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Tuesday, 24 February, 2026
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पूर्व CJI रंजन गोगोई के राज्यसभा में 6 साल—कोई सवाल नहीं, कोई बिल नहीं, केवल 1 बहस

राज्यसभा सांसद के रूप में अपनी रिपोर्ट कार्ड पर पूर्व CJI रंजन गोगोई ने दिप्रिंट से कहा: ‘मैंने सवाल पूछने के लिए सवाल नहीं पूछे...लेकिन कई दूसरे क्षेत्रों में मैंने योगदान दिया.’

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नई दिल्ली: पूछे गए सवाल: शून्य. प्राइवेट मेंबर बिल पेश किए: शून्य. बहस में भागीदारी: एक. औसत उपस्थिति: 53 प्रतिशत. संक्षेप में, यह राज्यसभा में पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई का प्रदर्शन है, जो अगले महीने संसद के ऊपरी सदन में अपना छह साल का कार्यकाल पूरा कर रहे हैं.

दिल्ली स्थित गैर-सरकारी रिसर्च संगठन पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के डेटा के अनुसार, 13 फरवरी 2026 तक, जस्टिस (रिटायर्ड) गोगोई की छह साल में औसत संसदीय उपस्थिति लगभग 53 प्रतिशत रही, जो राज्यसभा सांसदों की औसत 80 प्रतिशत उपस्थिति से काफी कम है.

राज्यसभा सांसद के रूप में अपनी रिपोर्ट कार्ड पर गोगोई ने दिप्रिंट से कहा, “हालांकि, मैंने जितने सेशन में संभव हो सका, उतने में भाग लिया, लेकिन मुझे पता है कि मेरी उपस्थिति मेरी अपनी उम्मीद से थोड़ी कम रही और मुझे पता है कि मैंने कोई सवाल नहीं पूछा या कोई प्राइवेट मेंबर बिल पेश नहीं किया और एनसीटी बिल पर एक बार बोला.

“ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि सदन में किसी न किसी कारण से बार-बार व्यवधान होता रहा. हाल के समय में ही राज्यसभा में क्वेश्चन ऑवर और जीरो ऑवर सही तरीके से हो रहे हैं.”

गोगोई नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए थे, जहां उन्होंने देश के शीर्ष जज के रूप में लगभग 13 महीने काम किया. रिटायरमेंट के सिर्फ छह महीने बाद, उन्हें संसद के ऊपरी सदन में नामित किया गया और वह राज्यसभा में नामित होने वाले पहले पूर्व CJI बने.

CJI के रूप में, उन्होंने अयोध्या में रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद ज़मीन विवाद पर ऐतिहासिक फैसला देने वाली संविधान पीठ की अध्यक्षता की थी.

पीआरएस और राज्यसभा रिकॉर्ड के अनुसार, नामित सांसद के रूप में अपने छह साल में पूर्व CJI ने ऊपरी सदन में एक भी सवाल नहीं पूछा और न ही कोई प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया.

उनके खाते में कोई ‘स्पेशल मेंशन’ भी नहीं है, जो सांसद सार्वजनिक महत्व के मुद्दों पर करते हैं.

इस बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “मैंने सवाल पूछने के लिए सवाल नहीं पूछे. मैंने सिर्फ भाग लेने के लिए कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया, क्योंकि मैं प्रोफेशनल पॉलिटिशियन नहीं हूं जिसे अपने राजनीतिक करियर को आगे बढ़ाने के लिए पहचान बनानी हो.”

उन्होंने आगे कहा, “लेकिन सांसद होने के नाते कई दूसरे क्षेत्रों में मैंने योगदान दिया, जैसे विदेशी प्रतिनिधिमंडलों, मिशन प्रमुखों और लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों को कई विषयों पर संबोधित करना, जिसमें संविधान का विकास, इसके विस्तृत प्रावधान, इसका वास्तविक कामकाज, और संविधान के तहत न्यायपालिका और विधायिका की भूमिका शामिल है.

“विदेशी प्रतिनिधिमंडलों, मिशन प्रमुखों और लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों के साथ बैठकें इंस्टीट्यूट ऑफ कॉन्स्टीट्यूशनल एंड पार्लियामेंट्री स्टडीज के तहत हुईं, जिसकी अध्यक्षता लोकसभा स्पीकर करते हैं.”

उन्होंने कहा, “मैंने लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों को तीन नए आपराधिक कानूनों के विभिन्न पहलुओं पर संबोधित किया और लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों से मेरा मतलब दिल्ली पुलिस के उन अधिकारियों से है जो जमीन पर काम करते हैं, यानी इंस्पेक्टर और उससे नीचे के अधिकारी.”

राज्यसभा के लिए नामांकन स्वीकार करने के कारण के बारे में बताते हुए, गोगोई ने कहा था कि उन्होंने “राज्यसभा के नामांकन को इसलिए स्वीकार किया क्योंकि उनका मजबूत विश्वास है कि राष्ट्र निर्माण के लिए विधायिका और न्यायपालिका को किसी समय साथ काम करना चाहिए.”

उन्होंने उस समय यह भी कहा था, “संसद में मेरी मौजूदगी न्यायपालिका के विचार विधायिका के सामने रखने और इसके उलट करने का अवसर होगी.”

दिसंबर 2021 में, गोगोई ने अपनी किताब “Justice for the Judge” में भी इस फैसले का बचाव किया. उन्होंने बताया कि उन्होंने बिना हिचकिचाहट नामांकन स्वीकार किया क्योंकि वह न्यायपालिका और अपने क्षेत्र पूर्वोत्तर से जुड़े मुद्दों को उठाना चाहते थे.

