scorecardresearch
Tuesday, 3 March, 2026
होमदेशअर्थजगतआंध्र प्रदेश दुर्लभ पृथ्वी खनन के लिए अपनी तटरेखा खोलेगा, चीन से आयात में कटौती पर नजर

आंध्र प्रदेश दुर्लभ पृथ्वी खनन के लिए अपनी तटरेखा खोलेगा, चीन से आयात में कटौती पर नजर

Text Size:

अमरावती, 28 फरवरी (भाषा) आंध्र प्रदेश अपनी खनिज समृद्ध तटरेखा को बड़े पैमाने पर दुर्लभ पृथ्वी और टाइटेनियम युक्त तटीय रेत खनन के लिए खोलने की योजना बना रहा है। यह एक रणनीतिक कदम है जिसका उद्देश्य चीन से आयात पर भारत की निर्भरता को कम करना और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए एक घरेलू मूल्य श्रृंखला बनाना है।

सार्वजनिक क्षेत्र के आंध्र प्रदेश खनिज विकास निगम (एपीएमडीसी) ने तटीय जिलों में कई भारी खनिज युक्त भंडारों की पहचान की है, जो राज्य को टाइटेनियम डाइऑक्साइड, टाइटेनियम धातु और दुर्लभ पृथ्वी प्रसंस्करण के लिए एक संभावित केंद्र के रूप में स्थापित करता है।

एपीएमडीसी ने बताया कि राज्य में भारत के तटीय रेत खनिज संसाधनों का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा है, जो देश में दूसरा सबसे बड़ा है। इसमें इल्मेनाइट, रूटाइल, जिरकॉन और मोनाजाइट के महत्वपूर्ण भंडार हैं। मोनाजाइट दुर्लभ पृथ्वी तत्वों का एक प्रमुख स्रोत है, जिसका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन टर्बाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा प्रणालियों के लिए चुम्बकों में किया जाता है।

तटीय रेत खनिज पेंट और एयरोस्पेस से लेकर परमाणु ऊर्जा और इलेक्ट्रिक गतिशीलता जैसे उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल हैं।

यह कदम महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं में चीन के प्रभुत्व को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आया है। चीन वैश्विक टाइटेनियम खनिज उत्पादन के आधे से अधिक और 90 प्रतिशत से अधिक दुर्लभ पृथ्वी प्रसंस्करण क्षमता को नियंत्रित करता है।

भाषा पाण्डेय

पाण्डेय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments