नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सहयोगी चिराग पासवान ने सोमवार को कहा कि बिहार में शराबबंदी नीति की समीक्षा की ज़रूरत है क्योंकि इसका उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा है.
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के केंद्रीय मंत्री ने यह बात Off The Cuff के नए एडिशन में कही, जहां वह दिप्रिंट के एडिटर-इन-चीफ शेखर गुप्ता के साथ बातचीत कर रहे थे.
लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के अध्यक्ष ने एनडीए में शामिल होने के अपने फैसले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बारे में भी विस्तार से बात की.
बिहार ने 2016 में शराबबंदी लागू की थी, जिसमें अवैध शराब की तस्करी और स्थानीय स्तर पर नकली शराब बनाने को रोकने के लिए सख्त जांच रखी गई थी. समीक्षा की ज़रूरत पर जोर देते हुए पासवान ने कहा, “अगर मैं कुछ कहता हूं, तो विवाद हो सकता है. लेकिन मुझे लगता है कि इसकी समीक्षा होनी चाहिए. इसकी समीक्षा होनी चाहिए.”
उनकी यह टिप्पणी कुछ दिनों बाद आई है, जब हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के नेता और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने बिहार में शराबबंदी कानून के खराब लागू होने का मुद्दा उठाया था.
मांझी और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के विधायक माधव आनंद, जो दोनों सत्तारूढ़ एनडीए का हिस्सा हैं, ने शराबबंदी नीति की समीक्षा की जरूरत बताई थी और कहा था कि इससे राज्य को बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है.
मैं इसके पीछे की मंशा से सहमत हूं. लेकिन मैं यह भी मानता हूं कि केवल सख्त कानून बनाने से ज़मीन पर चीज़ें सही तरीके से काम नहीं करतीं—चिराग पासवान.
चिराग ने कहा कि जिस उद्देश्य से यह नीति लागू की गई थी, वह पूरा नहीं हो रहा है. पासवान ने कहा, “आज भी बिहार में ज़हरीली शराब उपलब्ध है. ज़हरीली शराब बनाई जा रही है. जिस तरह से अब इसे सीमावर्ती इलाकों से लाया जा रहा है—लोग सचमुच इसे अपने बैग में लेकर आ रहे हैं.”
उन्होंने आगे कहा, “मैं इसके पीछे की मंशा से सहमत हूं, लेकिन मैं यह भी मानता हूं कि केवल सख्त कानून बनाने से चीज़ें ज़मीन पर काम नहीं करतीं. जागरूकता भी बढ़ानी होगी. लोगों को इसके फायदे और नुकसान के बारे में शिक्षित करना होगा.”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हुए, जिन्होंने उन पर और उनकी पार्टी पर भरोसा किया, पासवान ने कहा कि जब उनकी पार्टी नई बनी थी, तब उन्हें पांच सीटें देना और उन पर विश्वास करना उनके लिए बहुत बड़ी बात थी. उन्होंने कहा, “PM साहब बहुत प्रोत्साहित करने वाले रहे हैं. मुझे याद है, उन्होंने एक बार दूसरों से कहा था कि आपको चिराग से सीखना चाहिए कि वह कैसे ईमानदारी से काम करते हैं और पढ़ाई करते हैं और बहस में हिस्सा लेते हैं…यह बहुत प्रोत्साहित करने वाला है.”
चिराग ने अक्टूबर 2021 में अपनी एलजेपी (आरवी) शुरू की थी, जो उनके पिता राम विलास पासवान द्वारा स्थापित मूल लोक जनशक्ति पार्टी में टूट के कुछ महीनों बाद बनी थी. यह टूट अक्टूबर 2020 में राम विलास पासवान की मौत और पार्टी के अंदर कड़वे सत्ता संघर्ष के बाद हुई थी.
