गांधीनगर, 27 फरवरी (भाषा) प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शुक्रवार को कहा कि फोरेंसिक विज्ञान एक ढाल है जो तकनीकी धोखाधड़ी और सूचनात्मक विकृतियों दोनों के खिलाफ न्याय की अखंडता की रक्षा करता है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने यहां राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) के चौथे दीक्षांत समारोह में कहा, “फोरेंसिक विज्ञान महज एक तकनीकी विषय से कहीं अधिक है। यह एक रक्षा कवच बन जाता है, जो न्याय की अखंडता को तकनीकी छल और सूचनात्मक विकृतियों दोनों से सुरक्षित रखता है।”
उन्होंने कहा कि डिजिटल युग ने न केवल अपराध करने के तरीके को बदल दिया है, बल्कि सच्चाई का पता लगाने के तरीके को भी बदला है। उन्होंने कहा कि साइबर घुसपैठ, डिजिटल धोखाधड़ी, पहचान में हेरफेर और अंतरराष्ट्रीय डाटा अपराध पारंपरिक जांच मॉडल को चुनौती देते हैं और विश्लेषणात्मक विशेषज्ञता के एक नए स्तर की मांग करते हैं।
उन्होंने कहा कि आम नागरिक फोरेंसिक विश्लेषण के पीछे की तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरी तरह से नहीं समझ सकते हैं, लेकिन उन्हें भरोसा है कि ये प्रक्रियाएं निष्पक्षता, अनुशासन और ईमानदारी के साथ संचालित की जाती हैं।
दीक्षांत समारोह में कुल 1,799 छात्रों को डिग्री प्रदान की गई। इनमें से सत्रह छात्रों को पीएचडी की उपाधि मिली, जबकि 52 छात्रों को स्वर्ण पदक दिये गए।
गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और गुजरात उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल समेत कई गणमान्य व्यक्ति समारोह में उपस्थित थे।
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प्रशांत देवेंद्र
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