाख करोड़ रुपये से अधिक के एकीकृत कोष और सरकारी प्रतिभूतियों, एसडीएल, पीएसयू बॉन्ड और अन्य स्वीकृत निवेश उत्पादों में इसके पर्याप्त निवेश को देखते हुए, सदस्यों की राशि की सुरक्षा और अधिकतम प्रतिफल सुनिश्चित करने के लिए कॉरपोरेट कार्रवाइयों के जवाब में समय पर और उपयुक्त निर्णय लेना महत्वपूर्ण है।
बोर्ड ने ईपीएफओ योजनाओं में कोष प्रबंधन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया को मंजूरी दी।
सुधार में कोष का समेकन, वार्षिक एसआईपी पद्धति को अपनाना, परिभाषित परिचालन समयसीमा और ओवरड्राफ्ट सुविधा का प्रावधान शामिल है।
एसओपी इक्विटी ईटीएफ निवेश के लिए एक संरचनात्मक ढांचा प्रस्तुत करता है। इसमें स्पष्ट रूप से परिभाषित प्रवेश और निकास प्रोटोकॉल, जोखिम सीमाएं, अनुपालन नियंत्रण और निवेश निगरानी प्रकोष्ठ (आईएमसी) के माध्यम से बेहतर निगरानी की व्यवस्था शामिल है।
इन सुधारों का उद्देश्य सूझबूझ वाले जोखिम मापदंडों के भीतर अधिकतम प्रतिफल प्राप्त करना, नकदी नियोजन को मजबूत करना और करोड़ों ईपीएफ सदस्यों के दीर्घकालिक हितों की रक्षा करना है।
बोर्ड ने ईपीएफ की ओर से सीधी भर्ती और पदोन्नति परीक्षाओं के संचालन के लिए इंस्टिट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन (आईबीपीएस) को एक एजेंसी के रूप में अनुमोदित किया।
उच्च पेंशन के संबंध में, बोर्ड ने बताया कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के अनुसार, सदस्यों और पेंशनभोगियों द्वारा उच्च वेतन पेंशन के लिए कुल 17.49 लाख आवेदन दाखिल किए गए थे।
उपरोक्त आवेदनों में से, 23 फरवरी, 2026 तक लगभग 15.24 लाख आवेदनों का निपटारा किया जा चुका है।
भाषा रमण अजय
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