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Wednesday, 8 April, 2026
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तृणमूल घुसपैठियों का नाम मतदाता सूची में बनाए रखने के लिए एसआईआर का विरोध कर रही: प्रधान

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गढ़बेता (प. बंगाल), एक मार्च (भाषा) केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रविवार को आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के तहत नामों के हटाए जाने का विरोध कर रही है, क्योंकि उसे डर है कि आगामी विधानसभा चुनावों में ‘‘घुसपैठियों’’ का उसका वोट बैंक काम नहीं आएगा।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता प्रधान ने पश्चिम मेदिनीपुर जिले में पार्टी की ‘परिवर्तन यात्रा’ को रवाना करने से पहले आयोजित रैली को संबोधित करते हुए दावा किया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ‘घुसपैठियों’ को वोट डालने का हकदार बनाने के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख किया और मतदाता सूची के एसआईआर को रोकने की कोशिश की, जो सफल नहीं हुई।

उन्होंने जनसभा में उपस्थित लोगों से पूछा, ‘‘क्या आप चाहते हैं कि बांग्लादेशी या रोहिंग्या घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाएं? क्या आप चाहते हैं कि उन्हें वे सुविधाएं मिलें जो आप जैसे वास्तविक निवासियों के लिए हैं? आप बंगालियों का बंगाल चाहते हैं या रोहिंग्या और बांग्लादेशियों का?’’

प्रधान ने कहा, ‘‘फर्जी दस्तावेजों के साथ बंगाल में घुसकर रहने वाले घुसपैठियों को बाहर निकाल दिया जाएगा।’’

केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि एसआईआर के बाद, मतदाता सूची में केवल वास्तविक नागरिकों के नाम ही शामिल हैं और ‘‘फर्जी तथा घुसपैठियों’’ के नामों को हटा दिया गया है, जिससे राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर अफरा-तफरी का माहौल है।

उन्होंने कहा कि यदि वास्तविक मतदाताओं के नाम दर्ज न होने के मामले सामने आए हैं, तो वे सीमित हैं और तकनीकी समस्याओं के कारण हैं, जिनका समाधान निर्वाचन आयोग द्वारा किया जा रहा है।

प्रधान ने रेखांकित किया कि ‘परिवर्तन यात्रा’ ममता बनर्जी सरकार को सत्ता से बेदखल करने और भाजपा की ‘डबल इंजन’ शासन की शुरुआत करने में परिणत होगी। उन्होंने कहा कि एक इंजन दिल्ली से और दूसरा कोलकाता से चलेगा, जिससे राज्य में विकास को गति मिलेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘बंगाल का एक भी वास्तविक नागरिक वंचित नहीं रहेगा। तृणमूल इस मुद्दे पर गुमराह कर रही है और एक झूठी कहानी गढ़ रही है।’’

प्रधान ने कहा, ‘‘बंगाल के लोगों को 34 वर्षों के वामपंथी कुशासन के बाद 2011 में ‘परिवर्तन’ की उम्मीद थी। हालांकि, वामपंथी सत्ता से हट गए, लेकिन उनकी स्थिति और भी बदतर हो गई।’’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘युवाओं के लिए रोजगार के घटते अवसरों से लेकर महिलाओं की सुरक्षा और व्यवसायों के पलायन तक तमाम चिंताए हैं। बंगाल कभी अग्रणी था, जो अब पिछड़ गया है।’’

प्रधान ने कहा, ‘‘बंगाल के युवाओं को रोजगार चाहिए, भत्ता नहीं, महिलाओं को सड़कों और कार्यस्थलों पर सुरक्षा चाहिए। भाजपा यह सुनिश्चित करेगी।’’

उन्होंने राज्य सरकार पर केंद्रीय निधियों का उपयोग करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि केंद्र ने बंगाल के लिए बड़ी रकम स्वीकृत की थी, लेकिन ‘संकीर्ण राजनीतिक कारणों’ से पैसा खर्च नहीं हुआ।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘केंद्र ने बंगाल के विद्यालयों के लिए 10,000 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, लेकिन यह राशि खर्च नहीं की गई। हर घर में पीने का पानी उपलब्ध कराने से लेकर विद्यालयों में बुनियादी ढांचे के विकास तक, राज्य सरकार आवश्यक कदम नहीं उठा रही है और सारा दोष केंद्र पर मढ़ रही है।’’

प्रधान ने आरोप लगाया कि शहरों और जिलों में सैकड़ों स्कूल या तो दयनीय स्थिति में हैं या बंद हो चुके हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी हमने यादवपुर विश्वविद्यालय के लिए 1,000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे, लेकिन राज्य सरकार के टालमटोल भरे रवैये के कारण इस राशि का उपयोग नहीं हो सका।’’

भाषा धीरज सुरेश

सुरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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