यह विवाद तब चरम पर पहुंच गया जब चिराग के चाचा पशुपति कुमार पारस ने जून 2021 में एलजेपी के ज्यादातर सांसदों के साथ उनके खिलाफ विद्रोह कर दिया और पार्टी नेतृत्व पर दावा किया. बाद में निर्वाचन आयोग ने मूल एलजेपी का नाम और चुनाव चिन्ह पारस गुट को दे दिया.
इसके बाद चिराग ने एलजेपी (आरवी) बनाई, और उसे ‘हेलीकॉप्टर’ चुनाव चिन्ह मिला.
उन्होंने OTC कार्यक्रम में कहा, “जब जून 2021 में (एलजेपी) में टूट हुई, तो मेरी मां बहुत भावुक हो गई थीं. मैंने उनसे कहा, ‘मां, आपने जो खोया है, मैं सब वापस लेकर आऊंगा…जब मैंने 2024 में केंद्रीय मंत्री के रूप में शपथ ली, तो मेरी मां ने मुझसे कहा, ‘आज तुमने मुझे सब कुछ लौटा दिया’.”
राजनीति को 24/7 का काम बताते हुए, चिराग ने कहा कि इसे गंभीरता से लेना चाहिए और इसे पार्ट-टाइम काम की तरह नहीं देखना चाहिए.
जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से क्या सीखा, तो हाजीपुर सांसद ने कहा, “काम के प्रति समर्पण. 2014 से पहले, मैंने राजनीति को 24/7 की जिम्मेदारी के रूप में नहीं देखा था..अब मुझे एहसास हुआ है कि इसमें छुट्टी नहीं होती. यह समर्पण का काम है और परिणाम भी देना होता है.”
धर्म को व्यक्तिगत मामला बताते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रगति सुनिश्चित करने के लिए “हमें धर्म वाले हिस्से को अलग रखना होगा और असली काम पर ध्यान देना होगा.”
“जिस दिन धार्मिक नेता राजनीति करना बंद कर देंगे और राजनेता धर्म की बात करना बंद कर देंगे, हम सच में प्रगति करेंगे.”
उन्होंने आगे कहा कि राजनेताओं को केवल विकास के एजेंडे के साथ आगे बढ़ना चाहिए.
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के साथ अच्छे स्वास्थ्य को जोड़ने के सवाल पर, पासवान ने कहा कि स्वस्थ विकल्प शुरू करने की जरूरत है. उन्होंने कहा, “यह लोगों पर निर्भर करता है कि वे क्या चाहते हैं, लेकिन कुछ विकल्प होने चाहिए. मुझे खुशी है कि पीएम ने इस पर बात शुरू की. मोटापा एक पुरानी बीमारी है, मैं उद्योग से कहता हूं कि वे स्वस्थ सेगमेंट लेकर आएं.”
अपने गृह राज्य में पलायन के मुद्दे पर, पासवान ने कहा कि उन्होंने BITO – Bihar International Trade Organisation नाम से रिवर्स माइग्रेशन कार्यक्रम शुरू किया है.
उन्होंने कहा, “मैंने बिहार फर्स्ट और बिहारी फर्स्ट की बात की. जब मैं दूसरे देशों में यात्रा करता हूं, तो बिहारी प्रवासी बहुत मजबूत हैं. वे इतने मजबूत हैं कि मैंने BITO नाम का संगठन शुरू किया. बिहार इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गनाइजेशन.
उन्होंने कहा, “राजनीति में, मैं अपनी सीमाएं समझता हूं. अगर आप सरकार का इंतजार करेंगे, तो कई चीजों में दशकों लग जाएंगे. BITO के जरिए, मैंने बिहारी प्रवासियों को एक मंच पर लाने का काम किया. वे अपने राज्य के लिए कुछ करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें नहीं पता कैसे. इसके तहत, हम बिहार में अपना पहला विश्वविद्यालय खोल रहे हैं. हम एक मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल भी खोल रहे हैं. बिहारी प्रवासी इसमें योगदान दे रहे हैं.”