जहां बहस में भाग लेने वाले एक सदस्य का औसत 144 है, वहीं गोगोई ने सिर्फ एक बार भाग लिया.

पूर्व CJI ने संसद में अपना पहला और एकमात्र भाषण अगस्त 2023 में दिया, जो मार्च 2020 में राज्यसभा के लिए नामित होने के तीन साल से ज्यादा समय बाद था. उन्होंने Government of National Capital Territory of Delhi (Amendment) Bill, 2023 पर चर्चा में हिस्सा लिया.

बिल का समर्थन करते हुए, गोगोई ने कहा, “मेरे विचार में, यह बिल पूरी तरह वैध है. मेरी समझ में स्थिति यह है—राज्य विधानसभाएं राज्यों के लिए कानून बनाती हैं, संसद केंद्र शासित प्रदेशों के लिए कानून बनाती है. दिल्ली के एनसीटी के लिए, विधानसभा तीन विषयों को छोड़कर बाकी राज्य विषयों पर कानून बनाती है. अनुच्छेद 239AA(3)(b) के तहत, संसद के पास इन तीन विषयों से आगे भी कानून बनाने की शक्ति है.”

उन्होंने कहा, “बिल यही करने की कोशिश कर रहा है. इसलिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने का सवाल ही नहीं है. एक सामान्य व्यक्ति के रूप में, यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित नहीं है, वहां ऑर्डिनेंस की वैधता पर सवाल है, और इसका सदन में चल रही चर्चा से कोई संबंध नहीं है.”

जब गोगोई ने अपना पहला भाषण दिया, तब विपक्ष की कई महिला नेताओं ने उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर वॉकआउट किया. सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में उन्हें किसी भी गलत काम से क्लीन चिट दे दी थी.

अप्रैल 2019 में, सुप्रीम कोर्ट की एक पूर्व जूनियर कोर्ट अधिकारी ने आरोप लगाया था कि गोगोई ने उनका यौन उत्पीड़न किया. जस्टिस एस. ए. बोबडे (अब रिटायर्ड) की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय इन-हाउस कमेटी ने उन्हें इन आरोपों से क्लीन चिट दे दी थी.

राज्यसभा के आंकड़े

पीआरएस डेटा के अनुसार, रंजन गोगोई की 2026 बजट सेशन में उपस्थिति 50 प्रतिशत रही, जबकि 2025 विंटर सेशन में यह 80 प्रतिशत थी और उससे पहले मॉनसून सेशन में 81 प्रतिशत थी. 2025 बजट सेशन में उनकी उपस्थिति 85 प्रतिशत थी, जबकि 2024 विंटर सेशन में यह 58 प्रतिशत थी.

और पीछे जाएं तो, 2021 के मॉनसून सेशन में उनकी उपस्थिति सिर्फ 12 प्रतिशत थी, उसी साल बजट सेशन में 4 प्रतिशत थी और 2020 के बजट सेशन में 67 प्रतिशत थी.

गोगोई ने दिप्रिंट से कहा, “राज्यसभा सदस्य के रूप में मिली सैलरी से और दूसरी चीज़ों के साथ, मैंने एक स्कॉलरशिप फंड बनाया और अभी तक 3-4 साल की अवधि के लिए 50 से ज्यादा स्टूडेंट्स की लीगल एजुकेशन का खर्च उठाया है. इस ‘इनकम’ का एक भी पैसा मैंने अपनी पर्सनल ज़रूरतों के लिए इस्तेमाल नहीं किया.”

हालांकि, पिछले कुछ सेशन में उनकी उपस्थिति बढ़ी, लेकिन उन्होंने कोई बड़ा इंटरवेंशन नहीं किया, जैसे सवाल पूछना या बहस में हिस्सा लेना. राज्यसभा सांसद के लिए सवाल पूछने का नेशनल एवरेज छह साल के कार्यकाल में लगभग 261 होता है. डेटा के अनुसार, गोगोई ने कोई सवाल या प्राइवेट मेंबर बिल सबमिट नहीं किया.

अक्टूबर 2024 से, वह विधि एवं न्‍याय मंत्रालय की कंसल्टेटिव कमेटी के सदस्य हैं. इससे पहले, सितंबर 2024 में, उन्हें पर्सोनल, पब्लिक ग्रीवेंस, लॉ एंड जस्टिस कमेटी का सदस्य बनाया गया था.

सितंबर 2021 से मई 2022 के बीच, वह कमेटी ऑन कम्युनिकेशंस एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के सदस्य थे. राज्यसभा रिकॉर्ड के अनुसार, इस कमेटी में आठ महीने सदस्य रहने के दौरान, उन्होंने एक भी मीटिंग अटेंड नहीं की.

2021 में, गोगोई ने कोविड के कारण राज्यसभा से अपनी अनुपस्थिति को सही ठहराया था और बाद में कहा था कि नामित सदस्य के रूप में वह एक इंडिपेंडेंट मेंबर हैं, किसी पार्टी व्हिप से बंधे नहीं हैं.

ऊपरी सदन यानी राज्यसभा के सदस्य के रूप में अपने कार्यकाल को लेकर गोगोई ने दिप्रिंट से कहा, “राज्यसभा में मेरा अनुभव बहुत अच्छा रहा. न्यायपालिका के पूर्व सदस्य के लिए यह एक दुर्लभ अनुभव है. मुझे लगता है कि राज्यसभा में कई अच्छी प्रैक्टिस हैं, जिन्हें न्यायपालिका गंभीरता से अपनाने पर विचार कर सकती है.

“परिस्थितियों को देखते हुए, मुझे लगता है कि मैंने अपना बेस्ट किया, लेकिन जैसा कहा जाता है, हमेशा और बेहतर किया जा सकता था.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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